डिमेंशिया (मनोभ्रम)

डिमेंशिया या मनोभ्रंश एक प्रकार का मस्तिष्क रोग होता है डिमेंशिया सामान्य रूप से मानसिक क्षमता में आई कमी को कहते हैं, अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं, और सोचते हैं कि यह मुख्यतर याददाश्त की समस्या है.परन्तु  इससे इंसान की सोचने और याद रखने की क्षमता धीरे धीरे कम होती जाती है। और मनोभ्रंश से व्यक्ति के दैनिक कार्य काफी हद तक प्रभाव पड़ता है।

डिमेंशिया का खतरा क्या है?

याददाश्त की कमी के कारण  वे यह तक भी भूल जाते हैं कि वे किस शहर में हैं, या कौनसा, टाइम, साल या महीना चल रहा है। कभी कभी बात करते हुए उन्हें सही शब्द नहीं सूझता। व्यक्ति यहाँ तक अपने बच्चे का नाम तक भी भूल जाता है और गंभीर अवस्था में वह अपना नाम भी भूल जाता है।

अन्य लक्षणों में भावनात्मक समस्याएं, भाषा संबंधी कठिनाइयों, और याददाशत की कमज़ोर शामिल है। डिमेंशिया से ग्रस्त व्यक्ति की हालत समय के साथ बिगड़ती जाती है, और सहायता की जरूरत भी बढ़ती जाती है, और समय के साथ उनको देखभाल करने वालों को आव्य्सक्ता पड़ती हैं डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के मूड व व्यवहार में बदलाव हो जाता है।

सामान्य रूप से यह उम्र बढ़ने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ती जाती है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह वृद्ध लोगो में अधिक होता है.क्युकी जैसे जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है वह मस्तिष्क से कमजोर हो जाता है और मनोभ्रंश होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है।

डिमेंशिया के लक्षण

मनोभ्रंश से पीड़ित व्यक्ति को नई नई जानकारी रखने में काफी परेशानी आती है वो अकसर उन चीज़ो को भी भूल जाते जहाँ उनका रोज का आना जाना होता है यहा ये व्यक्ति खो जाते है इस बीमारी से पीड़ित लोगो को काफी संघर्ष करंना पड़ता है लोगो के नाम और उनको को याद रखने  में| लोग इनको भुलक्कड़ के नाम से भी भूलते है फिर….

कुछ महत्वपूर्ण लक्षण जिनसे पता  लगाया जा सकता है की किसको ये बिमारी है :-

  • शारीरिक व मानसिक संतुलन खो देना 
  • याददाशत का धीरे-धीरे कम होना जिससे ज़रूरी चीज़ें भूल जाना
  • निर्णय नहीं ले पाना (क्षमता कम हो जाने के कारण )
  • समस्याओं में फ़सना, सुलझाने में कठिनाई
  • बहुत अधिक बेचैनी महसूस होना 
  • सवालो को अधिकतर दोहराना
  • कुछ भी समझ नहीं पाना
  • ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आना 
  • रोजाना के कामो को करने में कठिनाई महसूस करना
  • छोटी-छोटी बात पर बौखला जाना (चिड़चिड़ा पन )
  • भ्रम होना 
  • वे वजह की चिंता करना 
  • अनुचित व्यवहार 

डिमेंशिया के प्रकार

डिमेंशिया के सामान्य लक्षण जानकर सिर्फ यही पता लगाया जा सकता है की व्यक्ति डिमेंशिया है। लेकिन डिमेंशिया भी कयी प्रकार के होते है जिससे पता चले की किस व्यक्ति को किस प्रकार का डिमेंशिया है ये कुछ इस प्रकार है।

अल्‍ज़ाइमर डिमेंशिया

  • अल्‍ज़ाइमर, डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण है।
  • 60-80% अल्‍ज़ाइमर डिमेंशिया होता है।
  • यह दिमाग के तंत्र की कोशिकाओं में परिवर्तन से होता है।
  • अल्‍ज़ाइमर समाप्त नहीं होता और न ही इसका कोई इलाज किया जा सकता।
  • इसके लक्षणों में याद्दाश्‍त का खो देना, संभ्रान्ति, आदि ये धीरे-धीरे शुरु होते हैं और वक्त के साथ बिगड़ते जाते हैं।
  • दवा से रोग को धीमा किया जा सकता और लक्षणों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।

