चक्कर आना (डिज़ीनेस) – जानिए क्या होता है चक्कर आने का रोग?

चक्कर आना (डिज़ीनेस) – जानिए क्या होता है चक्कर आने का रोग?

यदि हमारे आंतरिक कान की श्रवण-तंत्रिका अपना काम करना बंद कर दे, या हमारे गर्दन व रीढ़ की हड्डी में कोई विकार उत्पन्न हो जाये, तब हमें चक्कर आना (डिज़ीनेस) जैसी समस्या हो जाती है। क्योंकि हमारे आंतरिक कान का एक हिस्सा “कोक्लीअ” (कर्णावृत) आवाज सुनने के लिए, और दूसरा हिस्सा “लबीरिंथ” (भूलभुलैया या भंवरजाल), संतुलन के लिए के लिए ज़िम्मेदार होता है।

श्रवण-तंत्रिका (ऑडिटरी नर्व) हमारे मस्तिष्क से जुडी हुई होती है, और बहुत ही नाजुक होती है। अचानक से चक्कर आने पर हमें, सिर का घूमना और शरीर का हल्कापन या असंतुलन महसूस होता है।

अगर आप चक्कर आना संबंधी किसी भी समस्या का समाधान या फिर डिज़ीनेस के सम्बन्ध में अधिक जानकारी चाहते है तो 1800-121-4408 (निःशुल्क ) पर हमसे संपर्क करें।

इस लेख में हम चर्चा करेंगे :

चक्कर आना (डिज़ीनेस) क्या है?

जब अचानक से अपने शरीर पर नियंत्रण खोता हुआ महसूस हो। या फिर आपको आभासीय रूप से गति का एहसास हो, और ऐसा लगे की आप किसी एक ओर गिर रहे। अथवा आपके आसपास की सभी चीजें घूम रही है। यह स्थिति चक्कर आना (डिज़ीनेस) कहलाती है। यह वर्टिगो (सिर घूमना) का ही एक रूप है। हालाँकि यह कोई गंभीर समस्या नहीं, बस एक लक्षण है।

जो आंतरिक कान या गर्दन से जुडी किसी बीमारी का संकेत देता है। क्या आपको पता है की हमारे शरीर का संपूर्ण संतुलन आंतरिक कान, आंखों और संवेदी नसों पर निर्भर करता है? यदि नहीं, तो आपको बता दूँ की हमारे कान में पाए जाने वाले सूक्षम तंतु गुरुत्वाकर्षण में अचानक आये परिवर्तन को तुरंत भांप लेते है। और हमारे दिमाग को यह संकेत भेजते है की हमारे शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है।

हमारा मस्तिष्क तुरंत इस जानकारी को अन्य अंगो (हाथ व पैर) तक भेजता है, और पुनः शरीर को संतुलित करता है, और हम खुद को गिरने से बचाते है। ऐसे कई कान के विकार (रोग) जो की हमारे आंतरिक कान में होते हैं, जिनमें वेस्टिबुलर विकार भी शामिल है। यही मुख्य रूप से चक्कर आने का कारण होते है। 

आमतौर पर ऐसा देखा गया है, की सिर में चक्कर आना अधिकतर 50 प्रतिशत आंतरिक कान की गड़बड़ी के कारण होता हैं। और बाकि 50 प्रतिशत हमारी गर्दन या रीढ़ में उत्पन्न समस्या के कारण होती है।

डिज़ीनेस और वर्टिगो में अंतर क्या है?

यह एक अहम् सवाल है, क्योंकि इन दोनों ही लक्षणों में अंतर करना जरुरी है। हालाँकि यह दोनों ही सामान्य रूप से चक्कर आना कहलाते है। क्योंकि डिज़ीनेस और वर्टिगो दोनों में ही सभी लक्षण सामान होते है। डिज़ीनेस भी वर्टिगो का ही एक लक्षण है, पर दोनों में मुख्य रूप से अंतर होता है। जो इन दोनों को सामान होते हुए भी अलग बनाता है, क्या है वो अंतर? आइये जाने

1. वर्टिगो (Vertigo)

