<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</title>
	<atom:link href="https://www.hearingsol.com/hi/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.hearingsol.com/hi/</link>
	<description>बेहतर सुनें स्पष्ट बोलें</description>
	<lastBuildDate>Mon, 20 Jun 2022 06:46:19 +0000</lastBuildDate>
	<language>hi-IN</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.0.11</generator>

<image>
	<url>https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/01/cropped-hearingsol-fav-32x32.png</url>
	<title>HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</title>
	<link>https://www.hearingsol.com/hi/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>दिवाली पर सेहत का रखें ध्यान &#8211; जाने ये जरुरी बाते?</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Oct 2019 11:46:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3903</guid>

					<description><![CDATA[<p>दिवाली का त्यौहार मतलब ढेर सारी मिठाइयां और पकवान खाने का अवसर? क्यों आ गया न आपके मुँह में भी पानी? जी हाँ, यह पर्व ही ऐसा है की मिठाइयों और विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट भोजन की बात आते ही सबके मुँह में पानी आने लगता है, और आये भी क्यों नहीं? यह त्यौहार ही ... <a title="दिवाली पर सेहत का रखें ध्यान &#8211; जाने ये जरुरी बाते?" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/" aria-label="More on दिवाली पर सेहत का रखें ध्यान &#8211; जाने ये जरुरी बाते?">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/">दिवाली पर सेहत का रखें ध्यान &#8211; जाने ये जरुरी बाते?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिवाली का त्यौहार मतलब ढेर सारी मिठाइयां और पकवान खाने का अवसर? क्यों आ गया न आपके मुँह में भी पानी? जी हाँ, यह पर्व ही ऐसा है की मिठाइयों और विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट भोजन की बात आते ही सबके मुँह में पानी आने लगता है, और आये भी क्यों नहीं? यह त्यौहार ही तो है, जब सभी के घर में नए-नए किस्म के जायकेदार और लजीज पकवान बनाने का अवसर मिलता है, और इन्हे खाते ही आपको मानो परम आनंद की प्राप्ति हो जाती है। पर इन सभी जी ललचाने वाले व्यंजनों को खाने के चक्कर में आप इस दिवाली पर सेहत से कोई समझौता न करें।</p>



<p>तो आइये अब बात करते है की दिवाली पर स्वादिष्ट मिठाई और भोजन का आनंद लेते हुए अपनी सेहत का ध्यान कैसे रखें? समझिये इनसे सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में? साथ ही सेहतमंद दिवाली मानाने के कुछ जरुरी सुझाव भी जानिए।</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. दिवाली पर सेहत क्यों ख़राब होती है?</a></li>
<li><a href="#heading2">2. दिवाली पर सेहत ख़राब करने वाले तत्व</a></li>
<li><a href="#heading3">3. दिवाली पर सेहत की देखभाल कैसे करें?</a></li>
<li><a href="#heading4">4. दिवाली पर सेहत के साथ अतिथि सत्कार?</a></li>
<li><a href="#heading5">5. दिवाली पर सेहतमंद रहने के लिए क्या करें?</a></li>
<li><a href="#heading6">6. दीपावली के दौरान खानपान में सावधानियां</a></li>
<li><a href="#heading7">7. दिवाली पर सेहत बेहतर रखने के टिप्स</a>
<ul>
<li><a href="#heading7.1">7.1. छोटा टुकड़ा लें</a></li>
<li><a href="#heading7.2">7.2. कुछ बेहतर चुने</a></li>
<li><a href="#heading7.3">7.3. एक साथ न खाएं</a></li>
<li><a href="#heading7.4">7.4. तरल पदार्थ भी लें</a></li>
<li><a href="#heading7.5">7.5. ले जाएँ कुछ खास</a></li>
<li><a href="#heading7.6">7.6. व्यायाम भी जरुरी</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading8">8. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">दिवाली पर सेहत क्यों ख़राब होती है?</h2>



<p>दिवाली का अवसर हो और लोगों से मिलने उनके घर न जाएं? भाई ऐसा तो हो नहीं सकता। क्योंकि अक्सर हम दीपावली की शुभकामनायें और बधाई देने एक दूसरे के घर अवश्य जाते है। और जब हम जा ही रहे है तो खाली हाथ तो जायेंगे नहीं? इसलिए सामान्य तौर पर हम मिठाई का डिब्बा या अन्य खाद्य सामग्री ले जाते है। साथ ही जब आप किसी के घर मेहमान बनकर आये हों, तो वह भी आपके लिए तरह-तरह के पकवान तैयार रखता है। </p>



<p>जिससे की दिवाली के मौके पर लजीज व्यंजनों के चटखारों के साथ बातों का सिलसिला भी जारी रहे, और आनंद भी दोगुना हो जाये। यही दीपावली या अन्य किसी भी त्यौहार पर सेहत ख़राब होने की यही सबसे बड़ी वजह है। क्योंकि जब हम लोगों से मिलने उनके घर जाते है। तो अक्सर कई तरह के भोजन देखकर उन्हें खाने से खुद को रोक नहीं पाते है, और यही सिलसिला हर मित्र या रिश्तेदार के घर जाने पर चलता ही रहता है।</p>



<p>इसके साथ ही जब आपका पेट भर जाता है। फिर भी लोगों के जिद करने पर आपको थोड़ा बहुत खाना ही पड़ता है। क्योंकि परंपरा अनुसार हम मेहमान को बिना कुछ खाये नहीं जाने देते है। इसी वजह से आप जरुरत से ज्यादा ही खा लेते है, और फिर सेहत ख़राब होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है।</p>



<h4><strong>दिवाली पर सेहत ख़राब होने के साथ निम्न तकलीफों का सामना भी करना पड़ सकता है &#8211;</strong></h4>



<ul><li>आपके पेट में बहुत दर्द होना</li><li>भोजन न पचने से अपचन होना</li><li>जी मिचलाना या उल्टी होना</li><li>पेट में ऐंठन या मरोड़ होना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/वर्टिगो-सिर-चकराना/">सिर घूमना</a> अथवा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/चक्कर-आना-डिज़ीनेस/">चक्कर आना</a></li><li>बदहजमी या दस्त हो जाना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/सामान्य-सिरदर्द-हेडेक/">आपके सिर में दर्द होना</a></li><li>बहुत असहज महसूस करना</li><li>सांस लेने में तकलीफ होना</li></ul>



<h2 id="heading2">दिवाली पर सेहत ख़राब करने वाले तत्व</h2>



<p>त्योहारों का मौसम आते ही मिठाइयों की दुकानों में तो मानो रौनक ही आ जाती है। फिर चाहे वह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/होली-पर-त्वचा-की-सुरक्षा/">होली </a>हो अथवा दिवाली, हम सभी अपना समय बचाने के लिए बाजारों से मिठाई खरीदने के लिए निकल पड़ते है। ऐसे में इन मिठाइयों के दूकानदार भी बाजार की मांग आपूर्ति को पूरा करने के लिए कुछ दिन पहले से ही कई प्रकार की मिठाइयां बनाना शुरू कर देते है।</p>



<p>जिससे की दीपावली के दिन उन्हें सुगमता से बेचा जा सके और माल की आपूर्ति करने में किसी भी प्रकार की कमी न हो। ताज़ा न होने के कारण दीपावली का पर्व आते-आते यह स्वीट्स ख़राब होने लगते है। ऐसे में अपने व्यवसाय में अधिक मुनाफा बनाने के लिए आपकी सेहत से समझौता करने में यह दूकानदार जरा भी नहीं हिचकते है। और आपको त्यौहार के दिन बासी मिठाइयां बेचने के लिए उन्हें तरह-तरह के इत्र, केवड़े, कैमिकल, और काजू, बादाम, पिस्ता जैसे मेवों से सजाते है।</p>



<p>इन बासी मिठाइयों को खाने से आपकी सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। त्यौहार पर बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए कुछ लोग नकली खोये, दूध, घी, आदि से निर्मित नकली मिठाइयां भी बेचने में पीछे नहीं हटते है। यह मिलावट वाली मिठाई खाने से आपको कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती है।</p>



<h4><strong>निम्नलिखित तत्व या खाद्य पदार्थ आपकी सेहत बिगाड़ सकते है &#8211;</strong></h4>



<ul><li>रंग बिरंगी सजावटी मिठाई</li><li>सस्ते नकली चीनी के उत्पाद </li><li>अधिक महक वाली मिठाई</li><li>बासी और पुरानी मिठाइयां</li><li>मिलावटी और हानिकारक</li><li>कैमिकल युक्त खाद्य पदार्थ</li><li>नकली दूध, घी, खोया, पनीर</li><li>अधिक चिकनाई युक्त भोजन</li><li>तला-भुना, मसालेदार खाना</li></ul>



<h2 id="heading3">दिवाली पर सेहत की देखभाल कैसे करें?</h2>



<p>दिवाली पर सेहत कैसे ठीक रखी जाए? और स्वास्थ्य की देखभाल कैसे करें? यह तो आप पर ही निर्भर करता है। क्योंकि यदि आप खाएंगे तो पछतायेंगे? और नहीं खाएंगे तो ललचायेंगे? पर अगर आप सोच समझ कर खाएंगे तभी स्वस्थ रह पाएंगे। जी हाँ, इसलिए यह बेहद जरुरी है की आप दीपावली के उत्साह में कुछ भी ऐसा न खाएं, जिससे की आपको बाद में तकलीफों का सामना करना पड़े।</p>



<p>जिससे न चाहते हुए भी आपको दिवाली किसी डॉक्टर के क्लिनिक या अस्पताल में गुजारनी पड़े। आप क्या खाते है? कैसे खाते है? और कितना खाते है? इन्ही बातों पर आपके सम्पूर्ण स्वास्थ्य की बागडोर टिकी रहती है। सेहत की देखभाल करने के लिए और पर्व का पूरा आनंद लेने के लिए थोड़ी समझदारी भी जरूरी है।</p>



<p>इसलिए आपकी हेल्थ को नुकसान पहुंचाने वाले खाद्य पदार्थों से तो दूर ही रहें। और आप जो भी खा रहे है? उससे आपके शरीर को क्या फायदे और नुक्सान होंगे? इसकी जानकारी अवश्य रखें। आप चाहें तो अपने शरीर की जरुरत के अनुसार क्या और कितना खाना है? उसकी सूची बना सकते है।</p>



<h2 id="heading4">दिवाली पर सेहत के साथ अतिथि सत्कार?</h2>



<p>दिवाली पर सेहत का ख्याल रखते हुए घर आने वाले लोगों की मेहमान नवाजी अथवा अतिथियों का स्वागत कैसे करे? यह भी एक समस्या होती है। क्योंकि हमारी परंपरा के अनुसार हम बिना खिलाये तो किसी गेस्ट को जाने नहीं दे सकते है, और ऐसी खाद्य सामग्री उनके सामने रखने से भी कोई फायदा नहीं जिन्हे देखकर ही वो खाना ही पसंद न करें।</p>



<p>बाजार से लायी गयी सस्ती और रंगबिरंगी मिठाई देखने में भले ही अच्छी और आकर्षक लगे पर यह खाने के बाद तकलीफ ही देती है। इसलिए बेहतर होगा की बाजार से लायी गयी ढेर सारी मिठाइयों को किसी अतिथि को पेश करने से अच्छा है, की आप उन्हें थोड़ा खिलाएं पर कुछ हेल्दी खिलाएं।</p>



<p>यदि आपको दीपावली की तैयारियों के साथ इतना समय नहीं मिल रहा है की आप घर पर ही कई अलग तरह के पकवान और मीठा बनाये? और बाजार से मिठाई लाना आपकी मजबूरी बन जाये? तो फिर आपको इन फ़ूड आइटम्स को बाजार से खरीदते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए।</p>



<h4><strong>निम्नलिखित सुझावों से आप मेहमानो के स्वागत और सेहत दोनों का ख़याल रख सकते है &#8211;</strong></h4>



<ul><li>रंग बिरंगी और अधिक खुशबूदार मिठाई न लें।</li><li>मिठाई लेने से पहले उसे थोड़ा चख जरूर लें।</li><li>इससे उसके स्वाद और ताजगी का पता चलेगा।</li><li>आप मेहमान के सामने ढेर सारा मीठा मत रखें।</li><li>आप मीठे और नमकीन पकवान को बराबर रखें।</li><li>अधिक तला भुना और तेलीय भोजन नहीं बनायें।</li><li>यदि हो सके तो पहले से पूछ कर भोजन बनायें।</li><li>पक्के खाने के साथ कच्चे खाने का विकल्प भी दें।</li><li>अथिति की पसंद पर सादा भोजन भी दे सकते है।</li><li>ज्यादा मिठाई की जगह सूखे मेवे भी रख सकते है।</li><li>ड्राई फ्रूट्स देखने में बेहतर और हेल्दी भी होते है।</li><li>आप चाहें तो ताजे फलों की चाट भी रख सकते है।</li></ul>



<h2 id="heading5">दिवाली पर सेहतमंद रहने के लिए क्या करें?</h2>



<p>दीपावली या अन्य किसी भी बड़े त्यौहार पर हमारी दैनिक दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाती है। जिसकी वजह, त्यौहार के अवसर पर होने वाली तैयारियां और खरीदारी में व्यतीत होने वाला कीमती समय है। साथ ही और मेहमानों के आवभगत के लिए तरह-तरह के पकवान बनाने, और घर को बेहतर दिखाने के लिए की जाने वाली अतिरिक्त साफ-सफाई और सजावट भी कुछ कम समय नहीं लेती है।</p>



<p>ऐसे में आपको अपनी सेहत का ध्यान रखने का मौका ही नहीं मिलता है। क्योंकि हम सभी यह सोचते है की भाई दिवाली के पर्व पर भी हम अपनी दिनचर्या से समय नहीं निकालेंगे? तो त्यौहार का आनंद कैसे लेंगे?</p>



<p>हालाँकि यह बात भी बिलकुल सही है क्योंकि दीपावली भी साल में एक बार ही तो आती है। पर उत्सव के उत्साह में अपनी दिनचर्या से समझौता करना भी कहाँ की समझदारी है? ऐसे में आपको क्या करना चाहिए? की आपके अनमोल पर्व के जशन में भी कमी न आये और खुद को सेहतमंद भी रखा जा सकें?</p>



<h4><strong>तो चलिए जानते है दीपावली पर सेहतमंद रहने का उपाय &#8211;</strong></h4>



<ul><li>त्यौहार पर न चाहते हुए भी भोजन अधिक हो ही जाता है।</li><li>इसलिए अपनी दिनचर्या में योग अभ्यास को जरूर रखें।</li><li><span style="font-size: inherit; background-color: initial;">आपको प्रतिदिन एक्ससरसाइज </span>करना बेहद जरुरी है।</li><li>क्योंकि बहुत अधिक कैलोरी लेने से मोटापा हो सकता है।</li><li>समय की कमी है तो फिर आप हल्की एक्ससरसाइज करें।</li><li>यदि सुबह दौड़ने न जा पाएं तो शाम को पैदल जरूर चलें।</li><li>भोजन जल्दी पचाने वाले योग (जैसे वज्रासन) जरूर करें।</li><li>भोजन को एकसाथ न लें आराम से थोड़ा-थोड़ा ही खाएं।</li></ul>



<h2 id="heading6">दीपावली के दौरान खानपान में सावधानियां</h2>



<p>बहुत से लोगों का मानना होता है की मनुष्य इतनी मेहनत क्यों करता है? अरे भाई बेहतर खाने के लिए और क्या? तो फिर जब अच्छा खाने का मौका मिले तो उसे क्यों गवाया जाये? हालाँकि यह बात तो सच है की यदि मानव को भूख न लगती तो वह शायद कोई काम ही नहीं करता।</p>



<p>लेकिन लज़ीज पकवानों और मिठाई को देखकर उन पर टूट पड़ना भी कहाँ की समझदारी है? जिससे की आपको बाद में तकलीफ का सामना ही करना पड़े। क्योंकि यह भी सच है की अति हर चीज़ की बुरी ही होती है। इसलिए यह भी जरुरी है की आप जब खाएं तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें।</p>



<p>जिससे आपको दिवाली पर सेहत बिगड़ने जैसी किसी परेशानी से दो-चार न होना पड़े। और आपकी दीपावली अपने परिवार, रिश्तेदार, मित्रों, और सहकर्मियों के साथ पूरे हर्ष उल्लास के साथ ही गुजरे, किसी डॉक्टर के साथ नहीं। चूँकि त्यौहार पर खानपान के दौरान कुछ समझदारी रखने से आप बहुत सी तकलीफों से बच सकते है।</p>



<h4><strong>इसलिए नीचे दिए आवश्यक तथ्यों को ध्यान से समझे और उनका पालन करें &#8211;</strong></h4>



<ul><li>अपने सामने मिठाइयां देखकर उनपर टूट न पड़ें।</li><li>सिर्फ मिठाइयों से ही अपना पेट बिलकुल न भरें।</li><li>यदि आप मधुमेह के मरीज़ है तो मीठा न ही खाएं।</li><li>बेहतर होगा आप घर में ही शुगर फ्री मीठा बनवाएं।</li><li>शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए जाँच करें।</li><li>किसी के घर जा रहे है तो थोड़ा खा कर ही निकले।</li><li>किसी एक व्यक्ति के घर पर ही पूरा पेट न भर लें।</li><li>सभी के घर पर थोड़ा सा ही खाने की कोशिश करें।</li><li>अधिक तला-भुना, चिकनाई युक्त भोजन कम खाएं।</li><li>यदि हो सके तो पूरी, परांठे की जगह रोटी बनवा लें।</li><li>भोजन को जल्दी पचाने के लिए नींबू पानी जरूर लें।</li><li>दीपावली के बाद एक हफ्ते तक मिठाई न ही खाएं।</li></ul>



<h2 id="heading7">दिवाली पर सेहत बेहतर रखने के टिप्स</h2>



<p>दिवाली का मौका हो या फिर कोई अन्य त्यौहार अपने सामने बढ़िया, स्वादिष्ट, और जायकेदार खाने पीने की चीज़ों को देखकर सभी का मन ललचा ही जाता है। और न चाहते हुए भी आप जरुरत से ज्यादा खा ही लेते है। साथ ही एक दूसरे के घर मिलने के लिए जाते समय आप अक्सर मिठाइयों का डिब्बा ही लेकर जाते है।</p>



<p>जिससे दिवाली के हफ्ते भर बाद भी जरुरत से ज्यादा कैलोरी लेना आपकी मजबूरी बन जाती है। क्योंकि मिठाइयां जल्दी ख़राब होने लगती है। इसलिए उन्हें फेकने से बेहतर आप खाना पसंद करते है। जिससे दिवाली के पटाखों की तरह ही आपके डाइट प्लान की भी धज्जियाँ उड़ जाती है।</p>



<p>इस साल ऐसा बिलकुल भी न हो इसलिए हम आपको बताने जा रहें है कुछ जरुरी सुझाव, जिनकी सहायता से आप इस दिवाली अपनी सेहत को बेहतर रखने में कामयाब हो सकते है। तो चलिए जानते है की यह सुझाव क्या है? जिनसे आप अपनी दीपावली की खुशियों में स्वाद का तड़का लगा सकते है। यह टिप्स निम्नलिखित है &#8211;</p>



<h3 id="heading7.1">1. छोटा टुकड़ा लें</h3>



<p>अक्सर हम अपने सामने अपनी पसंदीदा मिठाई को देखकर रुक नहीं पाते और पूरा पीस उठाकर खा जाते है। अगर आप भी ऐसा ही करते है? तो अब से न करें, बेहतर होगा की आप मिठाई का एक छोटा सा अथवा आधा टुकड़ा ही खाएं। जिससे आप स्वाद लेने के साथ सेहतमंद भी रहें। क्योंकि भाई अभी दूसरों के घर पर भी तो मिठाई खाना है न?</p>



<h3 id="heading7.2">2. कुछ बेहतर चुने</h3>



<p>यदि आपके सामने मिठाई की बहुत सारी किस्में रखीं है और आप परेशान है की क्या-क्या खाऊं? तो बेहतर होगा की आप उस मिठाई को चुने जो की दूसरों से बेहतर हो, नहीं समझे? जैसे की आपके सामने गुलाब जामुन, देसी घी का हलवा, खोये की बर्फी, रसमलाई, और रसगुल्ला रखा है। तो यह बेहतर होगा की आप रसगुल्ला या रसमलाई चुने।</p>



<h3 id="heading7.3">3. एक साथ न खाएं</h3>



<p>अक्सर ऐसा होता है की हम किस एक व्यक्ति के घर पर जाते है और वहां पर पेट भर कर खा लेते है। पर अन्य लोगों के घर जाने पर और उनके जिद करने पर हमें वहां भी खाना ही पड़ता है। इसलिए बेहतर होगा की आपको कितने लोगों के पास जाना है? इस बात को ध्यान में रखकर सबके घर पर थोड़ा-थोड़ा ही खाएं।</p>



<h3 id="heading7.4">4. तरल पदार्थ भी लें</h3>



<p>अरे भाई लजीज पकवान खाते-खाते अक्सर हम पानी पीना भी भूल जाते है। जिससे बाद में आपके पेट में पानी के लिए भी जगह नहीं बचती है। वैसे तो यह बिलकुल गलत है, क्योंकि शरीर में पानी की कमी से कई समस्या हो सकती है। इसलिए आप पानी या अन्य तरल जैसे &#8211; छाछ, निम्बू पानी जरूर पियें। जिससे आप जरुरत से ज्यादा खाने से बचेंगे और भोजन भी जल्दी पच जायेगा। पर मीठे तरल जैसे कोल्डड्रिंक्स, शरबत, चाय, कॉफी न पियें, अथवा कम पियें।</p>



<h3 id="heading7.5">5. ले जाएँ कुछ खास</h3>



<p>दीपावली पर जब किसी के घर मिलने के लिए जाएँ तो हर बार मिठाई ही मत ले जाएँ। क्योंकि त्यौहार पर सबके घर में मीठा बनता ही है। ऐसे में आपके पैसे भी बर्बाद होते है, और सेहत भी। इससे अच्छा होगा की आप कुछ प्रकार के फलों की टोकरी या ड्राई फ्रूट्स का डिब्बा लेकर जाएँ। यह देखने में बेहतर भी लगेगा और सेहत भी ठीक रहेगी।</p>



<h3 id="heading7.6">6. व्यायाम भी जरुरी</h3>



<p>चूँकि दिवाली के या अन्य किसी भी पर्व पर हमारी डाइट जरुरत से ज्यादा होती है। तो फिर उससे मिलने वाली कैलोरी को तोडना भी जरुरी है। इसलिए दीपावली या अन्य पर्वों पर अपने व्यायाम को त्यागें नहीं। बहुत अधिक न सही पर कुछ जरुरी अभ्यास करें, जैसे की पैदल चलना, साईकिल चलना, योग आदि।</p>



<h2 id="heading8">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>दीपावली रौशनी का त्यौहार है इस दिन हम सभी अपने घरों में भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना कर दीए जलाकर अपने घरों को सजाते है। फिर बारी आती है, अलग-अलग किस्म की मिठाइयों और खाद्य पदार्थों को खाने की, और पटाखे जलाने की, पर यह बेहद जरुरी है, की दिवाली के उत्साह के साथ ही आप अपनी सेहत का और पर्यावरण का ख्याल भी रखें। खान पान का विशेष ध्यान रखें, और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/दिवाली-पर-ग्रीन-पटाखे/">ग्रीन पटाखे ही जलाएं।</a> साथ ही <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुरक्षित-दिवाली-के-सुझाव/">सुरक्षित दिवाली मानाने</a> के लिए पटाखे जलाते समय सावधानी रखें। जिससे की <a href="https://www.hearingsol.com/hi/पटाखों-से-बहरापन/">पटाखों से बहरापन</a> अथवा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/दिवाली-पर-बरते-सावधानिया/">बम गोलों से कान सुन्न होने</a> जैसी घटनाएं न हों। इस दिवाली सुरक्षित रहें स्वस्थ रहें।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/">दिवाली पर सेहत का रखें ध्यान &#8211; जाने ये जरुरी बाते?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ग्रीन पटाखे क्या और कैसे होते है? &#8211; जानिए कब मिलेंगे?</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Oct 2019 13:00:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3880</guid>

					<description><![CDATA[<p>दिवाली का त्यौहार आते ही बाजारों में जैसे एक नयी रौनक आ जाती है। फिर चाहे वह मिठाइयों की दुकाने हों? कपड़ों के शॉप हों? या फिर आतिशबाजी की दुकान हों? हर जगह बस लोग कुछ न कुछ खरीदते ही नज़र आते है। लेकिन यदि आपको ध्यान होगा? तो पिछले वर्षों में सरकार के फैसले ... <a title="ग्रीन पटाखे क्या और कैसे होते है? &#8211; जानिए कब मिलेंगे?" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87/" aria-label="More on ग्रीन पटाखे क्या और कैसे होते है? &#8211; जानिए कब मिलेंगे?">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87/">ग्रीन पटाखे क्या और कैसे होते है? &#8211; जानिए कब मिलेंगे?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिवाली का त्यौहार आते ही बाजारों में जैसे एक नयी रौनक आ जाती है। फिर चाहे वह मिठाइयों की दुकाने हों? कपड़ों के शॉप हों? या फिर आतिशबाजी की दुकान हों? हर जगह बस लोग कुछ न कुछ खरीदते ही नज़र आते है। </p>



<p>लेकिन यदि आपको ध्यान होगा? तो पिछले वर्षों में सरकार के फैसले पर कोर्ट ने ग्रीन नॉर्म्स का पालन न करने वाले पटाखों को बेचने और खरीदने पर रोक लगा दी थी। जिसके चलते पटाखा व्यवसाय को भारी नुकसान हुआ था, और लोगों को दीपावली का आनंद भी कम प्राप्त हुआ था। इसलिए इसके विकल्प में ग्रीन पटाखे बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।</p>



<p>तो चलिए जानते है की यह ग्रीन पटाखे या क्रैकर्स क्या होते है? यह देखने में कैसे होते है? और परंपरागत (सामान्य) पटाखों से कैसे अलग है? साथ ही जानिए की यह ग्रीन आतिशबाजी कब और कहाँ मिलेगी?</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. ग्रीन पटाखे क्या होते है?</a></li>
<li><a href="#heading2">2. ग्रीन पटाखे दिखते कैसे है?</a></li>
<li><a href="#heading3">3. ग्रीन पटाखे के प्रकार कितने है?</a>
<ul>
<li><a href="#heading3.1">3.1. पानी उत्पन्न करने वाले पटाखे</a></li>
<li><a href="#heading3.2">3.2. कम नाइट्रोजन व सल्फर वाले</a></li>
<li><a href="#heading3.3">3.3. कम एलुमिनियम से बने पटाखे</a></li>
<li><a href="#heading3.4">3.4. खुशबू वाले पटाखें (अरोमा क्रैकर्स)</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading4">4. ग्रीन क्रैकर्स व सामान्य पटाखों में अंतर</a></li>
<li><a href="#heading5">5. ग्रीन पटाखे कब मिलेंगे?</a></li>
<li><a href="#heading6">6. ग्रीन पटाखे कहाँ मिलेंगे?</a></li>
<li><a href="#heading7">7. ग्रीन पटाखे की कीमत क्या है?</a></li>
<li><a href="#heading8">8. ग्रीन क्रैकर्स से लाभ क्या है?</a></li>
<li><a href="#heading9">9. ग्रीन पटाखे कैसे जलाएं?</a></li>
<li><a href="#heading10">10. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">ग्रीन पटाखे क्या होते है?</h2>