वेस्कुलर डिमेंशिया

  • वेस्कुलर डिमेंशिया, जब मस्तिष्‍क में रक्त वाहिनियों में रक्त के रुक जाने से होता है।
  • इसको पोस्टस्ट्रोक भी कहा जाता है।
  • छोटे अवरोधों से दौरा पड़ सकता है जिससे मस्तिष्‍क के छोटे हिस्से नष्‍ट हो सकते हैं। आपको जब यह हो तब पता न चले ऐसा भी हो सकता है।
  • वेस्कुलर डिमेंशिया का इलाज नहीं किया जा सकता और यह समाप्त नहीं होगा।
  • दवाइयों के द्वारा अधिक नुकसान होने से रोका जा सकता है।

पार्किन्सन डिमेंशिया

  • पार्किन्सन एक ऐसी स्थिति है जिसमे मस्तिष्‍क के तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुँचती है।
  • पार्किन्सन डिमेंशिया की बीमारी दिमाग के उस हिस्से में होती है जहाँ मांसपेशियों की गतिविधि को नियंत्रित करता है।
  • पार्किन्सन्स डिमेंशिया का भी कोई इलाज नहीं है, परन्तु इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • पार्किन्सन के चलते कुछ लोग पागल हो सकते हैं।
  • लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवा, फिज़िकलथैरेपी और शल्यक्रिया का प्रयोग किया जा सकता है।

लेवी बॉडीज डिमेंशिया

  • लेवी बॉडीज डिमेंशिया जो कोर्टेक्स में प्रोटीन के एकत्र होने के कारण होता है।
  • लेवी बॉडीज डिमेंशिया  से याददाश्त में कमी और भ्रम, नींद नहीं आना, वहम, आदि हो जाती है।
  • लेवी बॉडीज डिमेंशिया का भी कोई इलाज नहीं है, परन्तु इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • दवाइयों के द्वारा अधिक नुकसान होने से रोका जा सकता है।

मनोभ्रम के कारण

मनोभ्रंश उन लोगों को ज़्यादा प्रभावित करती है, जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक होती है। और जो लोग मोटापा का शिकार होते है, कोलेस्टेरॉल और डायबिटीज़ और उम्र के कारण डिमेन्शिया का ख़तरा बढ़ रहता  है। एक शोध के अनुसार इसके लिए निम्न अनुमानित कारण मुख्य रूप से देखे जाते है जिनको मनोभ्रंश होता हैं।

  • सिर पर चोट लगने से
  • शराब , लत लग जाती है
  • खराब आहार
  • डिहाइड्रेशन
  • दवाई  -यदि व्यक्ति कई प्रकार की ले रहा हो
  • सोने में परेशानी
  • मस्तिष्क में ट्यूमर
  • डायबिटीज़
  • डिप्रेशन

रोग को बहुत जल्दी बढ़ाने वाले कारक निम्नलिखित है

  • हाइ ब्लड प्रेशर
  • डायबिटीज़
  • सिगरेट

 डिमेंशिया की रोकथाम

डिमेंशिया/मनोभ्रंश को रोकने के लिए कोई निश्चित उपचार नहीं है, परन्तु कई ऐसे उपाय हैं, जिनकी सहायता से बचाव कर सकते है जैसे की –