यह समस्या आपके आंतरिक कान से गहरा सम्बन्ध रखती है। क्योंकि किसी प्रकार से आपके आंतरिक कान में समस्या होने पर आपको चक्कर आ सकता है। हमारे कान के आंतरिक भाग में तीन अर्द्धवृत्ताकार नलिका (सेमीसर्कुलर ट्यूब) होती है। जो द्रव से भरी होती है, यह लेबिरिंथ (labyrinth) का भाग होती है।

जब हम अपना सिर हिलाते है, तो यह इन परिवर्तनों की जानकारी हमारे वेस्टिबुलर तंत्र को देती है जो यह संकेत मष्तिष्क तक पहुँचाता है। और हमारा मष्तिष्क शारीरिक संतुलन व गति में हुए परिवर्तन को भांप लेता है। पर जब इस भाग में गड़बड़ी या विकार होता है। तब हम वर्टिगो (सिर चकराना) महसूस करते है।

2. डिज़ीनेस (Dizziness)

यह कुछ अलग प्रकार से होता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर हमारे आंतरिक कान के किसी भाग से नहीं जुड़ा है। बल्कि यह लक्षण हमें तब दिखाई देता है। जब हमें सर्वाइकल विकार (Cervical disorder) अर्थात गर्दन, ग्रीवा या रीढ़ की हड्डी में किसी प्रकार की कोई समस्या होती है।

इस अवस्था में हमें डिज़ीनेस या चक्कर आना अनुभव होता है। या फिर जब हम बहुत तेज-तेज साँस लेने का प्रयास करते है, तो हाइपरवेंटिलेशन (Hyperventilation) या “अतिवातायनता” के कारण भी हमें चक्कर आते है। साथ ही चिंता और भय जैसी वजह भी इससे सम्बन्ध रखती है।

चक्कर आना के लक्षण

चकर आने से पीड़ित व्यक्ति को चलती वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, सिरदर्द, सुनने की क्षमता में बदलाव या कानों का बजना (टिनिटस) और दिमाग एकाग्र करने में कठिनाई जैसे लक्षण महसूस होते है। इस समस्या के लक्षण कभी भी आ सकते हैं और कभी भी जा सकते हैं। साथ ही यह लक्षण कुछ सेकंड से लेकर कई मिनटों, घंटों, दिनों तक भी हो सकते हैं।

चक्कर आने के मुख्य लक्षणों में –

चक्कर आना

चक्कर आने के मुख्य कारण

वैसे तो चक्कर आने के पीछे कई कारक हैं। पर लगभग 50 प्रतिशत चक्कर आने के कारण आंतरिक कान की गड़बड़ी, 15 प्रतिशत शारीरिक दोष या सर्वाइकल बीमारियों के कारण, 5 प्रतिशत असफल चिकित्सा के कारण होता है। हालाँकि, बाकी कारण अभी तक अज्ञात हैं।

कुछ अन्य कारणों में मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल है –

1. मेनियर (Meniere) रोग

मेनियर रोग एक प्रकार से आंतरिक कान का विकार है। जिसमें तरल पदार्थ आपके आंतरिक कान में बनता है। जिससे की आपको अपना कान का भरा हुआ महसूस होता है। साथ ही आपको सुनने की शक्ति में कमी महसूस होने लगती है। हालाँकि यह आमतौर पर आपके केवल एक कान को ही प्रभावित करता है। पर सुनने की समस्या का बार-बार होना, अस्थायी बहरापन से स्थायी बहरापन तक भिन्न होता है।

2. बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी)

बीपीपीवी (Benign Paroxysmal Possessional Vertigo -BPPV) आंतरिक कान में होने वाली समस्या है। यह वर्टिगो का ही एक लक्षण है, जिसकी वजह से आपको मितली, उल्टी और चक्कर आना आम बात है। यह आपके द्वारा अपने सिर को विशिष्ट रूप से एक ख़ास स्थिति में हिलाने की वजह से होता है।

3. केंद्रीय वेस्टिबुलर (कर्ण-कोटर सम्बन्धी)