<p>ग्रीन पटाखे, इनका नाम सुनने से ही आपको अंदाज़ा हो गया होगा की यह पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बनाये गए है। दरसल जब सरकार ने गत वर्ष पटाखों से होने वाले वायु और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदुषण</a> को कम करने के लिए के लिए एक ठोस कदम उठाया, तो बाजार में इन हानिकारक आतिशबाजियों की बिक्री और खरीद पर रोक लगा दी गयी।</p>



<p>परन्तु पटाखा कारोबार को नुकसान न हो, और इससे जुड़े लाखों मजदूरों का रोजगार न छीने इसलिए कोर्ट द्वारा ग्रीन पटाखों को बनाने की बात कही गयी थी। इस पहल को नीरी के वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक पूरा किया। राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) नीरी, भारत सरकार के अंतर्गत काम करने वाले &#8220;वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद&#8221; (CSIR) सीएसआईआर की पर्यावरण शाखा की एक विशेष प्रयोगशाला है। </p>



<p>क्योंकि यह ग्रीन पटाखे जलने पर कम हानिकारक धुआं और कम जहगरीली गैसें उत्पन्न करते है। इसलिए पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते है। हालाँकि ऐसा भी नहीं है की ग्रीन पटाखों से प्रदुषण बिलकुल नहीं होगा? पर इन पटाखों से प्रदुषण के स्तर में 30% तक की कमी जरूर आएगी।</p>



<h2 id="heading2">ग्रीन पटाखे दिखते कैसे है?</h2>



<p>नीरी द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाले यह ग्रीन (हरित) पटाखे दिखने में बिलकुल सामान्य या हमारे परंपरागत पटाखों की तरह ही होते है। इसलिए आपको इस बात की चिंता करने के कोई जरुरत नहीं है की यह देखने में कैसे होंगे? आपको इन्हे देखकर या चलाकर कोई विशेष अंतर महसूस नहीं होगा। सिवाय इसके की यह आपके स्वास्थ्य व कानो को कम हानि पहुंचाएंगे। </p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img width="600" height="200" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/दिवाली-पर-ग्रीन-पटाखे.jpg" alt="" class="wp-image-3892" srcset="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/दिवाली-पर-ग्रीन-पटाखे.jpg 600w, https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/दिवाली-पर-ग्रीन-पटाखे-300x100.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /><figcaption>छवि स्रोत : BCCL 2019</figcaption></figure></div>



<p>क्योंकि हर साल <a href="https://www.hearingsol.com/hi/पटाखों-से-बहरापन/">पटाखों से बहरापन</a>, फेफड़ों की समस्या, आँखों में परेशानी, श्वास, रक्तचाप, व दिल के रोग होने के मामले जरूर देखने को मिलते है। इसलिए इन ग्रीन क्रैकर्स से यह उम्मीद भी लगायी जा रही है की इनके इस्तेमाल से ऐसे सभी मामलों में कमी आएगी। और दीपावली को और बेहतर व आनंदायक बनाया जा सकेगा। </p>



<p>हालाँकि आप <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुरक्षित-दिवाली-के-सुझाव/">सुरक्षित दिवाली मानाने</a> के लिए <a href="https://www.hearingsol.com/hi/दिवाली-पर-बरते-सावधानिया/">दिवाली पर सावधानी जरूर बरते</a>, अन्यथा आपका <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/">कान पटाखे जलाने पर सुन्न</a> हो सकता है, और अन्य प्रकार से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-की-बीमारी-इयर-डिजीज/">कान में समस्याएं</a> होने के साथ कई स्वास्थ्य विकारों का भी सामना करना पड़ सकता है।</p>



<h2 id="heading3">ग्रीन पटाखे के प्रकार कितने है?</h2>



<p>दीपावली के मौके पर बाजारों में नए नए किस्म के और पहले से अलग प्रकार के पटाखे हर साल देखने को मिल जाते है। हालाँकि कुछ परंपरागत आतिशबाजियों की अपनी ही एक खास जगह है जिनमे &#8211; बम, अनार, चकरी, रोशनी, फुलझड़ी, और अन्य पटाखे भी आते है।</p>



<p>बाकी सब इनके ही विभिन्न रूप होते है। और कुछ ऐसे भी होते है जो बाजार में आने के बाद भी अपनी पहचान नहीं बना पाते है। ऐसे में जब ग्रीन पटाखों को बनाने की ओर कदम उठाया गया तो सबसे पहली परेशानी यह आयी की किस प्रकार की ग्रीन आतिशबाजी को बनाया जाये?</p>



<p>आतिशबाजी ऐसी हो जो प्रदुषण को कम करते हुए ईको फ्रेंडली (पर्यावरण सुरक्षित) भी हो, और लोगों को पसंद भी आये। तो बहुत कड़ी मेहनत और कई जाँच परीक्षणों के बाद नीरी ने अभी तक कुल चार अलग श्रेणी (प्रकार) के ग्रीन क्रैकर्स बाजार में उतराने के लिए तैयार किये है।</p>



<p><strong>ग्रीन पटाखे के यह सभी प्रकार निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading3.1">1. पानी उत्पन्न करने वाले ग्रीन पटाखे</h3>



<p>जैसा की आपने पहले भी देखा या सुना होगा? की वातावरण से प्रदुषण को कम करने के लिए पानी का छिड़काव किया गया था? जिससे की हानिकारक तत्व इनमें घुलकर नष्ट हो जाएँ। ठीक इसी तर्ज पर नीरी ने ऐसे पटाखे बनाने का फैसला लिया, जो खुद पानी उत्पन्न करते है और यही बात इन्हे सामान्य आतिशबाजी से खास और बेहतर बनती है।</p>



<p>नीरी के मुताबिक इस प्रकार के पटाखों को सेफ वॉटर रिलीज़र नाम दिया गया है। इनके जलने पर पानी के कणो का निर्माण होता है। और सभी हानिकारक गैसें, जैसे नाइट्रोजन, सल्फर, कार्बन मोनो ऑक्साइड, आदि इस पानी में घुलकर नष्ट हो जाएँगी। </p>



<h3 id="heading3.2">2. कम नाइट्रोजन व सल्फर वाले ग्रीन पटाखे</h3>



<p>इन गैसों के पानी में घुलकर नष्ट होने की बात जितनी सकारात्मक है। उतनी ही अच्छी बात यह भी है, की यदि यह हानिकारक गैसें ही कम मात्रा में उत्सर्जित हो? इसलिए नीरी द्वारा ऐसे पटाखे भी बनाये गए है। जिनमें कुछ खास रसायनों के प्रयोग से ऑक्सिडाइजिंग (आक्सीकरण) की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।</p>



<p>जिससे की नाइट्रोजन और सल्फर जैसी हानिकारक गैसों का बनना कम किया जा सके। इन प्रकार के ग्रीन पटाखों को सेफ थर्माइट क्रैकर्स या STAR (स्टार) क्रैकर के नाम से जाना जायेगा।</p>



<h3 id="heading3.3">3. कम एलुमिनियम से बने ग्रीन पटाखे</h3>



<p>पारम्परिक पटाखों के निर्माण में प्रयोग किया जाने वाला एलुमिनियम भी कुछ कम नुक्शानदायक नहीं है। इसलिए एक कोशिश यह भी थी आतिशबाजियों को बनाने में इनका कम इस्तेमाल कैसे किया जाये? इसका हल भी नीरी के वैज्ञानिकों ने निकाल लिया है।</p>



<p>उन्होंने लगभग 50 से 60 प्रतिशत कम एलुनिनियुम का इस्तेमाल करके बढ़िया गुणवत्ता, और सामान्य पटाखों की तरह चलने वाले क्रैकर्स तैयार कर लिए है। चूँकि यह दूसरों से अधिक सुरक्षित है, इसलिए इनका नाम भी सेफ मिनिमल एलुमिनियम या SAFAL (सफल) रखा गया है।</p>



<h3 id="heading3.4">4. खुशबू वाले ग्रीन पटाखे (अरोमा क्रैकर्स)</h3>



<p>अक्सर आपने देखा होगा की पटाखे के जलने के बाद बहुत सारा धुआं और गैस के साथ ही बारूद के जलने की बुरी महक या बदबू आती है। पर अब ऐसा नहीं होगा, जी हाँ, क्योंकि ऐसे पटाखे भी बनाये गए है, जो जलने पर बारूद की गन्दी दुर्गन्ध न फैलाकर बढ़िया खुशबू फैलाएंगे।</p>



<p>इनसे विभिन्न प्रकार की और अलग अलग सुगंध वातावरण में बिखरेगी। साथ ही इनसे निकलने वाली हानिकारक गैसें भी बहुत कम मात्रा में उत्सर्जित होंगी। इन पटाखों को संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा अरोमा क्रैकर्स नाम दिया है।</p>



<h2 id="heading4">ग्रीन क्रैकर्स व सामान्य पटाखों में अंतर</h2>



<p>जैसा की हम आपको बता चुके है की बाजार में मिलने वाले सामान्य पटाखों से हर साल वातावरण पर होने वाले हानिकारक असर को कम करने के लिए ही यह नए किस्म के पटाखे भारतीय बाजारों में लाये जा रहे है। ऐसे में आपके मन में भी यह जानने की इच्छा होगी? की यह हरित आतिशबाजी (ग्रीन क्रैकर) कैसे उन सामान्य बम गोले व अन्य पटाखों से अलग है?</p>



<p>तो चलिए आपको जरा विस्तार से बताते है, इन दोनों में पाए जाने वाले मुख्य अंतरों को जो की इन नए और अनोखे पटाखों को पहले इस्तेमाल किये जाने वाली आतिशबाजियों से अलग बनाते है।</p>



<p><strong>यह सभी अंतर नीचे दी गयी सूचियों में प्रदर्शित किये गए है &#8211;</strong></p>



<h3>1. परंपरागत पटाखे</h3>



<ul><li>यह सामान्य रूप से कई प्रकार की हानिकारक धातुओं के मिश्रण से बनाये जाते है।</li><li>इन पटाखों से बहुत अधिक मात्रा में गहरा धुआं व जहरीली गैसों का उत्सर्जन होता है।</li><li>इन सभी आतिशबाजियों मे जलने पर प्रदुषण को बढ़ाने वाले तत्व निकलते है।</li><li>इनमें से नाइट्रोजन और सल्फर जैसी गैसें अधिक मात्रा में उत्पादित होती है।</li><li>इनमे एलुमिनियम जैसी हानिकारक धातु का बहुत अधिक प्रयोग किया जाता है।</li><li>इनसे पर्यावरण में ध्वनि प्रदुषण और वायु प्रदुषण अधिक मात्रा में फैलता है।</li><li>इनसे दुर्गन्ध और गहरा धुआं निकलता है जो सेहत को बहुत नुक्सान पहुँचता है।</li></ul>



<h3>2. नए ग्रीन पटाखे</h3>



<ul><li>यह नए किस्म के रसायनों व कम हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल करके बनाये जाते है।</li><li>इन सभी पटाखों में 50 प्रतिशत तक कम धुआं और जहरीली गैसों का उत्पादन होता है।</li><li>इन ग्रीन पटाखों के जलने से पानी बनता है जो प्रदुषण को घोल कर फैलने से रोकता है।</li><li>इन सभी में सल्फर और नाइट्रोजन का उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम होता है।</li><li>नए प्रकार के ग्रीन क्रैकर में 50 प्रतिशत तक कम एलुमिनियम का इस्तेमाल होता है।</li><li>इनसे फैलने वाला प्रदुषण 40 से 50 प्रतिशत तक कम नुकसानदायक होता है।</li><li>इन नए ग्रीन पटाखों से कई तरह की सुगंध (खुशबू) और कम धुआं निकलता है।</li></ul>



<h2 id="heading5">ग्रीन पटाखे कब मिलेंगे?</h2>



<p>पिछले गत वर्षों में जब कोर्ट के आदेश पर कुछ रसायनों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगाया गया तब इनसे बनने वाले पटाखों की बिक्री और खरीद पर भी पाबन्दी लगा दी गयी जिससे पटाखा व्यवसाइयों के समक्ष आर्थिक नुकसान और रोजगार की समस्या खड़ी हो गयी थी। इसे नियंत्रित करने के लिए कोर्ट की तरफ से सिर्फ ग्रीन नॉर्म्स का पालन करने वाले हरित पटाखे बनाए जाने और बेचने का प्रस्ताव रखा गया। </p>



<p>जिसे नीरी ने पूरा किया, साथ ही उन्होंने इन आतिशबाजियों को बनाये जाने का तरीका पटाखा व्यवसाय से जुड़े कर्मियों को सीखाने का फैसला लिया। यह एक बेहतरीन कदम साबित हुआ। जिससे की पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों को आर्थिक हानि और रोजगार छीनने जैसी परेशानी से बचाया जा सकें। यह कदम पूरे उद्योग का नक्शा बदलने वाला है।</p>



<p>इसलिए इसके क्रियान्वयन में कुछ दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा था। जिससे की बाजार में इन ग्रीन पटाखों के पहुंचने में देरी भी हुई, जिस वजह से पिछले साल यह बाजार का हिस्सा नहीं बन सके। पर वर्तमान ख़बरों से पता चला है, की इस साल 2020 में यह पटाखे आपको दुकानों पर खरीदने के लिए उपलब्ध होंगे।</p>



<h2 id="heading6">ग्रीन पटाखे कहाँ मिलेंगे?</h2>



<p>सरकार के आदेश अनुसार सभी ग्रीन नॉर्म्स (पर्यावरण सुरक्षा नियम) का पालन करने वाले नीरी द्वारा बनाये गए है। इसलिए यह नीरी की खोज होने के साथ ही सुरक्षित पर्यावरण की ओर एक सकारात्मक पहल भी है। क्योंकि वर्तमान समय में इस तरह के ग्रीन क्रैकर्स पूरे विश्व में कही भी इस्तेमाल नहीं होते है। </p>



<p>इसलिए भारत में इन्हे सफलता प्राप्त होने पर हम अन्य देशों को भी यह बेहतर सौगात प्रदान कर सकते है, जिससे भारत की ख्याति विश्व स्तर पर और अधिक मजबूत हो जाएगी। वर्तमान समय में यह सभी प्रकार के ग्रीन पटाखे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित हजारों पटाखा फैक्टरीयों में लाखों मजदूरों द्वारा बनाये जा रहे है।</p>



<p>यह सभी आतिशबाजियां इस वर्ष दीपावली के अवसर पर देश के कोने-कोने में मौजूद लगभग सभी पटाखा दुकानों पर उपलब्ध हो जाएँगी। जिससे की आप इन्हे आसानी से खरीदकर इनका भरपूर लुत्फ़ उठा सकते है। साथ ही इन्हे जलाने पर कोई विशेष पाबन्दी भी नहीं होगी जिससे की आप दिल खोलकर इनका इस्तेमाल कर सकते है।</p>



<h2 id="heading7">ग्रीन पटाखे की कीमत क्या है?</h2>



<p>इन ग्रीन पटाखों की इतनी सारी खूबियों के बारे में सुनकर आपके मन में यह प्रश्न भी उठ रहा होगा? की यह कितने मूल्य के होंगे? या इनका बाजार भाव क्या तय किया जायेगा? यह ग्रीन पटाखे आपकी जेब पर सस्ते पड़ेंगे या महंगे? तो आपके इन सभी प्रश्नों के उत्तर में हम आपको बताना चाहेंगे की, सीएसआईआर की पर्यावरण शाखा नीरी द्वारा इनकी कीमतों की घोषणा तो फिलहाल नहीं की गयी है।</p>



<p>इसलिए इन सभी के वर्तमान वास्तविक खुदरा मूल्य (रेट) के बारे में तो बता पाना मुश्किल होगा। इनके बाजार में पहुंचने के बाद ही इनकी असली कीमतों का पता लगाया जा सकेगा। पर नीरी की मुख्य वैज्ञानिक साधना रायालु ने इतना जरूर स्पष्ट किया गया है, कि इनमें इस्तेमाल होने वाले रसायन (कैमिकल) और अन्य तत्वों की मात्रा सामान्य आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाली मात्रा के मुकाबले 40 से 50 प्रतिशत तक कम प्रयोग की गयी है। </p>



<p>इसलिए इनकी कीमतों में काफी अंतर भी होगा, और यह सामान्य बम गोले और पटाखों से बहुत कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे। इसलिए आप इनके अधिक महंगे होने का डर त्याग दें। क्योंकि यह आपकी जेब और बजट पर बिलकुल भी भारी नहीं पड़ने वाले है।</p>



<h2 id="heading8">ग्रीन क्रैकर्स से लाभ क्या है?</h2>



<p>चूँकि यह पटाखे सरकार द्वारा निर्धारित सभी ग्रीन नॉर्म्स का बखूबी पालन करते है। इसलिए इनसे नुकसान कम है। जिस वजह से इनके इस्तेमाल से होने वाले फायदे आपको जरूर नजर आएंगे। सबसे बड़ा फायदा तो है, हर साल पर्यावरण को पहुंचने वाली हानि में कमी होना। जिसे ध्यान में रखकर ही इन पटाखों का निर्माण किया गया है। साथ ही इसके अन्य लाभ भी है जिनके बारे में अब हम चर्चा कर रहे है।</p>



<p><strong>ग्रीन पटाखों से होने वाले</strong> <strong>यह सभी फायदे निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li>हानिकारक गैसों का कम उत्सर्जन होना</li><li>नाइट्रोजन व सल्फर की मात्रा में कमी</li><li>जलने पर कम गहरा धुआं प्रदान करना</li><li>वायुमंडल की हवा को कम प्रदूषित करना</li><li>जलने पर पानी के कणो को उत्पन्न करना</li><li>प्रदुषण व धुआं पानी में घुलकर नष्ट होना</li><li>जलाये जाने पर अलग अलग खुशबू देना</li><li>विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आना</li><li>सांस व फेफड़ों से जुडी समस्याएं कम होना</li><li>रक्तचाप व ह्रदय से जुडी समस्याएं कम होना</li><li>ज्यादा हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल कम होना</li><li>इन्हे बनाने में एल्युमियम का प्रयोग कम होना</li><li>कम नुक्सानदायक रसायनों का इस्तेमाल होना</li><li>इनसे निकलने वाला <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदुषण</a> नियंत्रित होना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-की-बीमारी-इयर-डिजीज/">कान से जुडी समस्याओं</a> में भी कमी आना</li></ul>



<h2 id="heading9">ग्रीन पटाखे कैसे जलाएं?</h2>



<p>ग्रीन पटाखे कितने भी सुरक्षित क्यों न हों? पर चूँकि इन्हे जलाने में भी अन्य सामान्य पटाखों की तरह ही आग का इस्तेमाल होता है। इसलिए यह बेहद जरुरी है की इन आतिशबाजियों को जलाने में भी उतनी ही सावधानी बरती जाये। क्योंकि अन्य प्रकार की समस्याओं में कमी आने पर भी आग से जलने के मामलों में कुछ नहीं कहा जा सकता है।</p>



<p>अतः ग्रीन पटाखों को भी सुरक्षापूर्वक चलाना और सावधानी रखना बेहद जरूरी है। ऐसी ही कुछ सामान्य पर बेहद जरुरी सावधानियों के बारे में हम आपको बताने जा रहे है &#8211;</p>



<ul><li>पटाखों को जलाने के लिए किसी मोमबत्ती / दीपक का प्रयोग नहीं करें।</li><li>सभी प्रकार की आतिशबाजियों को अपने कपडों से दूर रखकर चलाएं।</li><li>पटाखों से भरे थैले या ढेर के पास कोई दीया, माचिस, मोमबत्ती न रखें।</li><li>पटाखों को खुले में न रखें अन्यथा चिंगारी से आग लगने का खतरा होगा।</li><li>छोटे बच्चों को हाथ में रखकर पटाखे या बम बिलकुल भी न चलाने दें।</li><li>ऐसे कपड़ों को पहनने की गलती न करें जो जल्दी आग पकड़ लेते हों।</li><li>आसमान की तरफ चलने वाले पटाखों (रॉकेट, अनार) को सीधा ही रखें।</li><li>अनार, रॉकेट, या चकरी आदि को चलाते समय उचित दूरी बना कर रखें।</li><li>किसी भी असावधान व्यक्ति के पीछे अचानक से कोई पटाखा मत फोड़ें।</li><li>पटाखों को सावधानी पूर्वक जलाने के लिए पहले उनकी बत्ती छील लें।</li><li>बम, पटाखा, राकेट आदि को जलाने के लिए अगरबत्ती का प्रयोग करें।</li></ul>



<h2 id="heading10">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>ग्रीन पटाखे वातावरण में फैलने वाले प्रदुषण को कम करने के लिए नीरी के वैज्ञानिकों द्वारा की गयी एक महत्वपूर्ण पहल है। जिससे आगे आने वाले भविष्य में ईको फ्रेंडली (पर्यावरण सुरक्षित) दिवाली को मानाने का सपना भी पूरा हो सकेगा। जिससे लोगों की भावनाओं को आहात किये बिना ही उनकी सेहत को क्षति पहुंचने से भी रोका जा सकेगा। साथ ही निम्न वर्ग के लोगों का रोजगार भी सलामत रहेगा। जिससे विश्व के कोने कोने में एक सकारात्मक सोच को दिशा प्रदान की जा सकेगी। इसलिए इस दिवाली अपने परिवार और दोस्तों के साथ पटाखों का आनद लें और सुरक्षित रहें।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87/">ग्रीन पटाखे क्या और कैसे होते है? &#8211; जानिए कब मिलेंगे?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%87/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिवाली पर पटाखे जलाते वक्त हो गया कान सुन्न? बरते सावधानियां</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Oct 2019 13:08:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कान के रोग]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3864</guid>

					<description><![CDATA[<p>दिवाली का अवसर आये और पटाखों का जिक्र न हो? भाई ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। चूँकि हम बहुत सी प्रचलित कहानियों और अवधारणाओं के अंतर्गत दीपावली के इस पावन त्यौहार को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मानते है। इसलिए जीत का जश्न मानाने के लिए दिवाली पर पटाखे चलाना ... <a title="दिवाली पर पटाखे जलाते वक्त हो गया कान सुन्न? बरते सावधानियां" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/" aria-label="More on दिवाली पर पटाखे जलाते वक्त हो गया कान सुन्न? बरते सावधानियां">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/">दिवाली पर पटाखे जलाते वक्त हो गया कान सुन्न? बरते सावधानियां</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दिवाली का अवसर आये और पटाखों का जिक्र न हो? भाई ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। चूँकि हम बहुत सी प्रचलित कहानियों और अवधारणाओं के अंतर्गत दीपावली के इस पावन त्यौहार को असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मानते है। इसलिए जीत का जश्न मानाने के लिए दिवाली पर पटाखे चलाना तो बनता है।</p>



<p>बात जब आतिशबाजियों की आये तब हर किसी का मन उत्साह से भर जाता है। जिसमें सबसे आगे होते है बच्चे, जी हाँ, बच्चों को दीपावली मनाना बहुत अधिक पसंद होता है। पर उन्हें इससे जुडी सावधानियों का पता नहीं होता है। इसलिए पटाखे जलाते वक्त लापरवाही से उनके कान सुन्न हो सकते है, और अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।</p>



<p>तो आइये आज हम बात करते है की दिवाली पर पटाखे जलाते समय कान सुन्न होने से कैसे रोका जाये? इससे सेहत को क्या नुकसान है? कौन से पटाखे कैसे फोड़ने चाहिए? तथा सेहतमंद दिवाली मानाने के लिए क्या सावधानी बरते?</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. दिवाली पर पटाखे से कान सुन्न होना</a></li>
<li><a href="#heading2">2. दिवाली पर पटाखे से सेहत को नुकसान</a></li>
<li><a href="#heading3">3. दिवाली पर पटाखे जलाएं तो बरतें सावधानी</a></li>
<li><a href="#heading4">4. दिवाली पर पटाखे फोड़ने का तरीका</a></li>
<li><a href="#heading5">5. दिवाली पर पटाखे छोड़ें ध्यान से</a></li>
<li><a href="#heading6">6. दिवाली पर किस तरह के पटाखे कैसे छोड़ें?</a></li>
<li><a href="#heading7">7. कैसे मनाएं सेहतमंद व सुरक्षित दिवाली?</a></li>
<li><a href="#heading8">8. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">दिवाली पर पटाखे से कान सुन्न होना</h2>



<p>अक्सर ऐसा देखा जाता है की दीपावली के समय चारों तरफ पटाखों से घिरे होने के कारण आपके आसपास कभी भी कोई भी बम या अतिशबाजी फट सकती है। अथवा कभी-कभी पास से कोई पटाखा या बम आदि चलाने पर वह उम्मीद से पहले ही चल जाता है, और आपको वहां से भागने का मौका नहीं मिलता है।</p>



<p>ऐसे में आपके अधिक पास इनके फटने से इसका सीधा असर आपके कान पर पड़ता है। जिससे तुरंत कान सुन्न पड़ जाते है, और कुछ समय तक आपको दोनों कानो से या किसी <a href="https://www.hearingsol.com/hi/एक-कान-में-बहरापन/">एक कान से सुनाई न देने</a> जैसी समस्या हो सकती है। सभी पटाखे जोरदार शोर नहीं करते है पर कुछ पटाखों से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदुषण</a> बहुत अधिक होता है।</p>



<p>इनसे निकलने वाला यह तेज़ शोर मनुष्य की <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुनने-की-क्षमता/">सुनने की क्षमता</a> से कहीं अधिक होता है। इसलिए <a href="https://www.hearingsol.com/hi/पटाखों-से-बहरापन/">पटाखों से बहरापन</a> होने की सम्भावना बढ़ जाती है। क्योंकि सामान्य व्यक्ति 65 डेसीबल तक ध्वनि बर्दाश्त कर सकता है। जबकि कुछ आतिशबाजियां तो 200 डीबी तक की आवाज निकालती है।</p>



<p><strong>क्रैकर्स से आपके कानों को और क्या-क्या हानि हो सकती है? जानिए &#8211;</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright is-resized"><img loading="lazy" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/Ear-problems-in-Diwali-300x202.jpg" alt="पटाखे से कान सुन्न होना" class="wp-image-3886" width="360" height="249"/><figcaption>पटाखे से कान सुन्न होना</figcaption></figure></div>



<ul><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-पर्दा-फटना/">कान का पर्दा फटना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-की-नस/">कान की नस में क्षति</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बंद-कान-या-कान-में-भारीपन/">कान में भारीपन होना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-दर्द-ओटाल्जिया/">कान में तेज़ दर्द होना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/टिनिटस/लक्षण/">कान में घंटियां बजना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/टिनिटस/">टिनिटस हो जाना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">सुनने में समस्या होना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/कंडक्टिव-हियरिंग-लॉस/">अस्थायी श्रवण हानि</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/सेंसरीन्यूरल-हियरिंग-लॉस/">संवेदी बहरापन होना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-से-खून-आना/">कान से खून आना</a></li></ul>



<h2 id="heading2">दिवाली पर पटाखे से सेहत को नुकसान</h2>



<p>पटाखों को जलाने में जितना आनंद आता है? यह बाद में उतना ही ज्यादा नुक्सान करते है। क्योंकि आतिशबाजियों को बनाने के लिए इनमे तरह तरह के कैमिकल्स (रसायन) और हानिकारक तत्व मिलाये जाते है। जो की जलने पर रंगबिरंगी रोशनियां प्रदान करते है, और तेज़ आवाज निकालते है।</p>



<p>इसके अतिरिक्त पटाखों में पाए जाने वाले इन तत्वों के जलने पर गहरा धुआं और जहरीली गैसें भी निकलती है। जो की आपकी सेहत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच सकती है। इसलिए दिवाली में अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए पटाखों को ध्यान से चुने।</p>