  1. धूम्रपान न करे:- मध्यम आयु में धूम्रपान करने से डिमेंशिया/मनोभ्रंश का खतरा बढ़ सकता है इसलिए धूम्रपान छोड़ने से यह जोखिम कम हो सकता है जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
  2. ब्लड प्रेशर:- उच्च रक्तचाप से डिमेंशिया का जोखिम हो सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने की कोशिश करे।
  3. डिप्रेशन:- डिप्रेशन और स्ट्रेस को भी डिमेंशिया के संभावितजोखिम हो सकता है। इसलिए तनाव से दूर रहना जरुरी हो जाता है।
  4. स्वस्थ आहार:- रोगी के लिए उचित आहार लेना भी काफी जरुरी होता है ताकि डिमेंशिया के लक्षणो को नियंत्रण में रखा जा सके, हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत आनाज, टमाटर, गाजर, सीताफल, चुकुंदर, मूंगफली, बादाम, काजू  आदि को स्वस्थ आहार में शामिल करें. इसके आलावा अलसी के बीज,कनोला तेल, सोयाबीन,सैलमन मछली, फूलगोभी आदि भी ले सकते है. इन सब में ओमेगा 3 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  5. शारीरिक व्यायाम:- नियमित शारीरिक व्यायाम कुछ प्रकार के डिमेंशिया के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। साक्ष्य बताते हैं कि व्यायाम मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन प्रवाह को बढ़ाकर सीधे मस्तिष्क कोशिकाओं को लाभ पहुचाता है।

डिमेंशिया का विशेष उपचार : स्पीच थेरेपी

स्पीच थेरेपी:- स्पीच थेरेपी एक प्रकार की चिकित्सक प्रक्रिया  होती है यह थेरैपी एक उपचार का ही भाग है इसे विज्ञानं चिकित्सक भी कहा जाता है इसका  प्रयोग बच्चों या बड़ों में बोलने की या इससे संबंधित कोई परेशानी होने पर उसका इलाज करने के लिए किया जाता है।

व्यस्क लोगों में भी अगर कोई परेशानियाँ पायी जाती है या किसी दुर्घटना की वजह से ये परेशानी पैदा हो जाती है तो उसमें भी स्पीच थेरेपी मदद कर सकती है। जैसे की  डिमेंशिया। इस स्पीच थेरेपी की सहायता से मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं को मजबूत बनती है। क्योंकि डिमेंशिया बीमारी ऐसी होती है जो मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं अथवा उसमे रक्त का बेहतर संचार नहीं होने से होती है।  

स्पीच थेरेपी की  सहायता से मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं को मजबूत बनती  है कुछ लोगों में स्पीच थेरेपी का अच्छा असर देखने को मिलता है। स्पीच थेरेपी की  सहायता से मजबूत इच्छाशक्ति की जा सकती  हैजिससे डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति  को काफी रहत मिलती है।

निष्कर्ष

डिमेंशिया या मनोभ्रंश सामान्य रूप से मानसिक क्षमता में आई कमी को कहते हैं यह एक घातक बीमारी  है, क्युकी इसमें व्यक्ति अपना संतुलन खो देता है। और वह अपनी याददाश्त भी खो देता है, अकसर लोग डिमेंशिया को सिर्फ एक भूलने की बीमारी के नाम से जानते हैं, और सोचते हैं कि यह मुख्यतर याददाश्त की समस्या है।

परन्तु इससे इंसान की सोचने और याद रखने की क्षमता कम होने लगती है। और मनोभ्रंश से व्यक्ति के दैनिक कार्य काफी हद तक प्रभाव पड़ता है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन आमतौर पर यह वृद्ध लोगो में अधिक होता है.क्युकी जैसे जैसे इंसान की उम्र बढ़ती है वह मस्तिष्क से कमजोर हो जाता है और मनोभ्रंश होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है।

डिमेंशिया की बीमारी दिमाग के उस हिस्से में होती है  जहाँ मांसपेशियों की गतिविधि को नियंत्रित करता है। और इस बीमारी के चलते कुछ लोग पागल भी हो जाते हैं। इस बीमारी का इलाज नहीं किया जा सकता और यह समाप्त नहीं होती। दवाइयों के द्वारा अधिक नुकसान होने से रोका जा सकता है।

स्पीच थेरेपी की  सहायता से मस्तिष्क की कमजोर कोशिकाओं को मजबूत बनती है स्पीच थेरेपी की सहायता से मजबूत इच्छाशक्ति की जा सकती  है जिससे डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति को काफी राहत मिलती है।

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