<p><strong>पटाखों से सेहत को निम्नलिखित हानि पहुँच सकती है &#8211;</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright is-resized"><img loading="lazy" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/1508397228-df-300x225.jpg" alt="पटाखे से सेहत को नुकसान" class="wp-image-3887" width="360" height="266"/><figcaption>पटाखे से सेहत को नुकसान</figcaption></figure></div>



<ul><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/नाक-की-सूजन-रायनाइटिस/">एलर्जिक राइनाइटिस होना</a></li><li>फेफड़ों में समस्याएं होना</li><li>सांस से जुडी समस्या होना</li><li>दमा या अस्थमा रोग होना</li><li>दिल का दौरा (स्ट्रोक) पड़ना</li><li>ह्रदय सम्बन्धी रोग होना</li><li>आँखों में तकलीफ होना</li><li>रक्त संचार में रूकावट</li><li>गर्भवती महिला को हानि</li><li>अचानक गर्भपात होना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चे-की-सुनने-की-शक्ति/">गर्भस्थ शिशु में श्रवणहानी</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/जन्मजात-बहरापन/">जन्मजात बहरापन</a></li></ul>



<h2 id="heading3">दिवाली पर पटाखे जलाएं तो बरतें सावधानी</h2>



<p>दिवाली के मस्ती और जोश में हम अक्सर बहुत ज्यादा उत्साहित हो जाते है जिससे कई गलतियां और लापरवाही होने की आशंका रहती है। आतिशबाजी जलाते समय सावधानी बरतना बहुत जरुरी है, अन्यथा जरा सी चूक से हादसा होने का खतरा सदा ही बना रहता है। इसलिए आज हम आपको कुछ जरुरी सुझाव दे रहे है। </p>



<p><strong>निम्नलिखित सावधानी रखने से आप खतरों को काफी हद तक टाल सकते है &#8211;</strong></p>



<ul><li>पटाखे जलाते समय अपने आसपास गतिविधियों का ध्यान रखें</li><li>देखें की कहीं, कोई आपके निकट पटाखा तो नहीं जला रहा?</li><li>किसी असावधान व्यक्ति के पास बम या आतिशबाजी न छोड़ें</li><li>रॉकेट को किसी घर या व्यक्ति की तरफ रखकर न चलाएं</li><li>फुलझड़ियों और अनार आदि को चलाने के बाद यूँ ही न फेंकें</li><li>चकरी को चलाते समय उस के पास बम या पटाखा न फेंकें</li><li>हाथ में रखकर या पकड़कर पटाखे बिकुल भी न जलाएं</li><li>पटाखे जलाने के लिए दीये या मोमबत्ती का इस्तेमाल न करें</li><li>आतिशबाजी के आसपास जलता दीपक या मोमबत्ती न रखें</li></ul>



<h2 id="heading4">दिवाली पर पटाखे फोड़ने का तरीका</h2>



<p>दिवाली पर आतिशबाजियों से खेलना लगभग सभी को पसंद होता है। इनसे निकलने वाली आवाज और रोशनियाँ हमें बहुत भाती है। पर इन्हे जलाते समय हुई गलती आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए पटाखों को जलाने तरीका आपको आना चाहिए। जिससे की इनका आनंद लेते हुए सुरक्षित रहा जा सके। </p>



<p><strong>सुरक्षित रूप से पटाखे छोड़ने (चलाने) का तरीका निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li>पटाखे हमेशा दूरी बनाकर ही फोड़ें</li><li>पटाखा जलाने के लिए अगरबत्ती लें</li><li>तेज़ आवाज वाले बम को खुले में चलाएं</li><li>बड़े लोगों की निगरानी में पटाखे जलाएं</li><li>पटाखे जलाने से पहले उसकी बत्ती छील लें</li><li>फुलझड़ी जलने के बाद पानी में डाल दें</li><li>अनार में दूर से किसी चीज़ से आग लगाएं</li><li>चकरी जलाने से पहले उसकी बत्ती निकाल लें</li></ul>



<h2 id="heading5">दिवाली पर पटाखे छोड़ें ध्यान से</h2>



<p>यदि आप दीपावली पर पटाखे चलाते समय थोड़ा ध्यान रखें तो आपको दिवाली का आनंद मिलने के साथ ही परेशानियों से बचने का लाभ भी प्राप्त होगा, और आपकी दिवाली हर साल की तरह ही यादगार रहेगी। अपने परिवार की सुरक्षा खुद आपकी जिम्मेदारी है। इसलिए अपनी दिवाली को आनंद से भरने के लिए सावधानियां जरुरी है। </p>



<p><strong>इसलिए आपको निम्नलिखित तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए &#8211;</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright is-resized"><img loading="lazy" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/assorted-colorful-crackers-300x197.jpg" alt="पटाखे फोड़ें ध्यान से" class="wp-image-3888" width="360" height="248"/><figcaption>पटाखे फोड़ें ध्यान से</figcaption></figure></div>



<ul><li>जल्दी जलने वाले पटाखों से सावधान रहें</li><li>इन्हे जलाने के लिए इनकी बत्ती छील लें</li><li>कपड़ों के पास फुलझड़ियां नहीं जलाएं</li><li>रौशनी, और फुलझड़ी को खुद से दूर रखें</li><li>पटाखे जलाते समय जूते चप्पल जरूर पहने</li><li>ऐसे कपडे पहने जो जल्दी आग न पकड़ते हों</li><li>रॉकेटों को हमेशा आसमान की तरफ जलाएं</li><li>पटाखे को जलाकर किसी पर फेंकें नहीं नहीं</li><li>पटाखे को ज्वलनशील पदार्थों से दूर ही रखें</li><li>राकेट जमीन पर रखकर बिलकुल न चलायें</li></ul>



<h2 id="heading6">दिवाली पर किस तरह के पटाखे कैसे छोड़ें?</h2>



<p>दिवाली पर आपको जलाने के लिए आतिशबाजियों की एक बहुत बड़ी और विस्तृत श्रंखला बाजार में मिल जाएगी। हर साल दिवाली पर नए नए किस्म के और बेहतर पटाखे आते ही रहते है जिनकी कोई कमी नहीं है। इसलिए इन सभी प्रकार के पटाखों की जो मूल किस्में है। उन्हें जलाने की सही प्रक्रिया आपको पता होनी चाहिए। इसलिए अब हम बात करते है की किस किस्म की आतिशबाजी को कैसे जलाना चाहिए?</p>



<p><strong>विभिन्न प्रकार के पटाखे छोड़ने के तरीके निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li>रॉकेट को हमेशा सीधा रखकर किसी बोतल में चलना चाहिए।</li><li>बम को चलाने के लिए उसकी बत्ती छील कर दूर से जलना चाहिए।</li><li>चकरी को जल्दी जलाने के लिए रौशनी या फुलझड़ी का प्रयोग करें।</li><li>फुलझड़ी को जल्दी जलाने के लिए रौशनी, फुलझड़ी या मोमबत्ती लें।</li><li>अनार को जलाने के लिए आप फुलझड़ी अथवा रौशनी इस्तेमाल करें।</li><li>पटाखा जलाने से पहले उसकी बत्ती थोड़ी साफ करके रोगन हटा दें।</li><li>किसी भी पटाखे बम आदि को चलाने के लिए अगरबत्ती का प्रयोग करें।</li></ul>



<h2 id="heading7">कैसे मनाएं सेहतमंद व सुरक्षित दिवाली?</h2>



<p>अपनी दिवाली को सुरक्षित रूप से मानाने के लिए और इस अवसर पर सेहत का ध्यान रखने के लिए आपको जागरूक रहना बहुत जरुरी है। अपने परिवार की सेहत को बेहतर रखने और सुरक्षापूर्वक दिवाली के पलों का आनंद लेने के लिए अच्छा खाएं और सेहत से जुडी सावधानियों पर भी गौर करें। </p>



<p><strong>सेहतमंद दिवाली के लिए निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें &#8211;</strong></p>



<ul><li>पटाखे जलाते समय पूरे बाहं के कपडे पहने।</li><li>दिवाली पर कोशिश करें की सूती कपडे ही पहने।</li><li>नंगे पैर रहकर कभी भी आतिशबाजी न चलाएं।</li><li>कम शोर और धुंए वाले पटाखों को इस्तेमाल करें।</li><li>शोर से बचने के लिए कान में ईयरप्लग लगाएं।</li><li>धुंए से बचने के लिए कोई मास्क अवश्य पहने।</li><li>पटाखे फोड़ने के बाद अपने हाथ जरूर धोये।</li></ul>



<h2 id="heading8">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>दिवाली का त्यौहार हम सभी के लिए खुशियां लेकर आता है। इसलिए हमें भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यह खुशियां बरक़रार रहें, और इनमे किसी भी प्रकार की कोई परेशानी उत्पन्न न हो। इसके लिए बेहद जरूरी है की आप सुरक्षा के सभी नियमों का पालन करें। दिवाली पर आतिशबाजी को ध्यान से चुने। बच्चों के साथ चलने के लिए कम शोर और धुंए वाले पटाखों का इस्तेमाल करें। स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/">दिवाली पर पटाखे जलाते वक्त हो गया कान सुन्न? बरते सावधानियां</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं? जानिए जलने पर घरेलु उपाय</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Oct 2019 13:03:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कान के रोग]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3833</guid>

					<description><![CDATA[<p>आज हम सुरक्षित दिवाली मानाने के तरीको के बारे में बात करेंगे। क्योंकि आपको पता होगा की दिवाली आने वाली है, जी हाँ इस वर्ष 2020 में 14 नवंबर की शाम दीपावली की धूम मचने वाली है। क्योंकि यह त्यौहार ही धूम-धड़ाके का है, यहाँ हम बात कर रहे है पटाखों और रंगबिरंगी आतिशबाजियों की, ... <a title="सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं? जानिए जलने पर घरेलु उपाय" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/" aria-label="More on सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं? जानिए जलने पर घरेलु उपाय">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/">सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं? जानिए जलने पर घरेलु उपाय</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज हम सुरक्षित दिवाली मानाने के तरीको के बारे में बात करेंगे। क्योंकि आपको पता होगा की दिवाली आने वाली है, जी हाँ इस वर्ष 2020 में 14 नवंबर की शाम दीपावली की धूम  मचने वाली है। क्योंकि यह त्यौहार ही धूम-धड़ाके का है, यहाँ हम बात कर रहे है पटाखों और रंगबिरंगी आतिशबाजियों की, वैसे तो दिवाली का दिन आने में तो अभी बहुत समय है।</p>



<p>परन्तु उस समय का इंतज़ार कौन करें? लगभग हर बच्चे का यही सोचना होता है। तभी तो दीपावली से बहुत दिन पहले या दशहरे से ही बच्चे तो मनो बस आतिशबाजी चलाने का मौका ही देख रहे होते है, और इसका भरपूर फायदा भी उठाते है। लेकिन दिवाली में चलाये जाने वाले सभी पटाखे सुरक्षित नहीं होते है।</p>



<p>तो चलिए जानते है की पटाखे हानिकारक क्यों होते है? और सुरक्षित दिवाली मानाने के लिए क्या करना चाहिए? साथ ही जानिए आतिशबाजी से जल जाने पर काम आने वाले कुछ जरुरी घरेलु नुस्खे क्या है?</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. पटाखों से क्या नुकसान होता है?</a>
<ul>
<li><a href="#heading1.1">1.1. अधिक तेज़ शोर</a></li>
<li><a href="#heading1.2">1.2. स्वास्थ्य समस्याएं</a></li>
<li><a href="#heading1.3">1.3. गर्भवती महिलाओं को खतरा</a></li>
<li><a href="#heading1.4">1.4. विभिन्न संक्रमण का खतरा</a></li>
<li><a href="#heading1.5">1.5. मरीजों व अन्य जीवों को हानि</a></li>
</ul></li>
<li><a href="#heading2">2. सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं?</a></li>
<li><a href="#heading3">3. सुरक्षित दिवाली के लिए सरकारी आदेश</a>
<ul>
<li><a href="#heading3.1">3.1. नहीं मिलेगी पटाखों वाली लड़ी</a></li>
<li><a href="#heading3.2">3.2. अत्याधिक शोर वाले पटाखे</a></li>
<li><a href="#heading3.3">3.3. वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे</a></li>
<li><a href="#heading3.4">3.4. गैर सुरक्षित चीनी पटाखे</a></li>
</ul></li>
<li><a href="#heading4">4. 2019 में ग्रीन पटाखों से सुरक्षित दिवाली</a></li>
<li><a href="#heading5">5. सुरक्षित दिवाली मनाये ई-पटाखे से</a></li>
<li><a href="#heading6">6. सुरक्षित दिवाली मानाने के लिए सुझाव</a>
<ul>
<li><a href="#heading6.1">6.1. सावधानी से जलाएं पटाखे</a></li>
<li><a href="#heading6.2">6.2. पटाखों को खुद से रखें दूर</a></li>
<li><a href="#heading6.3">6.3. सही कपड़ों का करें चुनाव</a></li>
<li><a href="#heading6.4">6.4. बिजली के सामान से दूर जलाएं</a></li>
<li><a href="#heading6.5">6.5. घर के अंदर बिल्कुल न चलाएं</a></li>
<li><a href="#heading6.6">6.6. सुरक्षा का इंतज़ाम साथ रखें</a></li>
</ul></li>
<li><a href="#heading7">7. पटाखे से जलने पर घरेलु उपचार</a></li>
<li><a href="#heading8">8. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">पटाखों से क्या नुकसान होता है?</h2>



<p>वैसे तो आतिशबाजी चलाने से हम सभी को बहुत आनंद आता है। पर क्या आपको पता है की चंद मिनट के लिए मनोरंजन करने वाली यह वस्तु कितनी खतरनाक होती है? जी हाँ, क्योंकि अक्सर पटाखे बनाने के लिए कई तरह के रसायन या धातुओं जैसे की &#8211; मैग्नेशियम, सोडियम, कैडियम, लेड, जिंक, नाइट्रेट और नाइट्राइट आदि। </p>



<p>हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल होता है। चूँकि यह सभी तत्व जलने पर जरहरीला धुआं उत्पन्न करते है इसलिए ये कैमिकल्स सेहत के लिए नुकसानदायक हैं। इनसे आपको कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है।</p>



<p><strong>पटाखों से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading1.1">1. अधिक तेज़ शोर</h3>



<p>वैसे तो पटाखे होते ही शोर मचाने के लिए है, पर इसकी भी एक सीमा होती है। चूँकि इन हानिकारक तत्वों से तैयार की गयी आतिशबाजी से निकलने वाली ध्वनि भी 125 डेसिबल से अधिक होती है। इसलिए यह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदुषण</a> किसी भी व्यक्ति को बहुत आसानी से बहरा बना सकती हैं। क्योंकि <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुनने-की-क्षमता/">मनुष्य की सुनने की क्षमता</a> 65 डेसीबल तक होती है। ऐसे में कई बार <a href="https://www.hearingsol.com/hi/पटाखों-से-बहरापन/">पटाखों से बहरापन</a> हमेशा के लिए भी हो सकता है। </p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p>सामान्यतः शोर का मानक स्तर दिन में 55 डीबी और रात्रि के समय <em>लगभग</em> 45 डेसिबल होता है। लेकिन दीपावाली की शाम यह स्तर 70 से 90 डेसिबल तक पहुंच जाता है। इतना शोर <a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-पर्दा-फटना/">कान के पर्दे फाड़कर</a> आपको पूरी तरह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">बहरा करने</a> के लिए काफी है।</p></blockquote>



<h3 id="heading1.2">2. स्वास्थ्य समस्याएं</h3>



<p>यूँ तो आतिशबाजी से काफी समस्याएं होती है। पटाखों से निकली चिंगारी से आपकी आंखें, त्वचा और चेहरा भी जख्मी हो सकता हैं। इनके जहरीले धुएं से आपको सांस संबंधी बीमारियां होना भी मुमकिन है। खासतौर से दमे के मरीजों या स्वसन तंत्र में समस्या से ग्रस्त लोगों को भी इससे बहुत तकलीफ हो सकती हैं।</p>



<p>क्योंकि इनसे निकलने वाली सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड गैस तथा लेड सहित अन्य तत्व बहुत अधिक खतरनाक होते है। वातावरण में इन गैसों की मात्रा अधिक होने से श्वसन नली का सिकुड़ना, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सूंघने-की-शक्ति-कम-होना/">सांस लेने में परेशानी</a>, श्वास नली में रूकावट, गुर्दे में खराबी और त्वचा संबंधी कई समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।</p>



<h3 id="heading1.3">3. गर्भवती महिलाओं को खतरा</h3>



<p>गर्भवती महिलाओं के लिए तो यह आतिशबाजी बहुत ही अधिक हानिकारक होती हैं। क्योंकि पटाखों से निकलने वाली जहरीली सल्फर डाइआक्साइड और नाइट्रोजन डाइआक्साइड गैसें जब हवा में घुल जाती हैं। तो यह साँस के जरिये अंदर जा कर माँ और बच्‍चे दोनों को ही नुकसान पहुंचा सकती हैं।</p>



<p>यह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चे-की-सुनने-की-शक्ति/">गर्भावस्था में घुम्रपान</a> के बराबर ही खतरनाक होता है। जिससे असमय गर्भपात का खतरा भी हो सकता है। इतना ही नहीं पटाखों का तेज़ शोर भी <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चों-में-श्रवण-हानि/">बच्चों में श्रवण हानी</a> का कारण बनता है। जिससे बच्चे <a href="https://www.hearingsol.com/hi/जन्मजात-बहरापन/">जन्मजात बहरापन</a> का शिकार होकर <a href="https://www.hearingsol.com/hi/श्रवण-बाधित-बच्चे/">श्रवण बाधित</a> हो सकते है।</p>



<h3 id="heading1.4">4. विभिन्न संक्रमण का खतरा</h3>



<p>जितनी आतिशबाजी की आवाज़ नुकसान करती है उतना ही इससे निकलने वाली गैस और धुआं भी हानि पहुँचाता है। क्योंकि पटाखों के स्मॉग (घने धुंए) से आपको खांसी, फेफड़े संबंधी परेशानी, आंखों में संक्रमण, अस्थमा का दौरा, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/गले-का-संक्रमण-7-घरेलु-उपाय/">गले में संक्रमण</a>, ह्रदय संबंधी समस्याएं, हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्त चाप), <a href="https://www.hearingsol.com/hi/नाक-की-सूजन-रायनाइटिस/">नाक की एलर्जी</a>, ब्रोंकाइटिस (साँस की नाली में जलन) और निमोनिया जैसी गंभीर समस्यायें होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।</p>



<h3 id="heading1.5">5. मरीजों व अन्य जीवों को हानि</h3>



<p>पटाखों से हॉस्पिटल में मौजूद मरीजों, वृद्धों और शहरी व वन्य इलाकों में पाए जाने वाले पशु−पक्षियों को भी बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को पटाखों के कारण असहजता, अवसाद, घबराहट, चिंता विकार, उल्टी होना और तंत्रिका तंत्र बिगड़ना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।</p>



<p>दरअसल, पटाखों से निकलने वाला धुंआ, आवाज और गैस जीव-जंतुओं को बहुत नुकसान पहुंचाती है। कई बार लापरवाही में पटाखों को फोड़ने से लोग अपना हाथ या चेहरा तक जला बैठते हैं। इसके अतिरिक्त लापरवाही से कई अन्य प्रकार की घटनाएं भी हो सकती है। </p>



<h2 id="heading2">सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं?</h2>



<p>ऊपर हमारे द्वारा दी गयी जानकारी से आप यह तो जान ही गए होगे की पटाखों से कितनी समस्याएं होती है?</p>



<ul><li>तो इस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए? </li><li>इससे निजात पाने का क्या उपाय है? </li><li>क्या हम क्रैकर्स (आतिशबाजी) जलाना बंद कर दें?</li><li>क्या दीपावली के अवसर पर पटाखे इस्तेमाल करना गलत होता है?</li><li>क्या आतिशबाजी के इस्तेमाल से यह पर्व खराब हो रहा है?</li><li>क्या इस अवसर पर पटाखे न जलान ही एकमात्र उपाय है?</li></ul>



<p>खैर इसका फैसला तो आप पर ही छोड़ता हूँ की आपको क्या करना चाहिए? पर इन प्रश्नों के उत्तर जानना भी बेहद जरुरी है। दीपावली पर आतिशबाजी जलाना खुशियां मानाने का तरीका है। यह एक तरह से इस दिन सत्य की असत्य पर विजय के उपलक्ष्य में किया जाता है। सभी व्यक्ति पटाखे जलाकर आज के दिन रावण के आतंकपूर्ण शासन की समाप्ति, माता सीता के कैदमुक्त होने और प्रभु श्री राम की विजय का उत्सव मानते है।</p>



<h4><strong>उठाने होंगे कुछ समझदारी भरे कदम  :</strong></h4>



<p>चूँकि छोटे-छोटे बच्चों की खुशियां भी इस पर्व से जुडी है। आप भी याद कीजिये जब आप छोटे थे और दीपावली पर पटाखों के लिए जिद करते थे? इतना ही नहीं यह एक बहुत बड़ा कारोबार भी है। जिससे लाखो लोगों का रोजगार चलता है। यदि दीपावली पर आप पटाखे खरीदते है, तो ही इन गरीब मजदूरों के घर में दिवाली मानाने के लिए पैसे आते है।</p>



<p>जिससे उनके नन्हे मुन्हे बच्चों के चेहरे पर भी खिलखिलाती हंसी आती है। इसलिए बेहतर होगा की दिवाली पटाखे जलाना बंद न करें। परन्तु इसके अन्य विकल्पों पर हमें गौर करना चाहिए। लोगों में कम हानिकारक आतिशबाजियों और पटाखों को खरीदने तथा इस्तेमाल करने के लिए जागरूकता बढ़ानी चाहिए।</p>



<p>साथ ही इनके निर्माण में कम नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भी जरुरी कदम उठाने चाहिए। जिससे इन पटाखों से होने वाला नुक्सान तो कम हो पर आनंद उतना ही आये। साथ ही लाखों गरीब मजदूर भी बेरोजगार न होने पाएं। जिससे यह हर्षोल्लास का त्यौहार यूँ ही चलता रहे।</p>



<h2 id="heading3">सुरक्षित दिवाली के लिए सरकारी आदेश</h2>



<p>वर्तमान समय में लोगों के स्वाथ्य की सुरक्षा को लेकर सरकार भी जागरूक हो गयी है। इसीलिए वर्ष 2017 में दिवाली से कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पटाखे खरीदने पर बैन लगा दिया गया था। हालाँकि इस मामले में फिर बहुत सोच-विचार के चलते कोर्ट ने दुबारा फैसला दिया की यह बैन सिर्फ ग्रीन नॉर्म्स का पालन न करने वाले पटाखों पर रहेगा।</p>



<p>यही वजह थी की गत वर्षों में लोग कई तरह के पटाखों को नहीं चला पाएं। इस आदेश में यह भी साफ कहा गया था की पटाखे सिर्फ दो घंटे 8 से 10 ही चलाए जा सकते हैं। वैसे तो जो पटाखे इको-फ्रेंडली हों मतलब की सरकार द्वारा निर्धारित ग्रीन नॉर्म्स के अंतर्गत आते हों। उन्हें आप इस दिवाली पर दिल खोलकर खरीद भी सकते हैं और चला भी सकते हैं।</p>



<p>इसके पीछे शर्त बस इतनी सी है कि ऐसी आतिशबाजियों से वायु प्रदुषण और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदुषण</a> कम होना चाहिए। जिससे की जोगों को इनसे नुकसान कम हों। तो आइये अब हम जानते है की पिछले कुछ वर्षों में सरकार की तरफ से किन-किन हानिकारक पटाखों को बैन किया जा चुका है? जो की अब आपको नहीं मिलेंगे।</p>



<h3 id="heading3.1">1. नहीं मिलेगी पटाखों वाली लड़ी</h3>



<p>वैसे तो दीपावली पर पटाखों की बड़ी लड़ी लोगों की सबसे ज्यादा पसंदीदा होती है। क्योंकि ऐसी एक लड़ी में अमूमन हजार-हजार बम तक जुड़े होते हैं। इसलिए यह एक बार चलना शुरू होते ही कई मिनटों तक लगातार बजती ही रहती है। परन्तु लोगों को इनसे नुकसान भी सबसे ज्यादा होता है।</p>



<p>क्योंकि यह बहुत तेज शोर भी करती है, और बहुत जहरीला धुआं भी छोड़ती है। इसलिए इनकी बिक्री पर सबसे पहले रोक लगायी गयी थी। क्योंकि यह ग्रीन नॉर्म्स के अंतर्गत बिलकुल नहीं आती है। इसलिए यह अब खुले तौर पर बाजार का हिस्सा नहीं है। </p>



<h3 id="heading3.2">2. अत्याधिक शोर वाले पटाखे</h3>



<p>आतिशबाजी की आवाज ही <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदूषण</a> का सबसे बड़ा कारण है। यह स्वास्थ्य के लिए तो नुकसानदायक है ही, साथ ही यह तुरंत बहरा भी बना सकते है। क्योंकि दीपावली में चलाया जाने वाला एक सामान्य बम भी 100 डेसिबल की ध्वनि उत्पन्न करता है। </p>



<p>इतना ही नहीं बहुत से पटाखों का स्तर 150 डेसिबल को भी पार कर जाता है। जबिक इंसान के लिए ध्वनि का मानक स्तर 65 डेसिबल ही है। अतः ऐसे पटाखों से इंसान के दोनों कानों अथवा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/एक-कान-में-बहरापन/">एक कान से बहरा होने</a> की बहुत संभावना रहती है। हृदय रोगियों में भी दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।</p>



<h3 id="heading3.3">3. वायु प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे</h3>



<p>जैसा की हम आपको बता चुके है की पटाखों में हानिकारक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए इनका मिश्रण आतिशबाजी को अधिक घातक बना देता है। जब ये पटाखे चलाये जाते हैं तो यह तत्व हवा में घुल उसे प्रदूषित कर देते है।</p>



<p>जिससे लोगों को ठीक से श्वास लेने में परेशानी होती है। जिसके कारण लोगों को अस्थमा, टीबी, दमा, और फेफड़ों से जड़े कई रोग हो जाते हैं। इसलिए दिवाली पर आप ऐसे पटाखे न खरीदें जो खतरनाक तत्वों से बनते हों। </p>



<h3 id="heading3.4">4. गैर सुरक्षित चीनी पटाखे</h3>



<p>हमारे यहाँ बनने वाले पटाखों के मुक़ाबले अधिक सस्ते होने की वजह से चीनी पटाखों और लाइटिंग की मांग व बिक्री बहुत बढ़ जाती है। क्योंकि ये पटाखे ज्यादा रोशनी और तेज़ आवाज करते हैं। लेकिन ये पटाखे प्रदूषण फैलाने के साथ ही दिवाली के लिए सुरक्षित होते हैं जिससे कई हादसे होने का खतरा भी रहता है।</p>



<p>एक रिसर्च में पता चला है कि स्नेक टैबलेट (यानी सांप टिकिया) बच्चों के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक पटाखा है। क्योंकि इन काली टिकियों को जलाने से सांप जैसी आकृति बनती है, पर इनसे बहुत ज्यादा खतरनाक तत्व निकलते हैं। इसके अतिरिक्त फुलझड़ी, चकरी, अनार भी कम हानिकारक नहीं है।</p>



<h2 id="heading4">2020 में ग्रीन पटाखों से सुरक्षित दिवाली</h2>



<p>यदि आप भी यही सोच रहे हैं? की इतने सारे पटाखों को बंद करने से दीपावली पर चलाने के लिए क्या बचा? तो आप परेशान न हों क्योंकि ऐसे बहुत से कम नुकसान वाले पटाखे अभी भी बचे है जिन्हे आप खरीद सकते है। साथ ही आपको बता दूँ की पटाखों के प्रदुषण को कम करने के लिए भी सरकार जागरूक हो चुकी है। इसलिए सरकार द्वारा सुरक्षित दिवाली हेतु ग्रीन पटाखे बनाने और बेचने का प्रस्ताव भी रखा गया था।</p>



<p>इन ग्रीन क्रैकर्स को अब बना लिया गया है। चूँकि यह बिलकुल पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं, पर इनके जलने से कम प्रदूषण होता है। इसलिए इनकी विक्री और इस्तेमाल पर भी कोई रोक नहीं होगी। यह ग्रीन पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) की खोज हैं। नीरी एक सरकारी संस्थान है, जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंघान परिषद (सीएसआईआर) के अंदर आता है।</p>



<p>जब कम प्रदुषण वाले पटाखे बनाने की बात कही गयी, उसी समय से वैज्ञानिक इस खोज में लग गये और सफलता भी हासिल की, इन पटाखों के इस्तेमाल से प्रदुषण पचास प्रतिशत तक कम होगा। इनके निर्माण की विधि पटाखा फैक्ट्रियों के मजदूरों को सिखाई जाएगी। जिससे की उनका रोजगार भी न छीने और दिवाली भी सुरक्षित हो। इस साल बाजार में इन ग्रीन पटाखों के आने की उम्मीद है।</p>



<h2 id="heading5">सुरक्षित दिवाली मनाये ई-पटाखे से</h2>



<p>दिवाली के आनंद को बरक़रार रखने का और हानिकारक पटाखों से सुरक्षित रहने का यह भी एक बेहतर विकल्प है। जब कोर्ट के आदेश पर बाजार से कई आतिशबाजियों को हटा दिया गया, और उनकी विक्री या इस्तेमाल पर बैन घोषित हो गया। तब बाजार में इनकी मांग काफी बढ़ गयी। इन्हे सीधे चाइना से भारतीय बाजार में लाया और बेचा जाता है।</p>



<p>यह दिवाली के लिए बेहद सुरक्षित और उतना ही मनोरंजन करने वाले होते है, और सबसे बड़ी बात यह की इनसे बच्चों को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है। तो चलिए जानते है की क्या होते है ई-पटाखे? और यह कैसे काम करते है? वास्तव में ई-पटाखा आग से चलने वाला कोई साधारण पटाखा नहीं होता है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक आतिशबाजी होती है।</p>



<p>जिसमें छोटी-छोटी एलईडी लाइट्स, साउंड, और एक बैटरी लगी होती है। इसे एक रिमोट की सहायता से फोड़ा जा सकता है। बटन दबाने पर इसमें से पटाखे जैसी आवाज और रंगबिरंगी रोशनियां निकलती है। सबसे अच्छी बात यह है की इसकी बैटरी को फिर से चार्ज करके पटाखे को बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।  </p>



<h2 id="heading6">सुरक्षित दिवाली मानाने के लिए सुझाव</h2>



<p>त्यौहार कोई भी हो और कही भी मनाया जाये, पर यह तो सच है की त्यौहार के उत्साह और मस्ती में लोगों से गलतियां तो हो ही जाती है, जिसका खामियाजा बाद में भुगतना पड़ता है। इस वर्ष दिवाली पर ऐसा न हो और आप सुरक्षित रहें इसके लिए यहाँ हम आपको कुछ जरुरी सुझाव और सावधानियों से अवगत करना चाहते है। जिससे की आप दीपों के इस पर्व का पूरी तरह से आनंद प्राप्त करते हुए सुरक्षित दिवाली मनाएं।</p>



<p><strong>यह सभी आवश्यक तथ्य कुछ इस प्रकार है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading6.1">1. सावधानी से जलाएं पटाखे</h3>



<p>यह तो जाहिर सी बात है की आतिशबाजी करते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए खासतौर से जब आपके साथ छोटे बच्चे भी हो। इसलिए पटाखे जलाते समय बच्चों को जूते चप्पल पहनने को अवश्य कहें जिससे कोई जलती हुई चिंगारी उनके पैरो को न झुलसा पाए। इसके अतिरिक्त उनके कान में ईयरप्लग और चेहरे पर मास्क भी लगाएं, जिससे वह शोर और प्रदुषण से सुरक्षित रहें।</p>



<h3 id="heading6.2">2. पटाखों को खुद से रखें दूर</h3>



<p>कभी भी आतिशबाजी चलाते समय उसे हाथ में पकड़ कर बिलकुल भी न जलाएं। यह बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि पटाखा अचानक भी फट सकता है जिससे आप जख्मी हो सकते है। कोशिश करें की इन्हे दूर से किसी अगरबत्ती या अन्य चीज से जलाएं और अपने कपड़ों और चेहरे से एक सुरखित दूरी बना कर रखें। आधे जले हुए पटाखे को फिर से न जलाएं और उसे पानी आदि में डाल दें। </p>



<h3 id="heading6.3">3. सही कपड़ों का करें चुनाव</h3>



<p>दीपावली पर बहुत सी घटनाएं आग से जलने की होती है। इससे बचने के लिए अपने कपड़ो का सही तरीके से चुनाव करें। बढ़िया दिखने और फैशन के चक्कर में जल्दी आग पकड़ने वाले कपडे बिलकुल भी मत पहने। इनके स्थान पर ऐसे कपड़ों का चयन करें जो जल्दी न जलते हो, अथवा सूती वस्त्र धारण करें तो अधिक बेहतर होगा।</p>



<h3 id="heading6.4">4. बिजली के सामान से दूर जलाएं</h3>



<p>कभी भी पटाखे को किसी बिजली से चलने वाले सामान जैसे &#8211; टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी, अथवा बिजली के तारों के समीप बिलकुल भी जलाने की गलती न करें। इससे हादसा होने और तुरंत आग लगने का खतरा बहुत अधिक रहता है। साथ ही आपके कीमती सामान को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है।</p>



<h3 id="heading6.5">5. घर के अंदर बिल्कुल न चलाएं</h3>



<p>आतिशबाजी को कभी भी घर के अंदर नहीं चलाना चाहिए। यह किसी भी प्रकार से सुरक्षित और समझदारी भरा काम बिलकुल नहीं है। इससे घर में तुरंत आग लगने या किसी को चोट लगने की सम्भावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। साथ ही यदि घर का ढांचा कमजोर हुआ तो मकान ढ़हने का खतरा भी हो सकता है। इसलिए पटाखों को हमेशा खुले स्थान पर ही जलना चाहिए।</p>



<h3 id="heading6.6">6. सुरक्षा का इंतज़ाम साथ रखें</h3>



<p>कभी भी आतिशबाजी से खेलते समय अपने पास सुरखा के पूरे इंतजाम रखने चाहिए। जिससे अचानक हुए किसी भी हादसे को तुरंत सुरक्षा पूर्वक टाला जा सके। इसके लिए आप अपने पास पानी से भरी एक बाल्टी अवश्य रखें। पटाखों को यहाँ वहां न छोड़ें, अधजले पटाखे, अनार, फुलझड़ियों को इस्तेमाल के बाद पानी डाल दें। साथ ही जलने से बचने के लिए कुछ मलहम या ठंडक प्रदान करने वाली वस्तुएं जरूर रखें, अथवा तुरंत पानी के छींटे मारें।</p>



<h2 id="heading7">पटाखे से जलने पर घरेलु उपचार</h2>



<p>वैसे तो सुरक्षा करना तो बेहद जरुरी है ही, पर ऐसी स्थिति में क्या किया जाये? जब अचानक से कोई हादसा हो जाये? दिवाली के समय जलना तो आम बात है ही क्योंकि, उत्साह की अधिकता में लोग लापरवाही कर ही जाते है? तो ऐसे में कुछ जरुरी घरेलु उपचारो से आप आवश्यक सहायता मिलने तक स्थिति को नियंत्रित कर सकते है। </p>



<h4><strong>जलन से तुरंत रहत देने वाले सभी उपाय निम्नलिखित है &#8211;</strong></h4>



<ul><li>जल जाने पर त्वचा पर ठंडा तुरंत पानी डाल दें।</li><li>हाथ-पैर पानी में डाल कर रखें या गीला कपडा बांधें।</li><li>जले हुए हिस्से पर थोड़ा नारियल का तेल लगाएं।</li><li>नारियल का तेल जलन को कम कर राहत देता है।</li><li>हल्दी को पानी में घोल कर जली त्वचा पर लगाएं।</li><li>कच्चा आलू या गाजर को पीसकर जले पर लगा दें।</li><li>तुलसी का रस लगाने से जलन और दाग नहीं होंगे।</li></ul>



<h4><strong>जल जाने पर यह गलतियां बिलकुल भी न करें &#8211;</strong></h4>



<ul><li>जली त्वचा पर बर्फ न लगाएं, इससे खून का थक्का बन सकता है।</li><li>झुलसी हुई त्वचा पर तुरंत मक्खन, घी आदि बिलकुल न लगाएं।</li><li>फफोले पड़ने पर उन्हें फोड़ने की गलती न करें, संक्रमण हो सकता है।</li><li>कभी भी कपास या रुई न लगाएं यह जली त्वचा पर चिपक सकती है।</li><li>ज्यादा जलने पर उस व्यक्ति को तुरंत या अधिक पानी न पिलायें।</li><li>उसे थोड़ा-थोड़ा करके ही पानी, तरल या ओआरएस घोल पिलायें।</li><li>जला कपडा त्वचा पर चिपक जाने पर उसे तुरंत खीचें या हटाएँ नहीं।</li><li>इससे त्वचा के फटने और उस स्थान पर घाव होने का खतरा होता है। </li></ul>



<h2 id="heading8">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>दिवाली हम सभी का त्यौहार है जिसे आज के समय वैश्विक स्तर पर भी मनाया जाने लगा है। दिवाली की धूम भारत से बाहर भी विश्व के कोने कोने में मचने लगी है। ऐसे में हमें सुरक्षित दिवाली मनाए जाने पर ध्यान देना चाहिए। जिससे आपके कीमती पलों में कुछ यादगार लम्हे और जुड़ जाएँ। साथ ही आपको अपने परिवार के साथ कुछ आनंदायक क्षणों को बिताने का अवसर प्राप्त हो सके। चूँकि यह त्यौहार हम सभी के लिए खुशियां और सकारात्मक सोच लेकर आता है इसलिए उन खुशियों को बरक़रार रखें। सुरक्षित रहें और स्वस्थ रहें।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/">सुरक्षित दिवाली कैसे मनाएं? जानिए जलने पर घरेलु उपाय</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिवाली पर शोर वाले पटाखों से बहरापन के साथ बीमारियां</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Oct 2019 13:03:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3819</guid>

					<description><![CDATA[<p>लीजिये फिर आ गया हम सब का सबसे पसंदीदा त्यौहार, जी हाँ, यहाँ हम बात कर रहे है दिवाली की, चूँकि यह दीपों का पर्व है इसलिए इसे दीपावली कहा जाता है। पर आमतौर पर लोग इसे पटाखों का त्यौहार भी मानते है। हालाँकि पटाखों से बहरापन होना एक समस्या है। फिर भी दीपावली के ... <a title="दिवाली पर शोर वाले पटाखों से बहरापन के साथ बीमारियां" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/" aria-label="More on दिवाली पर शोर वाले पटाखों से बहरापन के साथ बीमारियां">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/">दिवाली पर शोर वाले पटाखों से बहरापन के साथ बीमारियां</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>लीजिये फिर आ गया हम सब का सबसे पसंदीदा त्यौहार, जी हाँ, यहाँ हम बात कर रहे है दिवाली की, चूँकि यह दीपों का पर्व है इसलिए इसे दीपावली कहा जाता है। पर आमतौर पर लोग इसे पटाखों का त्यौहार भी मानते है। हालाँकि पटाखों से बहरापन होना एक समस्या है। फिर भी दीपावली के पर्व पर तरह-तरह के पटाखे और आतिशबाजीयां जलाते हुए लोगों का हर्ष देखते ही बनता है। </p>



<p>छोटे बच्चों का मन भी रंगबिरंगी रौशनी वाली फुलझड़ियों, चकरी और अनार आदि को देखकर आनंद से भर जाता है। इसलिए बच्चों में इस त्यौहार का उत्साह सबसे ज्यादा होता है। पर क्या आपको पता है? की इन आनंदायक आतिशबाजियों और पटाखों से बहरापन व अन्य बीमारियां भी हो सकती है?</p>



<p>इस लेख में हम चर्चा करेंगे की आतिशबाजियों से होने वाले नुक्सान क्या है? पटाखों से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">बहरापन</a> व अन्य बीमारियां कैसे होती है? साथ ही सुरक्षित तरीके से दिवाली मानाने के लिए कुछ जरुरी उपाय भी जानेंगे।</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. दशहरा व दिवाली पर पटाखे क्यों?</a></li>
<li><a href="#heading2">2. पटाखों से बहरापन कैसे होता है?</a></li>
<li><a href="#heading3">3. कितने तेज़ शोर वाले पटाखों से बहरापन?</a></li>
<li><a href="#heading4">4. कुछ पटाखों से बहरापन व अन्य बीमारियां</a>
<ul>
<li><a href="#heading4.1">4.1. कान के रोग होना</a></li>
<li><a href="#heading4.2">4.2. श्वास संबंधी समस्याएं</a></li>
<li><a href="#heading4.3">4.3. गर्भपात का खतरा</a></li>
<li><a href="#heading4.4">4.4. त्वचा सम्बन्धी विकार</a></li>
<li><a href="#heading4.5">4.5. ह्रदय सम्बन्धी रोग</a></li>
<li><a href="#heading4.6">4.6. मस्तिष्क की बिमारी</a></li>
<li><a href="#heading4.7">4.7. उच्च रक्तचाप होना</a></li>
<li><a href="#heading4.8">4.8. आँखों में विकार</a></li>
<li><a href="#heading4.9">4.9. हार्मोनल डिसऑर्डर</a></li>
</ul></li>
<li><a href="#heading5">5. कैसे रोकें पटाखों से बहरापन?</a></li>
<li><a href="#heading6">6. पटाखों से बहरापन रोकने के उपाय</a></li>
<li><a href="#heading7">7. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">दशहरा व दिवाली पर पटाखे क्यों?</h2>



<p>दीपावली कार्तिक माह की अमावस्या को&nbsp;मनाया जाने वाला हिन्दू सभ्यता का सबसे ज्यादा प्रचलित त्यौहार है। साथ ही वर्तमान समय में यह विदेशों में भी बहुत धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व बन गया है। हालाँकि जितना पावन यह पर्व है उतनी ही पावन इसकी मान्यताएं भी है। इससे जुडी कथाएं व तथ्य भी बहुत रोचक है। क्योंकि देश के सभी हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग मान्यताओं और कथा-सन्दर्भों के अनुसार मनाया जाता है।</p>



<h4><strong>प्रभु श्री राम का अयोध्या आगमन :</strong></h4>



<p>सबसे प्रचलित सन्दर्भ है भगवान श्री राम का, ऐसा कहा जाता है की दशहरा के दिन प्रभु श्री राम ने दश सिर वाले रावण का वध कर सीता जी को मुक्त कराया था। इसलिए इस दिन को विजयदशमी के रूप में मनाया जाने लगा। </p>



<p>इसके उपरांत भगवान श्री राम जब अपना चौदह वर्ष का बनवास पूरा कर वापस अयोध्या लौटे थे। चूँकि वह अमावस्य की रात थी, इसलिए प्रभु श्री राम का स्वागत करने के लिए नगर वासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। इसी सन्दर्भ से इस दिन का नाम दीपावली पड़ा।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter"><img loading="lazy" width="702" height="346" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/Lord-Ram-kill-Ravana.jpg" alt="Lord-Ram-kill-Ravana" class="wp-image-3829" srcset="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/Lord-Ram-kill-Ravana.jpg 702w, https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/Lord-Ram-kill-Ravana-300x148.jpg 300w" sizes="(max-width: 702px) 100vw, 702px" /></figure></div>



<h4><strong>नरकासुर वध और माँ लक्ष्मी की उत्पत्ति :</strong></h4>



<p>कुछ अन्य प्रचलित व रोचक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से स्वयं माँ लक्ष्मी और वैद्य धन्वंतरि जी प्रकट हुए थे। इसलिए धन की देवी माँ लक्ष्मी के स्वागत में दीप जलाये गए। पांच दिवसीय इस पर्व में दिवाली से एक दिन पहले धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। </p>



<p>साथ ही कहा जाता है की इसी समय भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। तो अगले दिन अमावस्या होने पर लोगों ने दीपक जलाकर खुशियां मनाई थी। इसी कारण ही दिवाली का दिन नरक चौदस (चतुर्दशी) के रूप में भी मनाया जाता है।</p>



<figure class="wp-block-image"><img loading="lazy" width="800" height="300" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/नरकासुर-वध-व-समुद्रमंथन-से-माँ-लक्ष्मी.jpg" alt="नरकासुर-वध-व-समुद्रमंथन-से-माँ-लक्ष्मी" class="wp-image-3830" srcset="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/नरकासुर-वध-व-समुद्रमंथन-से-माँ-लक्ष्मी.jpg 800w, https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/नरकासुर-वध-व-समुद्रमंथन-से-माँ-लक्ष्मी-300x113.jpg 300w, https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/नरकासुर-वध-व-समुद्रमंथन-से-माँ-लक्ष्मी-768x288.jpg 768w" sizes="(max-width: 800px) 100vw, 800px" /></figure>



<p>इसी प्रकार की बहुत सी रोचक मान्यताओं के कारण देश के विभिन्न प्रांतों में दशहरा व दिवाली का त्यौहार बहुत हर्षोल्लास के साथ दीपक जलाकर व पटाखे फोड़कर मनाया जाता है। जिसमें बच्चे, बूढ़े, व नौजवान सभी अपने परिवार सहित माँ लक्ष्मी का पूजन कर नए वस्त्र पहनते है, और आपस में मिठाइयां बांटकर खुशियां मानते है।</p>



<h2 id="heading2">पटाखों से बहरापन कैसे होता है?</h2>



<p>पटाखों के इस त्यौहार पर भिन्न-भिन्न किस्म की आतिशबाजी जलाने का प्रचलन है। इस दिन हम सभी पटाखों के माध्यम से अपनी खुशियां जाहिर करते है। साथ ही अपने परिवारजनो, मित्रों, सहकर्मियों, आदि के साथ आनंद प्राप्त करते है। कई घंटों तक लोगों द्वारा आतिशबाजी करने का उत्साह देखते ही बनता है। </p>



<p>जिससे रात के समय पूरा आसमान रंगबिरंगी रोशनियों से जगमगा जाता है। और वातावरण पटाखों की तेज़ आवाज से गूँज उठता है। परन्तु वर्तमान समय में लोगों की बढ़ती मांग और नए नए किस्म के और अनोखे पटाखे बाजार में लाने की होड़ ने इस त्यौहार का आनंद ख़राब कर दिया है। जिसके चलते सुरक्षा नियमों को भी ताक पर रखकर और अधिक आवाज व रौशनी पैदा करने वाले क्रैकर्स (पटाखे) बाजार में बेचे जा रहे है।</p>



<p>इन सभी गैर सुरक्षित आतिशबाजियों का प्रयोग करना आपके लिए हानिकारक हो सकता है। क्योंकि यह वायू प्रदुषण के साथ साथ <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ध्वनि-प्रदूषण/">ध्वनि प्रदुषण</a> भी फैलाते है। जिससे <a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-की-बीमारी-इयर-डिजीज/">कान में समस्याएं</a> अथवा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/"></a><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">बहरापन की शिकायत</a> हो जाती है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-के-आयुर्वेदिक-उपचार/">कान की समस्याओं का आयुर्वेदिक उपचार</a> )</p>



<h4><strong>पटाखों से बहरापन व कान में निम्न समस्या हो सकती है &#8211;</strong></h4>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignright is-resized"><img loading="lazy" src="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/delhi-diwali.jpg" alt="पटाखों से बहरापन" class="wp-image-3832" width="400" height="266" srcset="https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/delhi-diwali.jpg 660w, https://www.hearingsol.com/hi/wp-content/uploads/2019/10/delhi-diwali-300x200.jpg 300w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /><figcaption>पटाखों से बहरापन</figcaption></figure></div>



<ul><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-दर्द-ओटाल्जिया/">कान में तेज़ दर्द</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">कान से कम सुनाई देना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/सेंसरीन्यूरल-हियरिंग-लॉस/">संवेदी श्रवण हानि</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चे-के-कान-से-मवाद-पस-आना/">कान में मवाद आना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/टिनिटस/">कान बजना या टिनिटस</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-पर्दा-फटना/">कान का पर्दा फटना</a></li><li>युस्टेशियन ट्यूब में क्षति</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-से-खून-आना/">कान से खून आना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/टिनिटस/लक्षण/">कान में घंटियां बजना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-बहना/">कान बहने की समस्या</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-की-नस/">कान की नस में क्षति</a></li></ul>



<h2 id="heading3">कितने तेज़ शोर वाले पटाखों से बहरापन?</h2>



<p>वातावरण में मौजूद किसी भी वस्तु के टकराने या हवा से घर्षण होने पर ध्वनि उत्पन्न होती है। जो हमारे कानों को सुनाई देती है। पर कभी कभी यह ध्वनि असहनीय भी हो सकती है। जिससे संवेदी कोशिकाओं को नुकसान पहुँचता है। ठीक इसी प्रकार जब दिवाली पर तेज़ शोर करने वाले सुतली बम, पटाखे आदि फोड़े जाते है।</p>



<p>तो इस धमाके से उत्पन्न भीषण ध्वनि तरंगे आपके कान के परदे पर टकराती है। काफी हद तक इस धमाके को युस्टेशियन नलिका द्वारा सोख लिया जाता है। परन्तु जब तीव्रता बहुत अधिक हो तब <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुनने-की-क्षमता/">सुनने की क्षमता</a> खोना तय है। आपको बता दूँ की मनुष्य सामान्यतः 65 डेसीबल की ध्वनि बर्दाश्त कर सकता है। इससे अधिक ध्वनि सुनने पर तकलीफ हो सकती है। </p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुनने-में-समस्या-का-उपचार/">सुनने में समस्या का आयुर्वेदिक उपचार</a> )</p>



<p>अक्सर लोग दहशरा, दिवाली व उसके बाद आने वाले <a href="https://www.hearingsol.com/hi/नववर्ष-संकल्प/">नए साल</a> पर सामान्य से अधिक तीव्रता वाले पटाखे और बम गोले फोड़ते है। जो 65 डीबी से अधिक का शोर उत्पन्न करते है। कुछ आतिशबाजी के धमाके 150 डेसीबल या उस से भी अधिक तीव्रता की आवाज उत्पन्न करते है। जिनसे एक बार में ही सुनने की शक्ति जा सकती है, और आप सदा के लिए दोनों कानों या किसी <a href="https://www.hearingsol.com/hi/एक-कान-में-बहरापन/">एक कान से बहरे</a> हो सकते है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-आयुर्वेदिक-उपचार/">बहरापन का आयुर्वेदिक उपचार</a> )</p>



<h2 id="heading4">कुछ पटाखों से बहरापन व अन्य बीमारियां</h2>



<p>यदि आप नहीं जानते है तो आपको बता दूँ की पटाखों में सोडियम, जिंक, कॉपर, केडियम, लेड, नाइट्रेड, सल्फर आदि कई जहरीले तत्व मौजूद होते है। जो वातावरण में घुलकर हवा को प्रदूषित करते हैं। जिससे बच्चों और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सूंघने-की-शक्ति-कम-होना/">बुजुर्गों को सांस लेने में बहुत दिक्कत</a> होती है। </p>



<p>इन पटाखों से भारी मात्रा में निकलने वाली  कार्बन मोनोऑक्साइड सहित सल्फर डाइआक्साइड तथा नाइट्रोजन डाइआक्साइड आदि जैसी गैसें वायु में घुलकर वातावरण में जहरीली गैसों की मात्रा बढा़ती है। यह हृदय रोग व दमा के मरीजों के लिए नुकसानदेह होती हैं।</p>



<p><strong>हानिकारक आतिशबाजी से निम्नलिखित बीमारियां हो सकती है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading4.1">1. कान के रोग होना</h3>



<p>जैसा की आप इस लेख में पढ़ चुके है की हानिकारक पटाखों का सबसे ज्यादा बुरा असर आपके कानों पर ही पड़ता है। जिससे आपके कान में विभिन्न प्रकार की जटिलताएं व तकलीफ होने का खतरा बना रहता है। क्योंकि अचानक से आपके आसपास कोई बम फटने (120 डीबी) से कान को हानि होती है। </p>



<p>क्योंकि लगातार काफी देर तक तेज़ आवाज वाले पटाखों (120-200 डेसीबल) के संपर्क में रहने से आपके कान बहुत अधिक प्रभावित होते है। जिससे कुछ समय तक <a href="https://www.hearingsol.com/hi/टिनिटस/लक्षण/">कान में सीटी बजने</a> के साथ अचानक बहरापन होना भी मुमकिन है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/टिनिटस/आयुर्वेदिक-इलाज/">कान में सीटी बजने का आयुर्वेदिक उपचार</a> )</p>



<h3 id="heading4.2">2. श्वास संबंधी समस्याएं</h3>



<p>बहुत अधिक बारूद से भरी आतिशबाजी या पटाखे जैसे की &#8211; रोशनी, फुलझड़ी, अनार, चकरी, काली सांप की टिकिया, आदि से भारी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाइआक्साइड जैसी जहरीली गैसों का धुआं निकलता है। </p>



<p>यह आपके और छोटे बच्चों के फेफड़ों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। इससे अस्थमा, साँस फूलना, फेफड़ों का कैंसर, दमा आदि खतरनाक रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। इससे सांस की बिमारियों के कारण आपके शरीर की सम्पूर्ण सेहत पर भी विपरीत असर पड़ता है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/दिवाली-पर-सेहत-का-ध्यान/">दीपावली पर कैसे सेहत का रखें ध्यान?</a> )</p>



<h3 id="heading4.3">3. गर्भपात का खतरा</h3>



<p><a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चे-की-सुनने-की-शक्ति/">गर्वभावस्था के दौरान</a> गर्भवती महिला के लिए यह पटाखे बहुत ही ज्यादा हानिकारक साबित हो सकते है। इससे निकलने वाली विषाक्त गैसों के बुरा असर उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर हो सकता है। जिससे असमय ही गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही माँ के साँस द्वारा यह धुआं शिशु तक पहुंच जाता है।</p>



<p>जिससे उसे फेफड़े, साँस व दिमाग से जुड़े रोग हो सकते है। इतना ही नहीं इन तीव्र ध्वनि उत्पन्न करने वाले पटाखों से गर्भस्थ शिशु को <a href="https://www.hearingsol.com/hi/जन्मजात-बहरापन/">जन्मजात बहरापन</a> अथवा नवजात <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चों-में-श्रवण-हानि/">बच्चों में श्रवण हानि</a> तक हो सकती है। जिससे बच्चा जीवन के शुरुआती समय में ही <a href="https://www.hearingsol.com/hi/श्रवण-बाधित-बच्चे/">श्रवण बाधित</a> हो सकता है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरेपन-के-लिए-टीकाकरण/">नवजात शिशु को बहरापन से बचाने के लिए टीकाकरण</a> )</p>



<h3 id="heading4.4">4. त्वचा सम्बन्धी विकार</h3>



<p>इन पटाखों को दूधिया सफ़ेद रौशनी प्रदान करने के लिए इनमे काफी मात्रा में एलुमिनियम का इस्तेमाल होता है जो की आपकी त्वचा के लिए बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है। इससे आपकी कई प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे &#8211; डर्मेटाइटिस आदि हो सकते है। </p>



<p>साथ ही इनके इस्तेमाल से आपकी तवचा जल भी सकती है जिससे आपकी त्वचा पर फफोले, लाल चकत्ते, और दाने आदि भी हो सकते है। इसलिए दिवाली और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/होली-पर-त्वचा-की-सुरक्षा/">होली पर त्वचा की सुरक्षा</a> करना बहुत ही जरुरी है।</p>



<h3 id="heading4.5">5. ह्रदय सम्बन्धी रोग</h3>



<p>आतिशबाजी से निकलने वाला गाढ़ा धुआं सांस के साथ अंदर जाने से यह सभी जहरीली अशुद्धियाँ आपके खून में मिल जाती है जिससे आपके दिल पर भी इनका बहुत खतरनाक असर होता है। और ह्रदय सम्बन्धी रोगों के लक्षण आपमें विकसित हो सकते है। </p>



<p>यदि कोई व्यक्ति पहले से ही दिल का मरीज है। तो उसके लिए खतरा और अधिक हो जाता है। साथ ही इनके अधिक शोर से बहरापन के अलावा दिल का दौरा पड़ने या अचानक धड़कन रुकने से व्यक्ति की मौत होने की सम्भावना भी काफी अधिक होती है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-से-जुड़े-मिथक/">बहरापन से जुड़े मिथक</a> )</p>



<h3 id="heading4.6">6. मस्तिष्क की बिमारी</h3>



<p>विषाक्त गैसों का धुआं वातावरण में घुलने से वायु भी दूषित हो जाती है और इनमे पाए जाने वाले हानिकारक तत्व किसी बच्चे या व्यस्क व्यक्ति के दिमाग पर विपरीत प्रभाव डालते है। जिससे उन्हें मस्तिष्क से जुड़े कई रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। और माँ के गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास में भी बाधा उत्पन्न होती है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/भाषा-विकार-से-जुड़े-मिथक/">भाषा विकार से जुड़े मिथक</a> ) </p>



<p>उसके सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास में समस्या से वह मानसिक रोग का शिकार हो जाते है। जिससे उन्हें <a href="https://www.hearingsol.com/hi/डिसरथ्रिया-बोलने-में-दोष/">बोलने में समस्या</a> के साथ <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ऑटिज्म-स्वलीनता/">आटिज्म</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/एडीएचडी/">एडीएचडी</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">हकलाना</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">तुतलाना</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/मौखिक-अप्रेक्सिया/">अप्रेक्सिया</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/अफेजिया-बोली-बंद-होना/">अफेजिया </a>आदि भाषा विकार हो सकते है।</p>



<p>( और पढ़ें &#8211; <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग-के-घरेलु-उपचार/">हकलाने &#8211; तुतलाने के घरेलु उपचार</a> )</p>



<h3 id="heading4.7">7. उच्च रक्तचाप होना</h3>



<p>पटाखे बनाने में प्रयोग होने वाले बहुत से पदार्थ अत्यधिक हानिकारक होते है। जिनका आपके शरीर में जाना भी कम जानलेवा नहीं है। क्योंकि इन अशुद्धियों के आपके रक्त में मिल जाने से बहुत नुकसान होता है। और आपको उच्च रक्तचाप की समस्या से भी गुजरना पड़ सकता है। </p>



<p>क्योंकि यह आपके ह्रदय की गति को अनियमित कर देते है। जिससे शरीर में खून के संचार पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है। तथा व्यक्ति को दिल का दौरा भी पड़ सकता है।</p>



<h3 id="heading4.8">8. आँखों में विकार</h3>



<p>पटाखों से निकलने वाली तेज़ सफ़ेद रौशनी आँखों को चौंधियाने के लिए काफी होती है।  जिससे आपको कुछ समय तक अस्थायी दृष्टिहीनता (कुछ दिखाई न देना) हो सकती है। साथ ही इसके विषाक्त पदार्थ धुंए के रूप में आपकी आँखों के संपर्क में आ जाते है। </p>



<p>जिससे आँखों में कई प्रकार के रोग और नजर से जुडी समस्याएं होना आम बात है। यदि आप लगातार इन रोशनियों को देखते रहे, तो आपको स्थायी रूप से आँखों की रौशनी चले जाने का सामना भी करना पड़ सकता है।</p>



<h3 id="heading4.9">9. हार्मोनल डिसऑर्डर</h3>



<p>इन सभी आतिशबाजियों में कई तरह की सफ़ेद, लाल, हरी रौशनी करने के लिए धातुओं को मिलाया जाता है, तथा नीली रोशनी उत्पन्न करने के लिए तांबे का मिश्रण डाला जाता है। अतः इनके जलने पर निकलने वाली गैसें <a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-कैंसर/">विभिन्न प्रकार के कैंसर</a> का खतरा बढ़ा देती हैं। और बच्चों व वयस्कों में हार्मोनल डिस्ऑर्डर का कारण भी बन सकती हैं। बच्चों में हार्मोनल डिस्ऑर्डर के कारण उनकी लंबाई और सेहत भी विपरीत रूप से प्रभावित हो सकते हैं।</p>



<h2 id="heading5">कैसे रोकें पटाखों से बहरापन?</h2>



<p>यह तो आप जान ही गए होगे की पटाखों से कितनी समस्याएं होती है? तो इस स्थिति में हमें क्या करना चाहिए? अथवा इससे निजात पाने का क्या उपाय है? क्या हम क्रैकर्स (आतिशबाजी) जलाना बंद कर दें? क्या दीपावली के अवसर पर पटाखे इस्तेमाल करना गलत होता है? </p>



<p>क्या आतिशबाजी के इस्तेमाल से यह पर्व खराब हो रहा है? और क्या इस अवसर पर पटाखे न जलान ही एकमात्र उपाय है? खैर इसका फैसला तो आप पर ही छोड़ता हूँ की आपको क्या करना चाहिए? पर इन प्रश्नों के उत्तर जानना भी बेहद जरुरी है। पटाखे न जलाना कोई उपाय नहीं है, इसकी वजह है की यह कारोबार लाखो गरीब मजदूरों को रोजगार देता है। </p>



<p>इनके बंद होने से वह बेरोजगार हो जायेंगे, और शायद उनके घर दीपावली मानाने के लिए पैसे भी न आये। इससे बेहतर यह होगा की आप इन पटाखों को जलाते समय सावधानी बरते, और बच्चों के साथ होने पर अधिक ख्याल रखें। कम हानिकारक पटाखे इस्तेमाल करें, सुरक्षा के नियमों का पालन करें।</p>



<h2 id="heading6">पटाखों से बहरापन रोकने के उपाय</h2>



<p>दीपावली के दिन पटाखे न जलाने से, सत्य पर असत्य की जीत का जश्न मानना तो मुमकिन नहीं है। साथ ही बच्चों मायूस चेहरे इस पर्व के आनंद को भी प्राप्त नहीं होने देंगे। क्योंकि पटाखे जलना गलत नहीं है पर इन्हे गलत तरीके से जलाना गलत है। </p>



<p>तो आइये जानते है की उन सभी सुरक्षा के नियमों को जिससे आप दीपावली का सुरक्षित तरीके से आनद भी ले सकते है। साथ ही पटाखों से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">बहरापन</a> व होने वाली अन्य बिमारियों से निजात भी पा सकते है।</p>



<p><strong>यह सभी सुझाव या सुरक्षा नियम निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li>बहुत तेज़ शोर वाले और कम सुरक्षित पटाखे न खरीदें।</li><li>कुछ दूर से जलाये जा सकने वाले पटाखे ही खरीदें।</li><li>अचानक किसी के पीछे या कपड़ों के पास पटाखे न जलाएं।</li><li>माचिस या गैस लाइटर के स्थान पर अगरबत्ती प्रयोग करें।</li><li>बहुत अधिक शोर से बचने के लिए कानों को ढंककर रखें।</li><li>आप चाहें तो कानों में ईयरप्लग या इयर मफ़ लगाएं।</li><li>हानिकारक गैसों व धुंए से बचने के लिए नाक मुँह को ढंकें।</li><li>अपने मुँह पर पर कपडा बांधें या कपडे का मास्क लगाएं।</li><li>ऐसे कपड़ें पहने जो बहुत जल्दी आग न पकड़ते हो।</li><li>आप कोशिश करें की पूरी बांह के सूती वस्त्र ही पहने।</li><li>जले हुए अनार, फुलझड़ी आदि को यहाँ वहां न फेंकें।</li><li>पानी से भरी एक बाल्टी रखें उसमें इन्हे डाल दें।</li><li>आग लग जाने या जल जाने पर तुरंत पानी डाले।</li></ul>



<h2 id="heading7">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>दिवाली का त्यौहार हम सभी का पसंदीदा त्यौहार है। क्योंकि इस दिन हम सभी नए नए कपड़ों को पहनकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी पूजा अर्चना कर धन-धान्य और वैभव की कामना करते है। साथ विभिन्न प्रकार के पकवानो और मिठाइयों का मज़ा लेते है। इन सब में इस पर्व के आनंद को दुगुना करने का काम करते है बच्चे जो इस त्यौहार पर पटाखे जलने के लिए बहुत अधिक उत्साहित रहते है। और उनके उत्साह को देखकर आप उनके साथ बच्चे बन जाते है। </p>



<p>पर कभी कभी आपकी छोटी सी गलती इस पूरे पर्व के आनंद को  दुःख और तकलीफ में बदल सकती है। इसलिए यह बहुत जरुरी है की 27 अक्टूबर 2019 को आने वाली इस दिवाली पर आप सुरक्षा के नियमों का पालन करे और सावधानी पूर्वक दीपावली का आनंद लें। पढ़ने के लिए धन्यवाद आपको दीपावली शुभ हो और माँ लक्ष्मी की कृपा आप पर सदा बनी रहे।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/">दिवाली पर शोर वाले पटाखों से बहरापन के साथ बीमारियां</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डिमेंशिया (मनोभ्रम)</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Aug 2019 12:51:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3790</guid>

					<description><![CDATA[<p>डिमेंशिया या मनोभ्रंश एक प्रकार का मस्तिष्क रोग होता है डिमेंशिया सामान्य रूप से मानसिक क्षमता में आई कमी को कहते हैं, अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं, और सोचते हैं कि यह मुख्यतर याददाश्त की समस्या है.परन्तु  इससे इंसान की सोचने और याद रखने की क्षमता ... <a title="डिमेंशिया (मनोभ्रम)" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/" aria-label="More on डिमेंशिया (मनोभ्रम)">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/">डिमेंशिया (मनोभ्रम)</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>डिमेंशिया या मनोभ्रंश</strong> एक प्रकार का मस्तिष्क रोग होता है डिमेंशिया सामान्य रूप से मानसिक क्षमता में आई कमी को कहते हैं, अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं, और सोचते हैं कि यह मुख्यतर याददाश्त की समस्या है.परन्तु  इससे इंसान की सोचने और याद रखने की क्षमता धीरे धीरे कम होती जाती है। और मनोभ्रंश से व्यक्ति के दैनिक कार्य काफी हद तक प्रभाव पड़ता है।</p>



<h3><strong>डिमेंशिया </strong>का खतरा क्या है?</h3>



<p>याददाश्त की कमी के कारण  वे यह तक भी भूल जाते हैं कि वे किस शहर में हैं, या कौनसा, टाइम, साल या महीना चल रहा है। कभी कभी बात करते हुए उन्हें सही शब्द नहीं सूझता। व्यक्ति यहाँ तक अपने बच्चे का नाम तक भी भूल जाता है और गंभीर अवस्था में वह अपना नाम भी भूल जाता है। </p>



<p>अन्य लक्षणों में भावनात्मक समस्याएं, भाषा संबंधी कठिनाइयों, और याददाशत की कमज़ोर शामिल है। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की हालत समय के साथ बिगड़ती जाती है, और सहायता की जरूरत भी बढ़ती जाती है, और समय के साथ उनको देखभाल करने वालों को आव्य्सक्ता पड़ती हैं डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के मूड व व्यवहार में बदलाव हो जाता है। </p>



<p>सामान्य रूप से यह उम्र बढ़ने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ती जाती है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह वृद्ध लोगो में अधिक होता है.क्युकी जैसे जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है वह मस्तिष्क से कमजोर हो जाता है और मनोभ्रंश होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है।</p>



<h3><strong>डिमेंशिया के लक्षण </strong></h3>



<p>मनोभ्रंश से पीड़ित व्यक्ति को नई नई जानकारी रखने में काफी परेशानी आती है वो अकसर उन चीज़ो को भी भूल जाते जहाँ उनका रोज का आना जाना होता है यहा ये व्यक्ति खो जाते है इस बीमारी से पीड़ित लोगो को काफी संघर्ष करंना पड़ता है लोगो के नाम और उनको को याद रखने&nbsp; में| लोग इनको भुलक्कड़ के नाम से भी भूलते है फिर&#8230;. </p>



<p><strong> कुछ महत्वपूर्ण लक्षण जिनसे पता  लगाया जा सकता है की किसको ये बिमारी है :-</strong></p>



<ul><li>शारीरिक व मानसिक संतुलन खो देना </li><li>याददाशत का धीरे-धीरे कम होना जिससे ज़रूरी चीज़ें भूल जाना</li><li>निर्णय नहीं ले पाना (क्षमता कम हो जाने के कारण )</li><li>समस्याओं में फ़सना, सुलझाने में कठिनाई</li><li>बहुत अधिक बेचैनी महसूस होना </li><li>सवालो को अधिकतर दोहराना</li><li>कुछ भी समझ नहीं पाना</li><li>ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आना </li><li>रोजाना के कामो को करने में कठिनाई महसूस करना</li><li>छोटी-छोटी बात पर बौखला जाना (चिड़चिड़ा पन )</li><li>भ्रम होना </li><li>वे वजह की चिंता करना </li><li>अनुचित व्यवहार </li></ul>



<h2><strong>डिमेंशिया के प्रकार </strong></h2>



<p>डिमेंशिया के सामान्य लक्षण जानकर सिर्फ यही पता लगाया जा सकता है की व्यक्ति डिमेंशिया है। लेकिन डिमेंशिया भी कयी प्रकार के होते है जिससे पता चले की किस व्यक्ति को किस प्रकार का डिमेंशिया है ये कुछ इस प्रकार है। </p>



<h3><strong>अल्‍ज़ाइमर डिमेंशिया</strong></h3>



<ul><li>अल्‍ज़ाइमर, डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण है।</li><li>60-80% अल्‍ज़ाइमर डिमेंशिया होता है।</li><li>यह दिमाग के तंत्र की कोशिकाओं में परिवर्तन से होता है।</li><li>अल्‍ज़ाइमर समाप्त नहीं होता और न ही इसका कोई इलाज किया जा सकता।</li><li>इसके लक्षणों में याद्दाश्‍त का खो देना, संभ्रान्ति, आदि ये धीरे-धीरे शुरु होते हैं और वक्त के साथ बिगड़ते जाते हैं।</li><li>दवा से रोग को धीमा किया जा सकता और लक्षणों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।</li></ul>



<h3><strong>वेस्कुलर डिमेंशिया</strong></h3>



<ul><li>वेस्कुलर डिमेंशिया, जब मस्तिष्‍क में रक्त वाहिनियों में रक्त के रुक जाने से होता है। </li><li>इसको पोस्टस्ट्रोक भी कहा जाता है। </li><li>छोटे अवरोधों से दौरा पड़ सकता है जिससे मस्तिष्‍क के छोटे हिस्से नष्‍ट हो सकते हैं। आपको जब यह हो तब पता न चले ऐसा भी हो सकता है।</li><li>वेस्कुलर डिमेंशिया का इलाज नहीं किया जा सकता और यह समाप्त नहीं होगा।</li><li>दवाइयों के द्वारा अधिक नुकसान होने से रोका जा सकता है।</li></ul>



<h3><strong>पार्किन्सन डिमेंशिया</strong></h3>



<ul><li>पार्किन्सन एक ऐसी स्थिति है जिसमे मस्तिष्‍क के तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुँचती है। </li><li>पार्किन्सन डिमेंशिया की बीमारी दिमाग के उस हिस्से में होती है जहाँ मांसपेशियों की गतिविधि को नियंत्रित करता है।</li><li>पार्किन्सन्स डिमेंशिया का भी कोई इलाज नहीं है, परन्तु इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।</li><li>पार्किन्सन के चलते कुछ लोग पागल हो सकते हैं।</li><li>लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवा, फिज़िकलथैरेपी और शल्यक्रिया का प्रयोग किया जा सकता है।</li></ul>



<h3><strong>लेवी बॉडीज डिमेंशिया</strong></h3>



<ul><li>लेवी बॉडीज डिमेंशिया जो कोर्टेक्स में प्रोटीन के एकत्र होने के कारण होता है।</li><li>लेवी बॉडीज डिमेंशिया&nbsp; से याददाश्त में कमी और भ्रम, नींद नहीं आना, वहम, आदि हो जाती है। </li><li>लेवी बॉडीज डिमेंशिया का भी कोई इलाज नहीं है, परन्तु इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।</li><li>दवाइयों के द्वारा अधिक नुकसान होने से रोका जा सकता है।</li></ul>



<h2><strong>मनोभ्रम के कारण</strong></h2>



<p>मनोभ्रंश उन लोगों को ज़्यादा प्रभावित करती है, जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक होती है। और जो लोग मोटापा का शिकार होते है, कोलेस्टेरॉल और डायबिटीज़ और उम्र के कारण डिमेन्शिया का ख़तरा बढ़ रहता&nbsp; है। एक शोध के अनुसार इसके लिए निम्न अनुमानित कारण मुख्य रूप से देखे जाते है जिनको मनोभ्रंश होता हैं।</p>



<ul><li>सिर पर चोट लगने से</li><li>शराब , लत लग जाती है</li><li>खराब आहार</li><li>डिहाइड्रेशन</li><li>दवाई&nbsp; -यदि व्यक्ति कई प्रकार की ले रहा हो</li><li>सोने में परेशानी</li><li>मस्तिष्क में ट्यूमर</li><li>डायबिटीज़</li><li>डिप्रेशन</li></ul>



<p><strong>रोग को बहुत जल्दी बढ़ाने वाले कारक निम्नलिखित है </strong></p>



<ul><li>हाइ ब्लड प्रेशर</li><li>डायबिटीज़</li><li>सिगरेट</li></ul>



<h2><strong> डिमेंशिया की रोकथाम</strong></h2>



<p>डिमेंशिया/मनोभ्रंश को रोकने के लिए कोई निश्चित उपचार नहीं है, परन्तु  कई ऐसे उपाय हैं, जिनकी सहायता से बचाव कर सकते है जैसे की &#8211;</p>



<ol><li><strong>धूम्रपान न करे:-</strong> मध्यम आयु में धूम्रपान करने से डिमेंशिया/मनोभ्रंश का खतरा बढ़ सकता है इसलिए धूम्रपान छोड़ने से यह जोखिम कम हो सकता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। </li><li><strong>ब्लड प्रेशर:-</strong> उच्च रक्तचाप से डिमेंशिया का जोखिम हो सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने की कोशिश करे। </li><li><strong>डिप्रेशन:-</strong> डिप्रेशन और स्ट्रेस को भी डिमेंशिया के संभावितजोखिम हो सकता है। इसलिए तनाव से दूर रहना जरुरी हो जाता है। </li><li><strong>स्वस्थ आहार:-</strong> रोगी के लिए उचित आहार लेना भी काफी जरुरी होता है ताकि डिमेंशिया के लक्षणो को नियंत्रण में रखा जा सके, हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत आनाज, टमाटर, गाजर, सीताफल, चुकुंदर, मूंगफली, बादाम, काजू  आदि को स्वस्थ आहार में  शामिल करें. इसके आलावा अलसी के बीज,कनोला तेल, सोयाबीन,सैलमन मछली, फूलगोभी आदि भी ले सकते है. इन सब में  ओमेगा 3 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। </li><li><strong>शारीरिक व्यायाम:-</strong> नियमित शारीरिक व्यायाम कुछ प्रकार के डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। साक्ष्य बताते हैं कि व्यायाम मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन प्रवाह को बढ़ाकर सीधे मस्तिष्क कोशिकाओं को लाभ पहुचाता है।</li></ol>



<h2>डिमेंशिया का <strong>विशेष उपचार : स्पीच थेरेपी</strong></h2>



<p><strong>स्पीच थेरेपी:-</strong> स्पीच थेरेपी एक प्रकार की चिकित्सक प्रक्रिया  होती है यह थेरैपी एक उपचार का ही भाग है इसे विज्ञानं चिकित्सक भी कहा जाता है इसका  प्रयोग बच्चों या बड़ों में बोलने की या इससे संबंधित कोई परेशानी होने पर उसका इलाज करने के लिए किया जाता है।</p>



<p>व्यस्क लोगों में भी अगर कोई परेशानियाँ पायी जाती है या किसी दुर्घटना की वजह से ये परेशानी पैदा हो जाती है तो उसमें भी स्पीच थेरेपी मदद कर सकती है। जैसे की  डिमेंशिया। इस स्पीच थेरेपी की सहायता से मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं को मजबूत बनती है। क्योंकि डिमेंशिया बीमारी ऐसी होती है जो मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं अथवा उसमे रक्त का बेहतर संचार नहीं होने से होती है।  </p>



<p><a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्पीच-थेरेपी/">स्पीच थेरेपी</a> की  सहायता से मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं को मजबूत बनती  है कुछ लोगों में स्पीच थेरेपी का अच्छा असर देखने को मिलता है। स्पीच थेरेपी की  सहायता से मजबूत इच्छाशक्ति की जा सकती  हैजिससे डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति  को  काफी रहत मिलती है। </p>



<h2><strong>निष्कर्ष</strong></h2>



<p><strong>डिमेंशिया या मनोभ्रंश</strong> सामान्य रूप से मानसिक क्षमता में आई कमी को कहते हैं यह एक घातक बीमारी  है, क्युकी  इसमें व्यक्ति अपना संतुलन खो देता है। और वह अपनी याददाश्त  भी खो देता है, अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं, और सोचते हैं कि यह मुख्यतर याददाश्त की समस्या है। </p>



<p>परन्तु इससे इंसान की सोचने और याद रखने की क्षमता कम होने लगती है। और मनोभ्रंश से व्यक्ति के दैनिक कार्य काफी हद तक प्रभाव पड़ता है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह वृद्ध लोगो में अधिक होता है.क्युकी जैसे जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है वह मस्तिष्क से कमजोर हो जाता है और मनोभ्रंश होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है।</p>



<p>डिमेंशिया की बीमारी दिमाग के उस हिस्से में होती है  जहाँ मांसपेशियों की गतिविधि को नियंत्रित करता है। और इस बीमारी के चलते कुछ लोग पागल भी हो जाते हैं। इस बीमारी  का इलाज नहीं किया जा सकता और यह समाप्त नहीं होती। दवाइयों के द्वारा अधिक नुकसान होने से रोका जा सकता है।</p>



<p>स्पीच थेरेपी की  सहायता से मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं को मजबूत बनती है स्पीच थेरेपी की  सहायता से मजबूत इच्छाशक्ति की जा सकती  है जिससे डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति को काफी राहत  मिलती है।</p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/">डिमेंशिया (मनोभ्रम)</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुख का कैंसर</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Aug 2019 12:28:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3787</guid>

					<description><![CDATA[<p>कैंसर एक प्रकार की बीमारी है, ये कई प्रकार की होती है। जैसे कि मुख में कैंसर होना, गले में कैंसर होना, पेट में कैंसर होना अथवा कान में कैंसर निम्नलिखित है। हम यहाँ मुख के कैंसर के बारे में बात करेंगे। ओरल कैंसर या मुँह में होने वाला कैंसर साथ ही इसे मौखिक कैंसर ... <a title="मुख का कैंसर" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/" aria-label="More on मुख का कैंसर">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/">मुख का कैंसर</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>कैंसर एक प्रकार की बीमारी है, ये कई प्रकार की होती है। जैसे कि मुख में कैंसर होना, गले में कैंसर होना, पेट में कैंसर होना अथवा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/">कान में कैंसर</a> निम्नलिखित है। हम यहाँ मुख के कैंसर के बारे में बात करेंगे। ओरल कैंसर या मुँह में होने वाला कैंसर साथ ही इसे मौखिक कैंसर भी कहा जाता है।</p>



<p>तो चलिए आज के इस लेख में हम मुख के कैंसर या ओरल कैंसर की इस समस्या के बारे में बात करेंगे और इसके कारण, लक्षण और प्रकारों पर भी चर्चा करेंगे। </p>



<h2>ओरल कैंसर क्या है?</h2>



<p>ओरल कैंसर भारत में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है, अगर एक अनुमान लगाया जाये तो दुनिआ भर में हर साल करीब 50 लाख लोग ओरल कैंसर का शिकार होते है। जिसमे कि भारत में सबसे अधिक होते है। इसके लिए भारत में डेन्टल कॉलेज भी खुले हुए है। मुख का कैंसर तम्बाकू, पान-मसाला से होता है। वे नहीं जानते कि किस जानलेवा बीमारी को न्यौता दे रहे है।</p>



<p>आज़ादी के बाद के समय दाँतों की बीमारियों का प्रकोप 50 से 60 प्रतिशत था, जो आज 90 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इसलिए देश भर में बहुत सारे डेंटल कॉलेज खुल चुके है। पहले के मुकाबले आज लोगो में जिज्ञासा जाग चुकी है। अगर आप अपने आस पास देखोगे तो ज्यादातर युवा पान मसाले अथवा तम्बाकू का सेवन कर रहा है।  </p>



<p>जो कि देश हित के लिए किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है। सरकार को इसके प्रति सख्त कदम उठाने चाहिए, नहीं तो ये कैंसर की प्रतिशत साल दर साल बढ़ती जाएगी। यदि ओरल कैंसर का पता अगर शुरुआती अवस्था में लग जाता है तो इसका इलाज बहुत आसानी से हो सकता है किंतु शुरुआत में इसका पता लगाना बहुत कठिन है, इसी लिए सभी लोगो को इसके बारे में जान लेना चाहिए।</p>



<p>मुख के कैंसर में होंठ, गाल, जीभ अथवा मुँह की ग्रंथिया शामिल है। एरिथोपालकिया आम का एक ऐसा घाव है  जिससे बहुत जल्दी ओरल कैंसर में बदलने की संभावना रहती है। अधिकतर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है। आज हम ओरल कैंसर के लक्षण और इसके होने वाले कारणों को विस्तार पूर्वक जानेंगे। </p>



<h2><strong>मुख के कैंसर का कारण</strong></h2>



<ol><li><strong>मुख में छाला या गठान जो लंबे समय से ठीक नहीं हो रही हो :-</strong> तम्बाकू अथवा पानमसालो से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%81%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9b%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a5-%e0%a4%85%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b0/">मुख में छाला</a> पड़ जाता है और इससे गाल के अंदर की कोमल त्वचा कट जाती है जिससे कि मुख के अंदर छाला पड़ जाता है। गठान भी तम्बाकू के सेवन से ही बन जाती है। जिससे कि  मरीज को बहुत दिक्कत होती है, इसीलिए अगर मुख में छाला होजाता है  तो हमे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए </li><li><strong>बिना किसी कारण मुंह से खून बहना :-</strong> अगर आपके मुँह से अचानक खून बहने लगे तो ये भी एक मुख के कैंसर का कारण है।  </li><li><strong>मुंह में धब्बा पड़ना :-</strong> अगर आपके मुख में सफ़ेद या लाल रंग  के धब्बा पड़ने लगे तो आप समजले कि यह भी एक कैंसर का कारण है, आपको तुरंत चिकित्सीय से संपर्क करना चाहिए।  </li><li><strong>बेवजह चेहरे की किसी हिस्से में दर्द :-</strong> चेहरे के किसी भी हिस्से में बेवजह दर्द होना भी एक मुख कैंसर का कारण है। </li><li><strong>घबराहट और आवाज़ में परिवर्तन :-</strong> अगर आपको अचानक से घबराहट हो तो जान ले कि  ये भी एक मुख कैंसर का कारण है।  </li><li><strong>दांतो के आकर में परिवर्तन :-</strong> अगर आपके दांतो के आकर में बे-वजह परिवर्तन हो तो समझ लें कि यह भी एक ओरल कैंसर का कारण होता है।  </li><li><strong>गर्दन में गांठ पड़ना :-</strong> बहुत से लोगो को लगता है कि उनके गले में गांठ पढ़ गई है, ऐसा लगने पर आपको तुरंत चिकित्सीय से संपर्क करना चाहिए। </li><li><strong>जीभ हिल-ने में कठिनाई  का अनुभव करना :-</strong> यदि आप को <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/">भोजन निगलने में कठिनाई</a>  या जीभ को हिलाने में तकलीफ हो रही हो तो ये भी एक मुख के कैंसर का कारण होता  है। </li><li><strong>वज़न घटना :-</strong> कुछ लोगो को वज़न का घटना भी महसूस होता है, यह भी एक प्रकार का मुख कैंसर का कारण है।  </li><li><strong>गले के पिछले हिस्से में कुछ फंसा हुआ सा लगना :-</strong> जिसको ओरल कैंसर होता है उसे गले के पिछले हिस्से में दर्द होता है और लगता है की कुछ फसा हुआ हो। </li><li><strong>कान में दर्द :-</strong> अगर <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%93%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/">कान में अचानक से दर्द</a> हो रहा हो-तो उसे नजर अंदाज़ मत करो तुरंत उसे चिकित्सीय से संपर्क करना चाहिए यह भी एक मुख के कैंसर का कारण होता है। </li></ol>



<h2><strong>मुख का कैंसर की पहली स्टेज</strong></h2>



<p>तम्बाकू और पानमसाले में विभिन्न प्रकार के केमिकल मिलाये जाते है, जिनसे मुँह की स्थिति ख़राब हो जाती है। पहली स्टेज में फाइब्रोसिस का शिकार हो जाता है। यह स्थिति पहली स्टेज की होती है, इस स्थिति में मरीज़ का उपचार संभव है। फाइब्रोसिस के लक्षण यह होते है&nbsp; कि मुँह के भीतर कुछ सफ़ेद और लाल रंग के स्पॉट आ जाते है, फिर मुख में जलन होने लगती है।  ऐसे में ज़रुरी है की मरीज़ तम्बाकू खाना बंद कर दे। </p>



<h2><strong>मुख का कैंसर की आखिरी स्टेज</strong></h2>



<p>मनुष्य मुख की रक्षा और इलाज के लिए अधिक गंभीरता नहीं बरतता लेकिन दूसरी बिमारिओ के लिए तुरंत डॉक्टर के पास चला जाता है। ज्यादातर लोग मुख के कैंसर की लास्ट स्टेज पर ही डॉक्टर के पास जाते है, इसलिए प्राइमरी स्टेज पर अपनी जांच करने के लिए लोगो का प्रतिशत 1 या 2 ही है।</p>



<p>हमारी पहली राय है  कि आप तम्बाकू तुरंत छोड़ दें। और जो लोग तम्बाकू कहते है वे लोग नियमित चेक-अप करवाए इसे पता चलता रहेगा की कही आपको ओरल कैंसर तो नहीं है।?</p>



<h2><strong>मुख के कैंसर का ऑपरेशन</strong></h2>



<p>तम्बाकू खाने वालो को पता होना चाहिए कि, मुख के कैंसर का ऑपरेशन बहुत ही महँगा होता है इसलिए इसे हर कोई भी नहीं करा सकता। इसके ऑपरेशन में लगभग एक लाख से भी ज्यादा पैसा लगता है और इसके बाद दूसरे खर्चे जैसे की कीमोथेरेपी आदि, यहाँ तक कि मुख के कैंसर का ऑपरेशन के बाद भी यह संका बनी रहती है की यह बीमारी फिर से उभर नहीं आये। और इसमें ऑपरेशन  के बाद मरीज़ का चेहरा बिगाड़ जाता है।</p>



<h2><strong>मुख के कैंसर से बचने के उपाय</strong></h2>



<p>मुख कैंसर से बचने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि तम्बाकू का सेवन तुरंत बंद कर  दिया  जाए। और अगर इसके बावजूद भी तम्बाकू का सेवन जारी  रहता है तो आप अपना नियमित चेकअप करवाए और डॉक्टर की सलाह लें। मनुष्य को नहीं भूलना चाहिए कि उसका जीवन अमूल्य है और आपकी जिंदगी परिवार के लिए ज़रुरी है।   </p>



<h2>निष्कर्ष</h2>



<p>हमने ऊपर जाना कि कैंसर जैसी बीमारी शरीर के लिए बहुत ही खतरनाक होती है, तम्बाकू, पानमसाले से हमे बचाना चाहिए और इसके खिलाफ़ सरकार को अपील करनी चाहिए। ताकि हम अपने देश को तम्बाकू मुक्त  भारत देश बना सकें। तम्बाकू और पानमसाले से  मनुष्य को बचना चाहिए। इससे यह पता चलता है कि कैंसर एक प्रकार की जानलेवा बीमारी है, अगर ये बीमारी का किसी को पता चलता है तो वो शुरुआत में ही इसका इलाज करा लेना चाहिए।      <br></p>



<p> &nbsp; &nbsp; <br></p>



<p><br></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/">मुख का कैंसर</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लिस्पिंग के घरेलु उपचार &#8211; जानिए तुतलाना कैसे रोकें?</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%81-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%81-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 12:50:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3670</guid>

					<description><![CDATA[<p>छोटे बच्चे अक्सर बोलते समय शब्दों के उच्चारण में गलतियां करते है क्योंकि वो अपनी भाषा के ज्ञान को विकसित कर रहे होते है। ऐसे में किसी शब्द को बोलते समय गलती करना कोई गंभीर समस्या नहीं है। पर यदि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहे, और बच्चे की आदत में शामिल हो जाये, तब असली ... <a title="लिस्पिंग के घरेलु उपचार &#8211; जानिए तुतलाना कैसे रोकें?" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%81-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/" aria-label="More on लिस्पिंग के घरेलु उपचार &#8211; जानिए तुतलाना कैसे रोकें?">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%81-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/">लिस्पिंग के घरेलु उपचार &#8211; जानिए तुतलाना कैसे रोकें?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>छोटे बच्चे अक्सर बोलते समय शब्दों के उच्चारण में गलतियां करते है क्योंकि वो अपनी भाषा के ज्ञान को विकसित कर रहे होते है। ऐसे में किसी शब्द को बोलते समय गलती करना कोई गंभीर समस्या नहीं है। पर यदि यह प्रक्रिया लगातार चलती रहे, और बच्चे की आदत में शामिल हो जाये, तब असली समस्या होती है। पर आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि लिस्पिंग के घरेलु उपचार और अभ्यास इसमें आपकी मदद कर सकते है। </p>



<p>हालाँकि यह सभी उपचार बेहद आसान और प्रभावकारी है, और इनसे मिलने वाला लाभ बहुत हद तक आपके जीवन में खुशियाँ भर सकता है। </p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p><em>अगर आप बोलने संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर लिस्पिंग के सम्बन्ध में अधिक जानकारी चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।</em></p></blockquote>



<p>तो चलिए अब बात करते है की लिस्पिंग के घरेलु उपचार क्या है? और यह किस प्रकार से आपके बच्चे की सहायता कर सकते है? पर उससे पहले आपको यह जानना जरुरी है की लिस्पिंग (तुतलाना) क्या है?</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. लिस्पिंग (तुतलाना) क्या है?</a></li>
<li><a href="#heading2">2. लिस्पिंग के प्रकार और घरेलु उपचार</a></li>
<li><a href="#heading3">3. लिस्पिंग के संकेत और घरेलु उपचार</a></li>
<li><a href="#heading4">4. लिस्पिंग के कारक और घरेलु उपचार</a></li>
<li><a href="#heading5">5. लिस्पिंग के घरेलु उपचार कौन से है?</a>
<ul>
<li><a href="#heading5.1">5.1. आंवला</a></li>
<li><a href="#heading5.2">5.2. बादाम</a></li>
<li><a href="#heading5.3">5.3. तेजपत्ता</a></li>
<li><a href="#heading5.4">5.4. गुणकारी दूध</a></li>
<li><a href="#heading5.5">5.5. काली मिर्च</a></li>
<li><a href="#heading5.6">5.6. सौंफ के बीज</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading6">6. लिस्पिंग के लिए अन्य अभ्यास</a>
<ul>
<li><a href="#heading6.1">6.1. अपनी समस्या पहचाने</a></li>
<li><a href="#heading6.2">6.2. नलिका से पानी पिये</a></li>
<li><a href="#heading6.3">6.3. दूसरे वर्ण को दोहराएं</a></li>
<li><a href="#heading6.4">6.4. तितली अभ्यास करें</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading7">7. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">लिस्पिंग (तुतलाना) क्या है?</h2>



<p>जब एक छोटा बच्चा नए नए शब्दों को बोलना सीख रहा होता है। तब उनके उच्चरण में गलतियां करता है। यदि यह गलतियां लगातार होती रहें? तो यह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">लिस्पिंग की समस्या</a> कहलाती है। जो की भाषा विकार (स्पीच डिसऑर्डर) का ही एक प्रकार होता है। इसके अंतर्गत बच्चा अपनी बोली को शुद्ध करने के प्रयास में विफल रहता है।</p>



<p>जिससे वह न चाहते हुए भी लगातार किसी शब्द के उच्चारण में एक सामान गलती करता रहता है। ऐसे बच्चे अक्सर दूसरों के लिए हंसी का पात्र बन जाते है। और अन्य लोग अथवा बच्चे उनका मज़ाक उड़ाते है। वैसे तो तुतलाना (लिस्पिंग) और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">हकलाना (स्टटरिंग)</a> दोनों आपस में सम्बन्ध रखते है।</p>



<p>क्योंकि बच्चा इन दोनों से पीड़ित हो सकता है। पर हकलाते समय बच्चा बोलते-बोलते किसी शब्द पर अटक जाता है। और तुतलाने के समय किसी शब्द का ग़लत उच्चारण कर देता है, जैसे &#8220;s&#8221; की जगह &#8220;z&#8221; बोलना आदि।</p>



<h2 id="heading2">लिस्पिंग के प्रकार और घरेलु उपचार</h2>



<p>लिस्पिंग वाणी विकार के बहुत से अंग होते है। जिसका मतलब यह है की <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97/">शब्दों के उच्चरण में समस्या</a> कई प्रकार से होती है। क्योंकि सिर्फ शब्दों को गलत बोलना ही एकमात्र परेशानी नहीं है। किसी शब्द को बोलते समय आपके मुँह के अलग हिस्से भिन्न उच्चारण करने के काम आते है।</p>



<p>इसलिए आपकी जीभ, तालु, दांत और हवा को बाहर छोड़ने की कला के विभिन्न संयोजनों से उच्चारण की अलग ध्वनियाँ निकलती है। इसलिए लिस्पिंग के प्रकार भी अलग होते है। जो किसी खास स्थिति में किसी खास शब्द को बोलने में समस्या उत्पन्न करते है। </p>



<p>लेकिन आपको यह जान कर ख़ुशी होगी की लिस्पिंग का घरेलु इलाज इन सभी प्रकारों को ठीक करने में सहायता प्रदान करता है। यह धीरे-धीरे शब्दों के उच्चरण को साफ करता है। जिससे पीड़ित बच्चा इनके लगातार उपयोग से ठीक से बोलने लगता है।</p>



<p><strong> लिस्पिंग के यह सभी प्रकार निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li><strong>इंटरडेंटल लिस्प : </strong>जब जीभ सामने के दांतों में फैलती है तो s या z का उच्चारण th जैसा होता है।</li><li><strong>डेंटलाइज़्ड लिस्प : </strong>जब जीभ सामने के दांतों को बलपूर्वक धक्का देती है तब यह होता है।</li><li><strong>लेटरल लिस्प : </strong>जब छोड़ी गयी हवा जीभ के चारों और बहती है तो L की ध्वनि निकलती है।</li><li><strong>पैलेटल लिस्प : </strong>जब जीभ का अगला हिस्सा तालु को छूता है, तब ध्वनि उत्पन्न होती है।</li><li><strong>नेसल लिस्प :</strong> जब शब्द बोलते समय हवा आपकी नाक से बहार निकलती है तब यह होता है।</li><li><strong>स्ट्राइडेन्ट&nbsp;लिस्प : </strong>जब जीभ और दांतों के बीच से गुजरने वाली हवा सीटी जैसी सुनाई देती है।</li></ul>



<h2 id="heading3">लिस्पिंग के संकेत और घरेलु उपचार</h2>



<p>जब किसी वर्ण अथवा शब्द को बोलने में होने वाली गलतियां किसी खास वजह से होती है। और और बच्चा बार-बार ऐसा करता है। तो वह अपने व्यवहार में अथवा वर्तमान स्थिति के अनुसार कुछ खास संकेत प्रदर्शित करता है। जिनसे आपको यह अंदाजा हो जाता है की बच्चा सिर्फ गलत बोलने का नाटक कर रहा है? या वह लिस्पिंग भाषा विकार से पीड़ित है?</p>



<p><strong>यह सभी संकेत या लक्षण निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97/">कुछ वर्णो का ठीक से उच्चरण न कर पाना</a></li><li>s को z अथवा th की तरह उच्चारण करना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">बच्चा हकलाने की समस्या से ग्रस्त होना</a></li><li>बोलते समय जीभ पर नियंत्रण न होना</li><li>शब्दों के साथ सीटी की आवाज निकलना</li><li>हवा मुँह की जगह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/नाक-की-सूजन-रायनाइटिस/">नाक में</a> से निकलना</li></ul>



<p>लिस्पिंग के घरेलु नुस्खे इन सभी लक्षणों को कम करने में सहायता प्रदान करते है। जिससे बच्चे द्वारा बोले जाने वाले शब्दों के उच्चारण में सुधार होता है। और वह अन्य सामान्य बच्चों की तरह ही साफ़ और स्पष्ट रूप से शब्दों का सही उच्चारण करने लगता है। इसमें कुछ समय लगता है पर इन उपचारों से लाभ अवश्य प्राप्त होता है।</p>



<h2 id="heading4">लिस्पिंग के कारक और घरेलु उपचार</h2>



<p>भाषा विकलांगता की इस समस्या के होने की वजहें वहुत सी हो सकती है। जिनके कारण शब्दों को बोलते समय बच्चे को परेशानी का अनुभव होता है। और वह सही प्रकार से उन शब्दों का स्पष्ट उच्चरण करने में असमर्थ रहता है। लिस्पिंग के आयुर्वेदिक उपचार का निरंतर उपयोग करने से यह इस समस्या के इन सभी कारकों को धीर-धीरे समाप्त कर समस्या को जड़ से ख़त्म कर देते है।</p>



<p><strong>लिस्पिंग के यह सभी कारक निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/मुँह-के-छाले-माउथ-अल्सर/">मुँह में छाले होना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/चिपकी-जीभ/">जीभ चिपकी होना</a></li><li>मुँह में चोट लगना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/निगलने-में-समस्या/">निगलने में समस्या</a></li><li>जीभ में कमजोरी होना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/जीभ-में-सूजन-ग्लोसाइटिस/">जीभ में सूजन होना</a></li><li>चबाने में समस्या होना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्पीच-थेरेपी/">बोलने में समस्या होना</a></li><li>स्वास सम्बन्धी विकार</li><li>तनाव की समस्या होना</li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/गर्मी-के-मौसम-में-एलर्जी/">बच्चे को एलर्जी होना</a></li></ul>



<h2 id="heading5">लिस्पिंग के घरेलु उपचार कौन से है?</h2>



<p>अब आप यह जान गए होंगे की लिस्पिंग की समस्या क्या है? और यह किन कारणों से होती है? साथ ही यह क्या लक्षण प्रदर्शित करती है? और इसके प्रकार कौन कौन से है? तो चलिए अब हम बात करते है इसके इलाज की, लिस्पिंग की समस्या के घरेलु उपचार कौन से है? और इन्हे कैसे इस्तेमाल करना है? यह हम आपको बताएँगे। </p>



<p><strong>लिस्पिंग से निजात पाने के यह सभी उपचार निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading5.1">1. आंवला</h3>



<p>आंवला का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह बहुत पुराने समय से प्रयोग की जाने वाली गुणकारी औषधि है। जो की कई रोगों को जड़ से समाप्त करने का काम करती है। साथ ही यह बच्चे के तुतलाने और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">हकलाने की समस्या</a> का भी इलाज करती है। इसे कच्चा चबाने से बहुत से लाभ प्राप्त होते है। यह बहुत ही आसानी से आपको प्राप्त हो सकती है।</p>



<p><strong>प्रयोग विधि :</strong> इसके लिए आपको बहुत अधिक मेहनत करने की आवस्यकता नहीं है। आपको सिर्फ बाजार से कुछ ताजे आंवला लेकर आने है। और उन्हें अच्छी तरह धोकर उनके छोटे छोटे टुकड़े काट लें। आपको इन्हे प्रतिदिन चबाकर खाना है। हालाँकि इसका स्वाद आपको कुछ नापसंद आ सकता है। पर यकीन मानिये इसके प्रयोग से आपकी समस्या में लाभ जरूर मिलेगा।</p>



<h3 id="heading5.2">2. बादाम</h3>



<p>बादाम के लाभ से तो आप परिचित होंगे ही, इसमें काली मिर्च और मिश्री को मिला देने से इसकी विशेषता कई गुना अधिक बढ़ जाती है। इसलिए यह बहुत लम्बे समय से इस्तेमाल की जाने वाली रामबाण औषधि है जो लिस्पिंग और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">स्टटरिंग की समस्या</a> में निश्चित लाभ प्रदान करती है। इसके इस्तेमाल की विधि निम्नलिखित है।</p>



<p><strong>प्रयोग विधि :</strong> इसके लिए आपको एक मिश्रण तैयार करना होगा। और उस मिश्रण को बनाने के लिए आपको 7 बादाम, 7 काली मिर्च, और आवस्यकता अनुसार पीसी हुई मिश्री चाहिये। आप बादाम और काली मिर्च को एक साथ बारीक पीस लें। फिर इस मिश्रण में जरुरत के अनुसार मिश्री मिला कर इसका पेस्ट बनायें। पीड़ित बच्चे को सुबह खाली पेट प्रतिदिन यह मिश्रण दें लाभ अवश्य मिलेगा।</p>



<h3 id="heading5.3">3. तेजपत्ता</h3>



<p>तेज पत्ता सिर्फ आपके भोजन को सुगन्धित बनाने का काम नहीं करता है। इसके कई अन्य फायदे भी है। यह एक बहुत लाभकारी औषधि है जो कई समस्याओं में लाभ प्रदान करती है और तुतलाने या लिस्पिंग की समस्या को भी कम करती है। इसके प्रयोग से भाषा का उच्चारण शुद्ध होता है।</p>



<p><strong>प्रयोग विधि :</strong> इसका प्रयोग करने के लिए किसी विधि की आवस्यकता नहीं है। इसे सामान्य रूप में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको बस कुछ तेजपत्ते लेने है, और इन्हे साफ करके इनके छोटे टुकड़े करने है। फिर इन 2-3 पत्तों को जीभ के नीचे रखना है। इन्हे जीभ के नीचे रखकर बोलने से उच्चारण साफ़ होता है।</p>



<h3 id="heading5.4">4. गुणकारी दूध</h3>



<p>दूध अपने आप में एक सम्पूर्ण आहार है। यह शरीर को शक्ति प्रदान करता है और ऊर्जावान बनाता है। इसमें कुछ प्रकार की लाभकारी औषधियों को मिलाकर इसके प्रभाव को बढ़ाया जा सकता है। जिससे की यह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">शब्दों के उच्चरण में समस्या</a> को कम करने में सहायता प्रदान कर सकती है। आइये इसे बनाने की विधि जानते है।</p>



<p><strong>प्रयोग विधि :</strong> इसके लिए आपको सही मात्रा में कुछ आवश्यक सामग्रियों को लेना है। यह सभी सामग्रियां निम्नलिखित है &#8211;</p>



<ul><li>50 ग्राम बादाम</li><li>200 ग्राम पिस्ता</li><li>10 ग्राम चांदी का वर्क</li><li>10 ग्राम दालचीनी</li><li>3 ग्राम लौंग </li><li>3 ग्राम केसर</li><li>250 ग्राम शहद </li></ul>



<p>इन सभी को निश्चित मात्रा में एकत्रित कर लें। इन सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाकर घिस लें या बारीक पीस लें। उसके बाद इन्हे शहद में मिलकर अच्छे से फेंट लें, जब तक यह शहद में पूरी तरह मिल न जाएँ। फिर इस मिश्रण को किसी बोतल में भरकर सुरक्षित रख लें। प्रतिदिन इस मिश्रण की 2 ग्राम मात्रा को 250 ग्राम दूध के साथ पीड़ित बच्चे को सुबह पीने के लिए दें। वयस्कों के लिए मात्रा दुगनी कर दें।</p>



<h3 id="heading5.5">5. काली मिर्च</h3>



<p>काली मिर्च एक बहुत लाभकारी औषधि है जो की बहुत सी स्वास्थ्य समस्याओं में प्रयोग की जाती है साथ ही यह लिस्पिंग की समस्या को दूर करने की विधि में भी इस्तेमाल की जाती है। इसे आप कई प्रकार से प्रयोग कर सकते है। यह बच्चे के शब्दोच्चारण की शुद्ध करने में सहायता प्रदान करती है। और समस्या को धीरे-धीरे समाप्त करती है।</p>



<p><strong>प्रयोग विधि :</strong> इसके लिए आपको बाजार से साफ काली मिर्च लानी है, और इसके दो दाने लेकर चबाने है। आप इन्हे अच्छी तरह चबाकर बारीक कर लें और निगल जाएँ। प्रतिदिन दिन में दो बार इनके प्रयोग से आपके मुँह और वाणी के विकार दूर हो जायेंगे और साफ उच्चरण में सहायता प्राप्त होगी। यह पेट की समस्याओं में भी लाभ प्रदान करती है।</p>



<h3 id="heading5.6">6. सौंफ के बीज</h3>



<p>सौंफ ठंडक प्रदान करने वाली औषधि है। जो की भोजन को पचाने का काम करती है। और मुँह की दुर्गन्ध को भी दूर करती है। साथ ही इसके प्रयोग से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">लिस्पिंग की समस्या</a> में बहुत लाभ प्राप्त होता है। क्योंकि यह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">बच्चे के हकलाने</a> और तुतलाने को कम करने में मदद करती है, और वाणी को शुद्ध करती है।</p>



<p><strong>प्रयोग विधि :</strong> इसका प्रयोग करने के लिए आपको कुछ अन्य वस्तुओं की आवस्यकता पड़ेगी। इन सभी वस्तुओं को मिलाकर आपको एक मिश्रण तैयार करना होगा। यह सभी आवश्यक वस्तुएं निम्न है &#8211;</p>



<ul><li>5 ग्राम सौंफ</li><li>300 ग्राम पानी</li><li>50 ग्राम मिश्री</li><li>250 ग्राम गाय का दूध</li></ul>



<p>इन सभी वस्तुओं को एकत्रित कर लें। अब सौंफ को लें और इसे मोटा दरदरा कूट लें। फिर इस कुटी हुई सौंफ को 300 ग्राम पानी में डालकर उबलने के लिए रख दें। इसे तब तक उबलने दें जब तक पानी एक तिहाई (लगभग 100 ग्राम) न रह जाये। अब इसमें मिश्री और दूध डालकर अच्छी तरह मिलाएं। बच्चे को सोने से पहले प्रतिदिन यह मिश्रण दें। कुछ दिन इस्तेमाल करने से लाभ होगा।</p>



<h2 id="heading6">लिस्पिंग के लिए अन्य अभ्यास</h2>



<p>लिस्पिंग से ग्रस्त होने पर स्पीच थेरेपी के कुछ अभ्यास करना बहुत लाभकारी होता है। हालाँकि उपरोक्त घरेलु नुस्खों को इस्तेमाल करने से भी लाभ अवश्य मिलता है। पर यदि इसके साथ कुछ जरुरी अभ्यास भी किये जाएँ तो इनका परिणाम और बेहतर हो सकता है। क्योंकि यह अभ्यास मुँह और जीभ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने का काम करते है। </p>



<p><strong>यह सभी घरेलु अभ्यास निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading6.1">1. अपनी समस्या पहचाने</h3>



<p>आपको जिन वर्णों या शब्दों के उच्चारण में समस्या आती है। उन सभी को पहचाने और उनकी एक सूची बनायें। यदि आपको ऐसा करने में समस्या आ रही है तो आप अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों की सहायता ले सकते है। इन सभी सूचीबद्ध शब्दों या वर्णों को प्रतिदिन दोहराएं। </p>



<p>और इनका सही उच्चरण करने का प्रयास करें। आप चाहें तो आईने के सामने खड़े होकर भी इनका अभ्यास कर सकते है। इन्हे बार-बार दोहराने से आपको इनका सही उच्चरण करने में सहायता मिलेगी।</p>



<h3 id="heading6.2">2. नलिका से पानी पिये</h3>



<p>बहुत से स्पीच थेरेपिस्ट (भाषा चिकित्सक) यह मानते है की लिस्पिंग से ग्रस्त बच्चों को एक खोखली नलिका (स्ट्रॉ) के माध्यम से पानी अथवा कोई भी अन्य तरल पदार्थ पीने से लाभ प्राप्त होता है। यह एक बेहद आसान पर बहुत असरदार अभ्यास है। </p>



<p>क्योंकि ऐसा करने से उन्हें जीभ को आगे धकेलने के स्थान पर पीछे खींचना पड़ता है। इससे जीभ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है, और उन्हें मजबूती मिलती है। प्रतिदिन कुछ भी पीते समय यह अभ्यास करने से लाभ होता है।</p>



<h3 id="heading6.3">3. दूसरे वर्ण को दोहराएं</h3>



<p>लिस्पिंग की समस्या के अंतर्गत जब आपको किसी वर्ण या शब्द को <a href="https://www.hearingsol.com/hi/डिसरथ्रिया-बोलने-में-दोष/">बोलने में कठिनाई</a> होती है तो आप उस वर्ण या शब्द के स्थान पर कोई अन्य मिलता-जुलता वर्ण या शब्द बोलकर अभ्यास कर सकते है। इससे आपको वांछित वर्ण या शब्द बोलने में सहायता प्राप्त होगी। </p>



<p>उदाहरण के लिए यदि आपको &#8220;S&#8221; के उच्चारण में समस्या आती है तो आप इसके स्थान पर &#8220;T&#8221; को बहुत जल्दी और बार-बार बोलिये। इससे आपको &#8220;S&#8221; को ठीक से उच्चारण करने में सहायता मिलेगी।</p>



<h3 id="heading6.4">4. तितली अभ्यास करें</h3>



<p>यह एक सामान्य सा अभ्यास है जो की बहुत मजेदार है। इसे करने के लिए आपको अपनी जीभ के बाहरी हिस्से को दांत के किनारे पर रखना है, जैसे की एक तितली के पंख होते है। और अपने जीभ का मध्य भाग मोड़ना है जिससे उस पर हवा का संचार हो सके। </p>



<p>अब इस स्थिति में आपको उन वर्णो या शब्दों का उच्चरण करना है। जिन्हे आप ठीक से नहीं बोल पाते है, जैसे की &#8220;S&#8221; आदि। पहली बार में आपको मुश्किल आएगी पर इसका अभ्यास करते रहें जब तक आप सफलता प्राप्त नहीं कर लेते है।</p>



<h2 id="heading7">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>शब्दों को न बोल पाना अथवा उनका गलत उच्चरण करना कभी कभी आपको दूसरों के लिए मज़ाक का पात्र बना सकता है। जिससे आपको बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। पर इससे घबराएं नहीं बल्कि यह सोचें की आप उनसे बेहतर कर सकते है। इसके लिए आपको थोड़े अभ्यास और दृढ़ निश्चय की जरुरत होती है। खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करें इसलिए नहीं की आपको दूसरों को यह दिखाना है बल्कि इसलिए क्योंकि आप यह कर सकते है। खुद पर भरोसा रखें और अभ्यास करते रहें सफलता जरूर मिलेगी।</p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p><em>अगर आप बोलने संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर लिस्पिंग के सम्बन्ध में अधिक जानकारी चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।</em></p></blockquote>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%81-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/">लिस्पिंग के घरेलु उपचार &#8211; जानिए तुतलाना कैसे रोकें?</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%81-%e0%a4%89%e0%a4%aa%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाषा विकार से जुड़े मिथक &#8211; जानिए इनका वास्तविक सच</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Aug 2019 12:48:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3635</guid>

					<description><![CDATA[<p>भाषा विकार या बोलने में समस्या एक बहुत ही गंभीर रोग है। यह किसी भी उम्र के लोगो को अपना चपेट में ले सकती है। पर ज्यादातर यह शिशु के जन्म से ही या शुरूआती कुछ वर्षों में दिखना शुरू हो सकता है। अक्सर लोग जानकारी की कमी के चलते भाषा विकार से जुड़े मिथक ... <a title="भाषा विकार से जुड़े मिथक &#8211; जानिए इनका वास्तविक सच" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95/" aria-label="More on भाषा विकार से जुड़े मिथक &#8211; जानिए इनका वास्तविक सच">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95/">भाषा विकार से जुड़े मिथक &#8211; जानिए इनका वास्तविक सच</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भाषा विकार या बोलने में समस्या एक बहुत ही गंभीर रोग है। यह किसी भी उम्र के लोगो को अपना चपेट में ले सकती है। पर ज्यादातर यह शिशु के जन्म से ही या शुरूआती कुछ वर्षों में दिखना शुरू हो सकता है। अक्सर लोग जानकारी की कमी के चलते भाषा विकार से जुड़े मिथक या इनके सम्बन्ध में प्रचलित गलतफहमियों का शिकार हो जाते है, और खुद भी इन्हे फ़ैलाने का काम करते है।</p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p><em>अगर आप बोलने संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर भाषा विकार के सम्बन्ध में अधिक जानकारी चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।</em></p></blockquote>



<p>तो चलिए अब इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करते है और जानते है की भाषा विकार से जुड़े मिथक क्या है? और यह प्रचलित क्यों है? साथ ही जानिए की इन्हे फैलने से कैसे रोका जाये?</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. भाषा विकार से जुड़े मिथक क्या है?</a></li>
<li><a href="#heading2">2. भाषा विकार से जुड़े मिथक कैसे फैलते है?</a></li>
<li><a href="#heading3">3. भाषा विकार से जुड़े मिथक क्यों प्रचलित है?</a></li>
<li><a href="#heading4">4. भाषा विकार से जुड़े मिथक कौन से है?</a>
<ul>
<li><a href="#heading4.1">4.1. इस उम्र में बच्चों के साथ यह होता ही है?</a></li>
<li><a href="#heading4.2">4.2. बच्चा जाँच-परिक्षण से गुजरने के लिए बहुत छोटा है?</a></li>
<li><a href="#heading4.3">4.3. लड़कियों की तुलना में लड़के देरी से बोलते हैं?</a></li>
<li><a href="#heading4.4">4.4. बच्चा बोल नहीं रहा है तो वह ज़िद्दी या आलसी हैं?</a></li>
<li><a href="#heading4.5">4.5. बच्चे का स्कूल जाना शुरू करने तक इंतजार करना चाहिए?</a></li>
<li><a href="#heading4.6">4.6. मानसिक रूप से मंद बच्चों में भाषण विकार सामान्य है?</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading5">5. भाषा विकार से जुड़े मिथक कैसे रोकें?</a></li>
<li><a href="#heading6">6. बच्चों की उम्र अनुसार भाषा विकास</a></li>
<li><a href="#heading7">7. स्पीच थेरेपी से बोलने में लाभ</a></li>
<li><a href="#heading8">8. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">भाषा विकार से जुड़े मिथक क्या है?</h2>



<p>भाषा विकार के मिथक जानने से पहले आपको यह जानना होगा की आखिर भाषा विकार क्या है? स्पीच डिसऑर्डर अथवा बोलने में समस्या बहुत ही जटिल रोग है। जो सामान्यतः दवाओं के प्रयोग से ठीक नहीं होता है। इसे दूर करने के लिए निरंतर अभ्यास की जरुरत होती है। <a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्पीच-थेरेपी/">स्पीच थेरेपी</a> ही इसका एकमात्र सफल उपाय है। यह <a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b7/">बोलने में कठिनाई</a> की समस्या को दूर करने में पीड़ित व्यक्ति की सहायता करती है।</p>



<p><strong>बोलने में समस्या या स्पीच डिसऑर्डर निम्नलिखित प्रकार के होते है &#8211;</strong></p>



<ul><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">लिस्पिंग (उच्चारण में समस्या)</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">हकलाना या तुतलाना</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/मौखिक-अप्रेक्सिया/">मौखिक अप्रेक्सिया</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/अफेजिया-बोली-बंद-होना/">अफेजिया (बोली बंद होना)</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/डिसरथ्रिया-बोलने-में-दोष/">डिसरथ्रिया (बोलने में कठिनाई)</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/ऑटिज्म-स्वलीनता/">ऑटिज्म (स्वलीनता)</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/ऑटिज्म-आयुर्वेदिक-उपचार/">एडीएचडी (ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार)</a></li><li><a href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae/">डिमेंशिया (दिमागी विकार)</a></li></ul>



<p>भाषा विकार से जुड़े मिथक ऐसी गलत अवधारणाएं (गलतफहमियां) है जो बिना किसी आधार के ही समाज में प्रचलित है। जब कोई बच्चा जन्म लेता है, तो अक्सर लोग बच्चे के माता-पिता को इन सुनी सुनाई बातो या भ्रांतियों के बारे में बताते है। इनमें से क्या सच है? और क्या झूठ? यह तो समय आने पर ही पता चलता है। पर आप निराश न हों क्योंकि हम आपको इन सभी तथ्यों की वास्तविक सच्चाई बताने जा रहे है।</p>



<h2 id="heading2">भाषा विकार से जुड़े मिथक कैसे फैलते है?</h2>



<p>भाषा विकार से जुड़े मिथक फैलने के पीछे वैसे तो बहुत सी वजहें हो सकती है। पर इन सभी में सबसे बड़ी और खतरनाक वजह है जानकारी की कमी, जी हाँ। अक्सर लोग इन ग़लतफ़हमियों के पीछे की वास्तविक सच्चाई को जानने की कोशिश ही नहीं करते है। और जो कुछ भी तथ्य किसी व्यक्ति के द्वारा सुनते है उसे ही सच मान लेते है। यही वजह है की ऐसी गलतफहमियां समाज में पनपती रहती है।</p>



<p>अक्सर इन गलत तथ्यों या मिथकों को फैलाने वाले ऐसे लोग होते है, जिनपर हम भरोसा करते है। जैसे आपके कोई करीबी रिश्तेदार या परिवार के अन्य सदस्य भी यह काम कर सकते है। हालाँकि इसमें उन लोगों की गलती नहीं होती है। क्योंकि वह लोग तो बस आपसे जानकारी साझा करने की कोशिश करते है। पर कोई भी जानकारी बिना सच जाने दूसरों को बताना ही इनके फैलने का मुख्य कारण है। </p>



<h2 id="heading3">भाषा विकार से जुड़े मिथक क्यों प्रचलित है?</h2>



<p>भाषा विकार से जुड़े मिथक प्रचलित होने का सबसे आम कारण है वास्तविक सच का पता न होना। चूँकि यह जानकारी आपके करीबी लोगों द्वारा प्रदान की जाती है। इसलिए अक्सर लोग इनकी जाँच-पड़ताल नहीं करते और इन्हे सही मान लेते है। क्योंकि इन्हे फैलाने वाले व्यक्ति भी अनजाने में ही ऐसा करते है। वह ये सोचकर ही जानकारी आपको प्रदान करते है की इसमें आपकी भलाई होगी, पर ऐसा होता नहीं है।</p>



<p>इनके प्रचलित होने की एक अन्य वजह यह भी है की लोग ऐसी बातों से डरते है। क्योंकि यह तथ्य उनके दिमाग में जगह बना लेते है। और इन तथ्यों से सम्बंधित कोई घटना होने पर वह उसे रोकने के लिए यह जानकारी दूसरों को प्रदान करते है। कभी-कभी आधी अधूरी जानकारी को पूरा करने और इसे रोचक बनाने के लिए भी लोग अपनी तरफ से कुछ अतिरिक्त तथ्य इनमें जोड़ देते है जो की पूरी तरह मिथक होता है।</p>



<h2 id="heading4">भाषा विकार से जुड़े मिथक कौन से है?</h2>



<p>अब आप यह तो जान ही गए होंगे की भाषा विकार क्या है और इस से जुड़े मिथक क्यों समाज का हिस्सा बन गए है? तो चलिए अब आपको बताते है की बोलने में समस्या से जुड़े यह तथ्य कौन से है? साथ ही यह भी जानेंगे की इनमें क्या मिथक है और क्या वास्तविक सच?</p>



<p><strong>यह सभी प्रचलित तथ्य और उनकी सच्चाई निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading4.1">1. इस उम्र में बच्चों के साथ यह होता ही है?</h3>



<p><strong>मिथक :</strong> अक्सर माता-पिता यह सोचते हैं कि बहुत से बच्चे <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">हकलाते या तुतलाते</a> है। अथवा बच्चा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">शब्दों का उच्चारण ठीक से नहीं करता</a> है, तो यह सामान्य है। इसलिए आम धारणा यह है कि यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अपने आप दूर होती जाएगी।</p>



<p><strong>सच्चाई :</strong> हालाँकि ऐसा नहीं है कि यह नहीं हो सकता है। कई बच्चे हकलाना बंद कर सकते है, और उसकी भाषा भी स्पष्ट हो जाती है। लेकिन समय के भरोसे बैठने की जगह किसी चिकित्सक से परामर्श करना उचित है। क्योंकि यदि विकार स्थायी है तो चिकित्सा व अभ्यास शुरू करने में देर नहीं होनी चाहिए। क्योंकि भाषा विकास में देरी होने से बच्चे के पढ़ने और लिखने की योग्यता पर भी विपरीत असर होगा जो बच्चे के सम्पूर्ण विकास और भविष्य को प्रभावित करेगा।</p>



<h3 id="heading4.2">2. बच्चा जाँच-परिक्षण से गुजरने के लिए बहुत छोटा है?</h3>



<p><strong>मिथक :</strong> अक्सर बहुत से माता-पिता यह सोचते हैं कि उनका बच्चा अभी बहुत छोटा है इसलिए उन्हें किसी चिकित्सीय जाँच-परीक्षण के लिए भेजना जल्दबाजी होगी। और उन्हें बच्चे के थोड़े बड़े होने या सही उम्र का इन्तजार करना चाहिए।</p>



<p><strong>सच्चाई :</strong>  हालाँकि ये मान्यताएं बिलकुल अवैज्ञानिक और गलत हैं। क्योंकि बहुत से अस्पतालों में <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चों-में-श्रवण-हानि/">बच्चों में श्रवण हानि</a> और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/जन्मजात-बहरापन/">जन्मजात बहरापन</a> रोकने के लिए <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरापन-और-श्रवण-हानि/">श्रवण हानि</a> परीक्षण किये जाते हैं। जबकि वे बच्चे सिर्फ कुछ दिन के होते हैं। इसलिए भाषा विकार की जाँच में देरी नहीं करनी चाहिए। यह स्पीच थेरेपिस्ट नवजात शिशुओं की जाँच के लिए प्रशिक्षित होते हैं। वह बच्चों में भाषा विकारों की जांच करते हैं और बच्चे को उचित चिकित्सीय देखभाल और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बहरेपन-के-लिए-टीकाकरण/">टीकाकरण द्वारा</a> लाभ प्रदान करते है।</p>



<h3 id="heading4.3">3. लड़कियों की तुलना में लड़के देरी से बोलते हैं?</h3>



<p><strong>मिथक :</strong> अक्सर लोग यह मानते है की लड़कियों की तुलना में लड़के बहुत बाद में शब्दों को बोलना शुरू करते हैं, भले भी वह सामान उम्र के हों।</p>



<p><strong>सच्चाई :</strong> हालाँकि आप मानो या न मानो, पर यह एक सच है। यह एक बहुचर्चित तथ्य है कि लड़कियां लड़कों के बोलना शुरू करने से पहले ही बोलने लगती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बोलने का परीक्षण करने में देरी करनी चाहिए। हालांकि, एक तथ्य यह भी है कि चूंकि लड़कियां पहले परिपक्व होती हैं। इसलिए वे लड़कों की तुलना में तेजी से अन्य कौशल भी हासिल करती हैं।</p>



<p>परन्तु यदि माता-पिता को यह लगता है कि उनके लड़के के बोलना शुरू करने में कुछ देरी हो रही है। तो उन्हें समान उम्र के लड़कों से तुलना करनी चाहिए। ऐसे दूसरे लड़कों के बोलने के कौशल की तुलना करने पर जिन्होंने बोलना शुरू किया है, बच्चे के माता पिता को मदद मिलेगी। जिसके आधार पर यह स्पष्ट हो जायेगा की यह सामान्य है या बच्चा वास्तव में इस समस्या से ग्रस्त है। </p>



<h3 id="heading4.4">4. बच्चा बोल नहीं रहा है तो वह ज़िद्दी या आलसी हैं?</h3>



<p><strong>मिथक :</strong> कई बार बच्चों के माता-पिता का यह मानना होता है कि बच्चे के भाषा कौशल के विकास में देरी इसलिए होती है क्योंकि बच्चा जिद्दी या आलसी है और इसलिए वह ज्यादा बात नहीं करता है।</p>



<p><strong>सच्चाई :</strong> यह बहुत सामान्य सी बात है कि कोई बच्चा अपनी उम्र के समूह के अन्य बच्चों की भाषा स्पष्ट होने के बाद भी अपनी बच्चे जैसी बोली में बोलना जारी रखता है। इसलिए माता-पिता को लगता है कि उनका बच्चा जिद्दी या आलसी है। यदि बच्चा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">शब्द का गलत उच्चारण</a> करते हैं। तो यह बच्चे जिद्दी या आलसी नहीं है। बल्कि संभावना यह है कि बच्चे को चिकित्सकीय रूप से &#8220;<a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्वरतंत्र-में-सूजन/">स्वर संबंधी विकार</a>&#8221; हो सकता है इसकी पुष्टि के लिए बच्चे को ध्यान से देखें या चिकित्सक से परामर्श करें।</p>



<h3 id="heading4.5">5. बच्चे का स्कूल जाना शुरू करने तक इंतजार करना चाहिए?</h3>



<p><strong>मिथक :</strong> कभी कभी कुछ माता-पिता वाक् चिकित्सक के पास जाने में देरी करते हैं। और यह उम्मीद करते हैं, कि जब उनका बच्चा स्कूल में शामिल हो जायेगा तो उसके बाद बोलना शुरू कर देगा।</p>



<p><strong>सच्चाई :</strong> ऐसे माता-पिता को जल्दी से जल्दी चिकित्सक या स्पीच थेरेपिस्ट से परामर्श करना चाहिए। क्योंकि ऐसे बच्चों की <a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्पीच-थेरेपी/">स्पीच थेरेपी</a> शुरू करने में देरी होने से यह बच्चे के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। यदि बच्चे में वाक् विकार या स्पीच डिसऑर्डर है, तो बच्चे को स्पीच थेरेपी की गतिविधियों में देरी से शामिल होने पर पढ़ने और लिखने की क्षमता विकसित करने में भी देरी होगी।</p>



<p>और यह देरी बच्चे की शिक्षा और अच्छे रोजगार प्राप्त करने की संभावना को भी विपरीत रूप से प्रभावित करेगा। क्योंकि <a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्पीच-थेरेपी/">स्पीच थेरेपी</a> के अंतर्गत भाषा कौशल विकसित करने के अभ्यास शुरू करने में जितनी अधिक देरी होगी, बच्चे को भी वापस सामान्य स्थिति में लाने में चिकित्सक को उतना ही अधिक समय भी लगेगा।</p>



<h3 id="heading4.6">6. मानसिक रूप से मंद बच्चों में भाषण विकार सामान्य है?</h3>



<p><strong>मिथक :</strong> यह एक बेहद आम धारणा है कि मानसिक रूप से मंद बच्चों में वाणी विकार भी होता ही है। हालाँकि यह सबसे अधिक प्रचलित धारणा है जो की पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।</p>



<p><strong>सच्चाई :</strong> यह धरना बिलकुल ही गलत है यह जरुरी नहीं की मंदबुद्धि बालक भाषा बोल नहीं सकते है। और तो और अगर बच्चे को अन्य समस्याएं भी हैं, तो भी यह आवश्यक नहीं है कि यह समस्याएं उनकी भाषा को भी प्रभावित करेगी। क्योंकि यह एक ज्ञात तथ्य है कि कम बुद्धि वाले बच्चों में असाधारण संवाद शक्ति और विदेशी भाषा बोलने तक के कौशल होते हैं।</p>



<p>यह स्थिति चिकित्सकीय सन्दर्भ में &#8220;चैटबॉक्स सिंड्रोम&#8221; के रूप में जानी जाती है। और ऐसे बच्चे को खुद को व्यक्त करने के लिए स्पीच लैंग्वेज पैथोलोजिस्ट द्वारा बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जा सकता है। भले ही वे मानसिक रूप से मंद होते हैं फिर भी वह बेहतर प्रदर्शन करते है।</p>



<h2 id="heading5">भाषा विकार से जुड़े मिथक कैसे रोकें?</h2>



<p>इस प्रकार के मिथकों को रोकने के लिए यह बेहद जरूरी है की आप तुरंत इन पर भरोसा न करें। अपनी समझ-बूझ से काम लें और इन सभी प्रचलित तथ्यों का एक ही बार में समर्थन न करें। साथ ही इन्हे किसी अन्य व्यक्ति को बताने से पहले इनकी सत्यता की जाँच अवश्य कर लें। जिससे सिर्फ सही जानकारी लोगों तक पहुंचे। और कोई ग़लतफहमी लोगों और उनके मासूम बच्चों को अपना शिकार न बनाये।</p>



<p>किसी तथ्य की सत्यता की जांच करने का सबसे अच्छा तरीका है की आप किसी विशेषज्ञ अथवा स्पीच थेरपिस्ट से इस तथ्य की चर्चा करें। क्योंकि एक पेशेवर चिकित्सक ही सही तथ्यों को आपके सामने लाकर गलतफहमियों को दूर कर सकता है। क्योंकि यह बेहद जरूरी है की समाज में फैली इन भ्रांतियों को दूर किया जाये। जिससे बच्चों को कोई भाषा विकार होने पर उचित समय पर उनका इलाज किया जा सकें।</p>



<h2 id="heading6">बच्चों की उम्र अनुसार भाषा विकास</h2>



<p>बच्चे अपनी उम्र के एक सामान्य चरण पर पहुँच कर बोलचाल के कुछ विशेष व्यवहार प्रदर्शित करते है। हमारे द्वारा प्रदर्शित तथ्य बच्चों के अनुमानित भाषा विकास के चरणों को व्यक्त करते है। और आपको यह जानने में मदद करते है की बच्चा सही क्रम में अपनी भाषा का विकास कर रहा है या नहीं? इससे माता-पिता को यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि बच्चे को किसी चिकित्सीय जाँच की आवस्यकता है या नहीं?</p>



<h4><strong>उम्र अनुसार भाषा विकास के तथ्य निम्नलिखित है &#8211;</strong></h4>



<ul><li><strong>जन्म के समय :</strong> बच्चे का रोना आम है इसमें मैटरनिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर आवश्यक जांच करेंगे और प्रीनेटल हियरिंग चेक पर जोर देते हैं।</li><li><strong>2 से 3 महीने </strong>: इसमें बच्चे का रोना अलग होता है, और बच्चा माता-पिता की बात के जवाब में कुछ मनभावन आवाज भी निकालता है।</li><li><strong>3 से 4 महीने :</strong> बच्चा लगातार बोलने की कोशिश करता है। जिससे लगता है, कि वह अपने आप से बात कर रहे हैं।</li><li><strong>5 से 6 महीने :</strong> ऐसे बच्चों की आवाज़ थोड़ी लयबद्ध हो जाती है। और वे शब्दों को बोलने की कोशिश करते है।</li><li><strong>6 से 10 महीने :</strong> इस उम्र के बच्चे प्रश्नों के उत्तर में कुछ प्रतिक्रिया भी करते हैं। जैसे कि उत्तर देते समय चेहरे के भाव प्रदर्शित करते हैं।</li><li><strong>11 से 12 महीने :</strong> इस उम्र में बच्चे शब्दों में &#8220;मा&#8221;, &#8220;पा&#8221; जैसे नामों को पहचानना शुरू करता है। कुछ शब्दों को दोहराते भी है।</li><li><strong>13 से 18 महीने :</strong> इस उम्र में बच्चा लगभग 25 शब्दों का उपयोग करता है। और अधिक नाम सीखता है, साथ ही कुछ सरल निर्देशों का पालन भी करता है।</li></ul>



<p>यह जरुरी है की माता-पिता को प्रचलित मिथकों और मान्यताओं से अधिक किसी पेशेवर चिकित्सक पर भरोसा करना चाहिए। पुराने समय में प्रचलित घरेलू उपचार भले ही पूरी तरह से गलत न भी हों। लेकिन चिकित्सा विज्ञान विकास का एक लंबा सफर तय कर चुका है। और नई तकनीकें और स्पीच थेरेपी तकनीक बेहतर हैं और बच्चे को जल्दी सामान्य बनाने में मदद करती हैं।</p>



<h2 id="heading7">स्पीच थेरेपी से बोलने में लाभ</h2>



<p>सभी माता-पिता आमतौर पर अपने बच्चों के प्रति सुरक्षात्मक होते हैं। और सामाज में अपने बच्चों की बदनामी होने से बचाने के कारण किसी भाषा चिकित्सक का सहयोग लेने का फैसला नहीं कर पाते हैं। हालाँकि अब इंटरनेट के आने और डॉक्टरों के ऑनलाइन परामर्श देने जैसी सुविधाओं ने यह संभव कर दिया है कि माता पिता को बच्चों के लिए <a href="https://www.hearingsol.com/hi/स्पीच-थेरेपी/">स्पीच थेरेपी</a> क्लिनिक में आए बिना आराम से घर पर ही चिकित्सा और सुविधाएँ प्रदान की जा सकती है।</p>



<p>स्पीच थेरेपी द्वारा बच्चों को <a href="https://www.hearingsol.com/hi/डिसरथ्रिया-बोलने-में-दोष/">बोलने में कठिनाई</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/लिस्पिंग/">शब्दों के उच्चारण में समस्या</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/अफेजिया-बोली-बंद-होना/">बोली बंद होना</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/मौखिक-अप्रेक्सिया/">मौखिक अप्रेक्सिया</a>, ध्यान अभाव अतिसक्रियता विकार, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ऑटिज्म-स्वलीनता/">ऑटिज्म</a>, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/हकलाने-का-डॉक्टर/">हकलाना और तुतलाना</a> जैसी कई प्रकार की भाषा सम्बन्धी समस्याओं में लाभ प्रदान किया जा सकता है। इसके लिए चिकित्सक बच्चे की सम्पूर्ण जाँच करके, चिकित्सा की उचित पद्धतियों का इस्तेमाल करता है। जिससे बच्चा अन्य बच्चों की तरह ही सामान्य रूप से बोलने, पढ़ने, और लिखने में सक्षम हो जाता है।</p>



<h2 id="heading8">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>पूरी दुनिया भर के सभी समुदायों की अपनी-अपनी मान्यताएं होती हैं। यह मान्यताएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक निरंतर कई वर्षों से चली आ रही हैं। हालाँकि यह कुछ समाजों में बहुत अधिक प्रचलित है। जहां कुछ विषयों पर स्वतंत्र रूप से चर्चा नहीं की जा सकती है, और जहाँ शिक्षा का स्तर भी कम है। ऐसे में इन बच्चों में भाषण संबंधी विकार होना आम हैं। क्योंकि यहाँ माँ से बेटी को इन तथ्यों लिए सुझाव दिए जाते हैं।</p>



<p>जिनमें कुछ तो वैज्ञानिक रूप से सिद्ध होते हैं। लेकिन कुछ तथ्य सिर्फ गलतफहमी ही पैदा करते हैं। और यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक हैं। इसलिए माता-पिता को जागरूक बनना चाहिए जिससे वे लक्षणों का जल्दी पता लगा सकें। और सही समय पर स्पीच थेरेपिस्ट से परामर्श कर सकें जिससे बच्चों के लिए स्पीच थेरेपी जल्दी शुरू हो सकें।</p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p><em>अगर आप बोलने संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर भाषा विकार के सम्बन्ध में अधिक जानकारी चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।</em></p></blockquote>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95/">भाषा विकार से जुड़े मिथक &#8211; जानिए इनका वास्तविक सच</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a5%9c%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%95/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एडीएचडी (ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार) &#8211; जानिए लक्षण, कारण और निवारण</title>
		<link>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%8f%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%9a%e0%a4%a1%e0%a5%80/</link>
					<comments>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%8f%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%9a%e0%a4%a1%e0%a5%80/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[hearing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Aug 2019 12:45:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.hearingsol.com/hi/?p=3617</guid>

					<description><![CDATA[<p>क्या आपका बच्चा भी पढाई पर और कुछ सीखने पर ध्यान नहीं देता है? और वह खेलकूद व अन्य कामों में जरुरत से ज्यादा सक्रीय है? यदि आपका उत्तर हाँ में है? तो हो सकता है की आपका बच्चा भी एडीएचडी से ग्रस्त हो? यह एक मानसिक विकार है जो तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी से ... <a title="एडीएचडी (ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार) &#8211; जानिए लक्षण, कारण और निवारण" class="read-more" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%8f%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%9a%e0%a4%a1%e0%a5%80/" aria-label="More on एडीएचडी (ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार) &#8211; जानिए लक्षण, कारण और निवारण">Read more</a></p>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%8f%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%9a%e0%a4%a1%e0%a5%80/">एडीएचडी (ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार) &#8211; जानिए लक्षण, कारण और निवारण</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>क्या आपका बच्चा भी पढाई पर और कुछ सीखने पर ध्यान नहीं देता है? और वह खेलकूद व अन्य कामों में जरुरत से ज्यादा सक्रीय है? यदि आपका उत्तर हाँ में है? तो हो सकता है की आपका बच्चा भी एडीएचडी से ग्रस्त हो? </p>



<p>यह एक मानसिक विकार है जो तंत्रिका तंत्र की गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। वर्तमान समय में लाखो बच्चे इससे पीड़ित है। यह एक लम्बे समय तक चलने वाली अवस्था है, जो बच्चों में बोलने, सीखने, ध्यान देने, और उनके व्यवहार पर विपरीत असर डालती है।</p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p><em>अगर आप बोलने संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर</em> एडीएचडी के  <em>सम्बन्ध में अधिक जानकारी&nbsp;चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।</em></p></blockquote>



<p>तो आइये अब बात करते है की ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार (एडीएचडी) क्या है? यह किस प्रकार से बच्चों को तकलीफ प्रदान करती है? साथ ही इसके निवारण के उपाय और सुझाव भी जानिए।</p>



<div class="toc">
<h2>इस लेख में हम चर्चा करेंगे :</h2>
<ul>
<li><a href="#heading1">1. एडीएचडी क्या है?</a></li>
<li><a href="#heading2">2. एडीएचडी के प्रकार</a>
<ul>
<li><a href="#heading2.1">2.1. ध्यानभाव (इनटेन्टिव)</a></li>
<li><a href="#heading2.2">2.2. अतिसक्रिय (हाइपरएक्टिव)</a></li>
<li><a href="#heading2.3">2.3. आवेगी (इम्पल्सिव)</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading3">3. एडीएचडी के लक्षण</a></li>
<li><a href="#heading4">4. एडीएचडी के कारण</a></li>
<li><a href="#heading5">5. एडीएचडी से जटिलताएं</a></li>
<li><a href="#heading6">6. एडीएचडी की जाँच परिक्षण</a></li>
<li><a href="#heading7">7. एडीएचडी का इलाज</a>
<ul>
<li><a href="#heading7.1">7.1. दवाओं का प्रयोग</a></li>
<li><a href="#heading7.2">7.2. चिकित्सा पद्धति</a></li>
<li><a href="#heading7.3">7.3. शिक्षा और अभ्यास</a></li>
<li><a href="#heading7.4">7.4. स्कूल आधारित कार्यक्रम</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading8">8. रोकथाम व अन्य उपाय</a></li>
<li><a href="#heading9">9. पीड़ित व्यक्ति की सहायता</a>
<ul>
<li><a href="#heading9.1">9.1. बच्चों के लिए सुझाव</a></li>
<li><a href="#heading9.2">9.2. वयस्कों के लिए सुझाव</a></li>
</ul>
</li>
<li><a href="#heading10">10. निष्कर्ष व परिणाम</a></li>
</ul>
</div>



<h2 id="heading1">एडीएचडी क्या है?</h2>



<p>एडीएचडी बच्चों में बहुत अधिक पाया जाने वाला एक मानसिक विकलांगता का प्रकार है। और यह पीड़ित व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र सम्बन्धी गड़बड़ी से सम्बन्ध रखता है। जिसमें बच्चा अपने अतिसक्रिय और आवेगी व्यवहार को नियंत्रित नहीं कर पाता है। उसे एक जगह पर टिक कर बैठने या गंभीरता से कोई काम करने में बहुत परेशानी होती है। हालाँकि लड़कियों के मुकाबले लड़कों में यह यह समस्या अधिक पायी जाती है। </p>



<p>ऐसे बच्चे आवस्यकता से अधिक चंचल और गतिविधियां करने वाले होते है। वह लगातार बदलते विचारों के परिणाम स्वरुप रोजमर्रा के कार्यों में भी ठीक से अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते है, और बहुत जल्दी हतोत्साहित, परेशान, या ऊब जाते है। हालाँकि यह बचपन में शुरू होता है। फिर भी इसे बचपन के सामान्य विकारो की श्रेणी में नहीं रखा जाता है, क्योंकि यह किशोरावस्था तक जारी रहता है।</p>



<h4><strong>कौन से बच्चे ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार से ग्रस्त नहीं कहलाते है?</strong></h4>



<p>यदि बच्चा गुस्सैल, बातूनी, खेल-खेल में झगड़ा करने वाला, और सीखने से मन चुराता है। परन्तु इन सभी के बाबजूद, यदि बच्चा अपने रोजमर्रा के काम और पढाई-लिखाई कर रहा है? तो वह एडीएचडी से ग्रस्त नहीं कहलायेगा। क्योंकि सामान्य बच्चे भी ऐसा व्यवहार करते है, पर एडीएचडी से ग्रस्त बच्चे का खुद पर नियंत्रण नहीं रहता है। उसका यह व्यवहार उसे स्कूल में, घर पर, और दोस्तों के साथ बहुत सी कठिनाइयों का सामना करवाता है।</p>



<h2 id="heading2">एडीएचडी के प्रकार</h2>



<p>ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार (एडीएचडी) मस्तिष्क में उत्पन्न समस्या के कारण होता है जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति अपने सामान्य व्यवहार पर अपना नियंत्रण खो देता है और उसमें असावधानी, सक्रियता, आवेग जैसी क्रियाएं देखने को मिलती है। </p>



<p><strong>इसलिये एडीएचडी को निम्नलिखित प्रकारों में व्यक्त किया जा सकता है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading2.1">1. ध्यानभाव (इनटेन्टिव)</h3>



<p>इस प्रकार से ग्रस्त एक व्यक्ति आसानी से अपने कार्य से भटक जाता है। उसमें लग्न और दृढ़ता का अभाव होता है। वह अपना <a href="https://www.hearingsol.com/hi/ऑटिज्म-स्वलीनता/">ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई</a> अनुभव करता है, और वह अव्यवस्थित भी होता है। हालाँकि यह समस्याएं समझ की कमी के कारण नहीं होती हैं। </p>



<p>साथ ही इनमें बातो पर ध्यान न देना, जरुरी तथ्यों को नजर अंदाज करना, कार्य शुरू करना पर उसे पूरा न कर पाना, दिन में सपने देखना और समय नष्ट करना शामिल है। ऐसे बच्चे कम दिमाग के और भुलक्कड़ लग सकते है, और अपनी चीजों का ध्यान नहीं रखते है।</p>



<h3 id="heading2.2">2. अतिसक्रिय (हाइपरएक्टिव)</h3>



<p>इससे पीड़ित व्यक्ति लगातार कुछ न कुछ करता ही रहता है। वह शांत और गंभीर हो कर नहीं रह सकता है। हालाँकि कुछ स्थितियों में लगातार बात करना या ऐसा व्यवहार करना अच्छा नहीं होता है। पर यह एडीएचडी से पीड़ित व्यक्ति के लिए अपनी बैचनी को जाहिर करने या बाहर निकालने में सहायता प्रदान करता है। चूँकि ऐसे बच्चे जरुरत के समय शांत, एक जगह नहीं बैठ सकते है और लापरवाही या गलतियां करते रहते है और ऐसे काम करते है जिससे दूसरों को परेशानी होती है।</p>



<h3 id="heading2.3">3. आवेगी (इम्पल्सिव)</h3>



<p>इस प्रकार से पीड़ित व्यक्ति खुद को साबित करने या अव्वल आने के लिए परिणामो की परवाह किये बिना जल्दबाजी में कोई भी काम कर सकता है। भले ही बाद में उस काम के परिणाम दूसरों के लिए भयानक साबित हों। एक आवेगी व्यक्ति किसी भी प्रकार के दीर्घकालिक परिणामो की कोई चिंता किये बिना ही महत्वपूर्ण निर्णय खुद ले सकता है। और दूसरों के काम में दखलंदाजी या बाधा उत्पन्न कर सकता है। क्योंकि वे दूसरों से इजाजत लेना या इंतज़ार करना पसंद नहीं करते है।</p>



<h2 id="heading3">एडीएचडी के लक्षण</h2>



<p>एडीएचडी से पीड़ित व्यक्ति अथवा किसी बच्चे में इसके तीनो प्रकार ध्यानभाव, अतिसक्रियता, और आवेग   में से किसी भी एक प्रकार से जुड़े लक्षण प्रदर्शित हो सकते है। अथवा उसमें इन तीनो प्रकारों के सम्मिलित लक्षण भी पाए जा सकते है। ज्यादातर बच्चों में इनके मिश्रित प्रकार के मिले जुले लक्षण पाए जाते है। इसलिए इन सभी लक्षणों को प्रकारों के अनुसार निम्नलिखित श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है &#8211;</p>



<h4><strong>ध्यानाभाव (असावधानी) से ग्रस्त बच्चे में लक्षण &#8211;</strong></h4>



<ul><li>किसी कार्य को करने के बीच में आसानी से ध्यान भटक जाना</li><li>कार्य को पूरा करने के लिए जरुरी निर्देशों का पालन न करना</li><li>दूसरों की बात पर ध्यान न देना, नजरअंदाज या अनसुनी करना</li><li>ध्यान से काम न करना, लापरवाही और गलतियां करना</li><li>रोजमर्रा के कामो को करना भूल जाना, काम याद न रहना</li><li>अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित व पूरा करने में परेशानी होना</li><li>गंभीरता से या ध्यान लगाकर किये जाने वाले काम पसंद न करना</li><li>दिन में सपने देखते रहना और अपनी चीजों का ध्यान न रखना</li></ul>



<h4><strong>अतिसक्रीयता से ग्रस्त बच्चे में लक्षण &#8211;</strong></h4>



<ul><li>किसी एक जगह पर शांत होकर न बैठ पाना</li><li>कुछ फुसफुसाते रहना या उछलकूद करना</li><li>इनमे अत्यधिक चंचल स्वभाव का होना</li><li>चुपचाप किसी खेल को खलने में दिक्कत</li><li>अधीर स्वाभाव के होना, कुछ न कुछ करना</li><li>हमेशा दौड़ते भागते रहना या कूदते रहना</li><li>जरुरत से ज्यादा बाते करने वाले होना</li><li>ऐसा प्रतीत होना की इनमें मशीन लगी हो</li></ul>



<h4><strong>आवेगी व्यवहार से ग्रस्त बच्चे में लक्षण &#8211;</strong></h4>



<ul><li>अपनी बारी आने का इंतज़ार न कर पाना</li><li>प्रश्न पूरा होने से पहले उसका उत्तर देना</li><li>दूसरों को लगातार परेशान करते रहना</li><li>अनुमति लिए बिना कोई भी काम करना</li><li>जो उनकी नहीं है वह चीजें रख लेना</li><li>बिना सोचे गंभीर खतरे मोल ले लेना</li><li>पकडे जाने पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देना</li></ul>



<h4><strong>किशोरों में पाए जाने वाले लक्षण &#8211;</strong></h4>



<ul><li>बचपन की चंचलता होना</li><li>कमजोर याददाश्त होना</li><li>अनावस्यक चिंता करना</li><li>कम आत्मसम्मान होना</li><li>किस काम में परेशानी होना</li><li>गुस्से पर नियंत्रण न होना</li><li>आवेगपूर्ण व्यवहार होना</li><li>नशीले पदार्थों की लत होना</li><li>अव्यवस्थित व टालमटोलू होना </li><li>आसानी से निराश या बोर होना</li><li>ध्यान केंद्रित न कर पाना</li><li>मानसिकता में बदलाब होना</li><li>रिश्तों में समस्या होना</li></ul>



<h2 id="heading4">एडीएचडी के कारण</h2>



<p>ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार या एडीएचडी के होने का कोई ठोस कारण शोधकर्ताओं द्वारा अभी तक ज्ञात नहीं किया गया है। पर शोधकर्ताओं का मानना है की यह बहुत से प्रकार के जोखिमों के कारण हो सकता है। हालाँकि यह अत्यधिक चीनी खाने, बहुत अधिक टीवी देखने, एक अव्यवस्थित जीवनशैली जीने, किसी बेकार स्कूल में पढ़ने, या खाद्य पदार्थों से <a href="https://www.hearingsol.com/hi/गर्मी-के-मौसम-में-एलर्जी/">एलर्जी होने</a> से नहीं होता है। यह सभी कारण सिर्फ भ्रांतियां  (ग़लतफहमी) और मनगढंत बाते है।</p>



<p><strong>एडीएचडी से ग्रस्त होने की संभावनाएं और जोखिम निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<ul><li><strong>आनुवंशिक दोष :</strong> एडीएचडी विकार परिवारों के इतिहास में अनुवांशिक रूप में प्राप्त किया जाता है।</li><li><strong>रासायनिक असंतुलन :</strong> एडीएचडी पीड़ितों के मस्तिष्क में उत्पन्न रसायन असंतुलित हो सकते हैं।</li><li><strong>मस्तिष्क परिवर्तन :</strong> दिमाग के ध्यान नियंत्रक हिस्से एडीएचडी ग्रस्त बच्चों में कम सक्रिय होते हैं।</li><li><strong>गर्भावस्था के दौरान :</strong> खराब <a href="https://www.hearingsol.com/hi/कान-का-पोषण-व-खाद्य-पदार्थ/">पोषण</a>, संक्रमण, <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चे-की-सुनने-की-शक्ति/">धूम्रपान</a>, शराब आदि का सेवन बच्चे के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकती हैं।</li><li><strong>विषाक्त पदार्थ :</strong> जहरीले तत्व जैसे सीसा, बच्चे के दिमाग के विकास को कुप्रभावित कर सकते हैं।</li><li><strong>मस्तिष्क विकार या चोट :</strong> दिमाग के सामने की ओर (ललाट लोब) क्षति से आवेगों और भावनाओं को नियंत्रित करने में समस्या हो सकती है।</li><li><strong>जन्म के समय :</strong> समय से पहले जन्म होना या <a href="https://www.hearingsol.com/hi/जन्मजात-बहरापन/">जन्म के समय</a> वजन कम होना भी एक कारक है।</li><li><strong>मनोवैज्ञानिक दोष :</strong> भावनात्मक उपेक्षा या पारिवारिक हिंसा का बुरा असर भी बच्चे पर पड़ता है।</li></ul>



<h2 id="heading5">एडीएचडी से जटिलताएं</h2>



<p>ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार से पीड़ित बच्चों को उनकी गतिविधियों और व्यवहार के कारण अक्सर अलग नजरिये से देखा जाता है। जो लोग इस विकार को नहीं समझते है वह सोचते है की बच्चा सिर्फ ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसी हरकते कर रहा है। इस कारण उनसे रोषपूर्ण व्यवहार किया जा सकता है। और स्कूल व दोस्तों के बीच भी यही हाल होता है जो उनका जीवन कठिन बना देता है।</p>



<p><strong>इसके अतिरिक्त बच्चों को निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ता है &#8211;</strong></p>



<ul><li>कक्षा में और पढाई के प्रति संघर्ष करना</li><li>पढाई में मन न लगना, मानसिक दबाव</li><li>चोटों और दुर्घटनाओं के प्रति संवेदनशील</li><li>आत्म सम्मान में कमी और हीनभावना</li><li>लोगों से जुड़ने और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/डिसरथ्रिया-बोलने-में-दोष/">बोलने में कठिनाई</a></li><li>मादक पदार्थ और नशीली दवाओं की लत</li><li>एक आपराधिक व्यवहार प्रदर्शित करना</li></ul>



<h2 id="heading6">एडीएचडी की जाँच परिक्षण</h2>



<p>एडीएचडी पीड़ित बच्चे या किशोर में लक्षणों की पुष्टि करने और यह सुनिश्चित करने के लिए, की इन लक्षणों की वजह कुछ और तो नहीं है? एक चिकित्सक बच्चे के दृष्टि और <a href="https://www.hearingsol.com/hi/सुनने-की-क्षमता/">सुनने की क्षमता</a> तथा <a href="https://www.hearingsol.com/hi/बच्चों-में-श्रवण-हानि/">श्रवणहानि</a> का परिक्षण करता है। और आवस्यकता पड़ने पर वह बच्चे को किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास ले जाने की सलाह भी दे सकता है।</p>



<p>एडीएचडी का निदान करने के लिए, डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य, व्यवहार और गतिविधि के बारे में कुछ प्रश्न पूछकर शुरुआत करते हैं। चिकित्सक माता-पिता और बच्चों से उन चीजों या तथ्यों के बारे में बात करते हैं जिन्हें उन्होंने देखा है। आपका डॉक्टर आपके बच्चे के व्यवहार के बारे में अधिक जाँच करने के लिए आपको और बच्चे के शिक्षक को एक चेकलिस्ट (प्रश्नोत्तरी) भरने के लिए कह सकता है।</p>



<p><strong>सभी जाँच के अनुसार चिकित्सक निम्नलिखित तथ्यों की पुष्टि करता है &#8211;</strong></p>



<ul><li>बच्चे की सक्रियता या आवेगी व्यवहार सामान उम्र के अन्य बच्चों से अधिक है?</li><li>क्या बच्चे का यह व्यवहार उसके <a href="https://www.hearingsol.com/hi/जन्मजात-बहरापन/">जन्म के समय से</a> ही है?</li><li>बच्चे की सक्रियता और आवेगी व्यवहार उसके स्कूल और परिवार को प्रभावित कर रहा है?</li><li>स्वस्थ सम्बन्धी जाँच यह पुष्टि करती है की लक्षण किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से नहीं है?</li></ul>



<h2 id="heading7">एडीएचडी का इलाज</h2>



<p>एडीएचडी को रोका या पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। पर जितना जल्दी इसका पता चल जाये उतनी ही जल्दी इसके लक्षणों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। और बच्चो और किशोरों को लक्षणों को प्रतिबंधित और नियंत्रित करने में सहायता प्रदान की जा सकती है। इसके लिए कुछ दवाओं,  शिक्षा योजना, और चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से यह कर पाना संभव है।</p>



<p><strong>इसके अंतर्गत आने वाली इलाज प्रक्रियाएं निम्नलिखित है &#8211;</strong></p>



<h3 id="heading7.1">1. दवाओं का प्रयोग</h3>



<p>इस विकार से पीड़ित बहुत से बच्चों और व्यक्तियों में दवाओं के सेवन से लाभ प्राप्त होता है। जिससे उनकी सक्रियता, और आवेगी व्यवहार को नियंत्रित कर ध्यान केंद्रित करने, सीखने और मन लगाकर काम करने की प्रक्रिया में सुधार होता है। हालाँकि इनका असर बच्चों में अलग-अलग होता है इसलिए एक सटीक दवा मिलने तक विभिन्न दवाओं का सेवन करना पड़ सकता है। चिकित्सक बच्चे को निम्नलिखित प्रकार की दवाएं प्रदान करते है &#8211;</p>



<ul><li><strong>उत्तेजक दवाएं :</strong> यह दवा मस्तिष्क के रासायनिक डोपामाइन स्तर को बढ़ाती है। जो सोच और ध्यान में सुधार करती है।</li><li><strong>गैर-उत्तेजक दवा :</strong> यह दवा इलाज में अधिक समय लेती हैं। लेकिन पीड़ित व्यक्ति में ध्यान, सक्रियता और आवेग में सुधार करती हैं।</li><li><strong>अवसादरोधी दवा :</strong> हालाँकि इसे पूरी तरह मान्यता प्राप्त नहीं है फिर भी यह एडीएचडी पीड़ित वयस्कों के इलाज में इस्तेमाल की जा सकती है।</li></ul>



<h3 id="heading7.2">2. चिकित्सा पद्धति</h3>



<p>एडीएचडी के इलाज के लिए विभिन्न प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों द्वारा लक्षणों को समाप्त करने में सफलता नहीं मिलती है। पर रोगियों और परिवार के अन्य सदस्यों को आने वाली दैनिक चुनौतियों से बेहतर ढंग से निपटने में मदद मिल सकती है। </p>



<p><strong>इसलिए इसके अंतर्गत निम्नलिखित चिकित्सा पद्धतियों को शामिल किया जाता है &#8211;</strong></p>



<ul><li><strong>विशेष शिक्षा पद्धति :</strong> यह बच्चे को स्कूल में सीखने में मदद करती है। एक व्यवस्थित दिनचर्या होने से एडीएचडी वाले बच्चों को बहुत मदद मिलती है।</li><li><strong>बिहेवियर थेरेपी :</strong> व्यवहार संशोधन बुरे व्यवहार को अच्छे व्यवहार में बदलने के तरीके सिखाता है।</li><li><strong>मनोचिकित्सा (परामर्श) :</strong> पीड़ित को अपनी भावनाएं व्यक्त करने और आत्मसम्मान बेहतर बनाने में मदद मिलती है। और परिवार के लोगो को एडीएचडी ग्रस्त बच्चे को समझने में मदद मिलती है।</li><li><strong>सामाजिक कौशल प्रशिक्षण :</strong> लोगों से जुड़ने के लिए बच्चे को आवश्यक व्यवहार सिखा सकते हैं।</li></ul>



<h3 id="heading7.3">3. शिक्षा और अभ्यास</h3>



<p>एडीएचडी ग्रस्त बच्चों को अपनी समस्या को नियंत्रित करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए अपने माता-पिता, परिवार, और शिक्षकों के मार्गदर्शन व सहयोग की आवश्यकता होती है। मनोचिकित्सक बच्चे के परिवार को स्थिति के बारे में शिक्षित कर सकते हैं। साथ ही बच्चे और उसके माता-पिता को नए दृष्टिकोण, कौशल और एक-दूसरे से जुड़ने के तरीके विकसित करने में भी मदद कर सकते हैं, इसके अंतर्गत &#8211;</p>



<ul><li><strong>पेरेंटिंग स्किल ट्रेनिंग :</strong> माता-पिता को वह कौशल सिखाता है। जिससे अपने बच्चों के सकारात्मक व्यवहार को पुरस्कार के माध्यम से प्रोत्साहित करना सिखाते हैं।</li><li><strong>तनाव प्रबंधन :</strong> इन प्रकिया से पीड़ित बच्चों के माता-पिता को निराशा को नियंत्रित करने के तरीके सिखाते है। जिससे वह बच्चे के व्यवहार पर शांतिपूर्ण प्रतिक्रिया करें।</li><li><strong>सहायता समूह :</strong> कुछ समूह माता-पिता को अन्य परिवारों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। जो की समान समस्या से ग्रस्त हैं।</li></ul>



<h3 id="heading7.4">4. स्कूल आधारित कार्यक्रम</h3>



<p>कुछ स्कूल बच्चों को स्कूल के पाठ्यक्रम के अंतर्गत चलाये जाने वाले विभिन्न कौशल कार्यक्रमों के द्वारा विशेष रूप से व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की योग्यता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। और शिक्षा विशेषज्ञ बच्चों के माता पिता और शिक्षकों को कक्षा पाठ्यक्रम तथा घर के अभ्यास में आवश्यक परिवर्तन लाने में सहायता करते है। जिससे की बच्चे अपने विकार को और उसके लक्षणों को नियंत्रित कर बेहतर शिक्षा प्राप्त करने में सफल होते है।</p>



<h2 id="heading8">रोकथाम व अन्य उपाय</h2>



<p>ध्यानभाव एवं सक्रीयता विकार किसी भी बच्चे या व्यक्ति को हो सकता है। इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। यह सामन्य तौर पर बच्चे के व्यवहार और शैक्षिक योग्यता पर बुरा असर डालता है। जिससे बच्चा ख़राब व्यवहार और शैक्षिक प्रदर्शन के कारण समाज में पिछडने लगता है। इसलिए यह बेहद जरुरी है की बच्चे की सहायता की जाये। </p>



<p><strong>इसके लिए बच्चे के माता पिता को निम्नलिखित सुझावों पर ध्यान देना चाहिए &#8211;</strong></p>



<ul><li>एडीएचडी के सम्बन्ध में अधिक जानकारी प्राप्त करें जिससे स्थिति की गंभीरता समझने और उससे निपटने में मदद मिल सके।</li><li>इससे पीड़ित बच्चे तनावग्रस्त होते है, इसलिए व्यक्ति पर होने वाले मानसिक तनाव को कम करने में मदद करें।</li><li>बच्चे में सकारात्मक व्यवहार का समर्थन करें, उसे सही प्रोत्साहन दें और आत्मनिर्भर बनने में सहायता प्रदान करें।</li><li>बच्चे पर चिल्लाएं या गुस्सा न करें बल्कि उसे प्यार और सहयोग से फिर एक बार कोशिश करने के लिए हौसला प्रदान करें।</li><li>बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए एक बेहतर दिनचर्या का गठन करें और उसका पालन करने के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करें।</li><li>बच्चे को अपनी व्स्तुओं या चीजों की अहमियत बताएं और उनका सही उपयोग करने के तरीके सीखने में सहायता करें।</li><li>बच्चे को घर के कुछ आसान काम और अपने काम खुद करने दें और उसे आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करें।</li></ul>



<h2 id="heading9">पीड़ित व्यक्ति की सहायता</h2>



<p>माता पिता और शिक्षक को चाहिए की पीड़ित व्यक्ति को अपनी मदद खुद करने के अवसर प्रदान करें। उन्हें दूसरे लोगों के भरोसे रहने की आदात कम करने में सहायता प्रदान करें। जिससे की वह अपने व्यक्तित्व और बेहतर भविष्य का निर्माण खुद करने में सक्षम हो सकें, इसके अंतर्गत &#8211;</p>



<h3 id="heading9.1">1. बच्चों के लिए सुझाव</h3>



<ul><li>एक सटीक दिनचर्या और नियमों का पालन करने दें</li><li>सुबह जागने से रात को सोने तक पूरी दिनचर्या दोहराएं</li><li>स्कूल जाने, अपना होमवर्क करने की आदत डालने दे</li><li>बहार खेलने और घर में जरुरी कामों के लिए समय दें</li><li>किसी दिवार या फ्रिज पर उनके लिए निर्देश लिख दें </li><li>उन्हें प्रतिदिन अपनी वस्तुओं को सहेजने की आदत डालें</li><li>जिस वस्तु को जहाँ से उठाये उसे वही रखना सिखाएं</li><li>बच्चे को अपनी शैक्षिक गतिविधि करने का समय दें</li><li>उन्हें नियमों का पालन करने पर पुरस्कार जरूर दें </li></ul>



<h3 id="heading9.2">2. वयस्कों के लिए सुझाव</h3>



<ul><li>दिनचर्या का पालन करना</li><li>अपने प्रतिदिन के कार्यों की सूची बनाना</li><li>सूचि के अनुसार सभी कार्य समय पर पूरा करना</li><li>कैलेण्डर पर अपने भविष्य की योजनायें चिन्हित करें</li><li>कार्यों को सही समय पर करने के लिए रिमाइंडर लगाएं</li><li>सभी जरुरी चीजों के लिए अलग स्थान निश्चित करें</li><li>बड़े काम को करने के लिए उसे छोटे हिस्सों में विभाजित करें</li></ul>



<h2 id="heading10">निष्कर्ष व परिणाम</h2>



<p>एडीएचडी एक गंभीर विकार है पर कई लोग सही तरीके से इसके उपचार और चिकित्सा पद्धतियों की सहायता से सफल और संपूर्ण जीवन जीते हैं। इस विकार के लक्षणों पर ध्यान देना और डॉक्टर से नियमित जांच करवाना महत्वपूर्ण है। क्योंकि कभी-कभी कोई दवा और उपचार जो बेहतर परिणाम दे रहे थे। अचानक वह काम करना बंद कर देते है। इसलिए आपको उपचार को बदलने की जरुरत भी हो सकती है। इसलिए निरंतर प्रयास करते रहें और बेहतर जीवन का आनंद लें।</p>



<blockquote class="wp-block-quote"><p><em>अगर आप बोलने संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर</em> एडीएचडी के  <em>सम्बन्ध में अधिक जानकारी&nbsp;चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।</em></p></blockquote>
<p>The post <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%8f%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%9a%e0%a4%a1%e0%a5%80/">एडीएचडी (ध्यान आभाव अतिसक्रियता विकार) &#8211; जानिए लक्षण, कारण और निवारण</a> appeared first on <a rel="nofollow" href="https://www.hearingsol.com/hi">HearingSol स्पीच एंड हियरिंग क्लिनिक</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.hearingsol.com/hi/%e0%a4%8f%e0%a4%a1%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%9a%e0%a4%a1%e0%a5%80/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