इस समस्या के फलस्वरूप ध्वनि आपके आंतरिक कान तक नहीं जाती है। वेस्टिबुलर सिस्टम (कर्ण-कोटर प्रणाली) में मुख्य रूप से आंतरिक कान और मस्तिष्क का हिस्सा होता है। जो शारीरिक संतुलन, गति और घूर्णन को नियंत्रित करता है। 

जब इस प्रणाली को नुक्सान पहुँचता है, तब सिर के चकराने की वजह से श्रवण बाधित होने की समस्या भी उत्पन्न होती है। हालाँकि, यह 14 प्रतिशत आंतरिक कान से संबंधित परेशानियों की वजह से होता है। जिन्हे वेस्टिबुलर रोग कहा जाता है। 

4. सेंसोरिनुराल (संवेदी) श्रवण-हानि

सेंसोरिनुराल श्रवण-हानि (Sensorineural hearing loss) संवेदी-स्नायविक श्रवण शक्ति की कमी को तंत्रिका-बहरापन (नर्व डेफनेस) भी कहा जाता है। यह “कोक्लीअ” (कर्णावृत), या ध्वनि प्राप्त करने वाले आंतरिक कान का हिस्से में उपस्थित सूक्ष्म कोशिकाओं में उत्पन्न विकार के कारण होता है।

5. अचानक सेंसोरिनुराल श्रवण-हानि (एसएसएचएल)

यह समस्या 72 घंटे या उससे कम समय में अचानक होने वाले बहरेपन के कारण होती है। हालाँकि, यह समस्या बढ़ती उम्र के कारण ज्यादातर 30 से 60 की आयु वर्ग के लोगो में होती है। लगभग 50 प्रतिशत व्यक्ति अचानक हुई संवेदी-स्नायविक श्रवण शक्ति की कमी से पीड़ित होने पर तेज़ चक्कर आना और सिर चकराने का अनुभव करते हैं।

चक्कर आने की अन्य समस्याएं

अचानक से चक्कर आना या सिर घूमना और उल्टी आना जैसी समस्या के होने के पीछे पाए जाने वाले मुख्य कारण हम आपको ऊपर बता चुके है। पर इनके अतिरिक्त आपकी शारीरिक कमजोरी या शरीर में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों का न पाया जाना भी एक कारण है।

कुछ अन्य कारणों से भी चक्कर आने की समस्या होती है जो की –

1. केंद्रीय रूप से चक्कर आना

इस समस्या के अंतर्गत केंद्रीय तंत्रिका-तंत्र (सेन्ट्रल नर्वस सिस्टम) में, अचानक चक्कर आना प्रारम्भ होता है। हालाँकि, यह समस्या आपको माइग्रेन (अधकपारी) या आधे सर में दर्द होना, ट्यूमर (रक्त का थक्का बनना), कान में संक्रमण (इन्फेक्शन), मध्य कान में सूजन, और आघात (स्ट्रोक), कान के कैंसर जैसी समस्या होने के कारण भी हो सकती है।

2. द्रष्टिगत रूप से चक्कर आना

इसे आम भाषा में “द्रष्टिगत भ्रम” (मतिभ्रम) भी कहा जाता है। क्योंकि यह समस्या आपकी आँख की मांसपेशियों में आये असंतुलन के कारण उत्पन्न होती है। जिससे की आपको अपना ध्यान केंद्रित करने और कुछ भी पढ़ने में कठिनाई होती है।

3. साइकोजेनिक सिर का चक्कर आना

तब होती है जब हमें चक्कर आने पर किसी भी प्रकार के शारीरिक कारक उत्तरदायी नहीं होते है। इसका मतलब यह है की डॉक्टर द्वारा जाँच करने पर यदि चक्कर आने का कोई भौतिक कारण न मिले जैसे की भीतर कान से सम्बंधित बीमारी के लक्षण या हमारे गर्दन से जुडी समस्याएं तब इस अवस्था को मानसिक समझा जाता है। और इस प्रकार के चक्कर आने को साइकोजेनिक चक्कर आना कहा जाता है।

इन सबके अतिरिक्त भी चक्कर आने से जुड़े कुछ कारण है जो की –

चक्कर आना
  • वेस्टिबुलर न्यूरिटिस (Vestibular Neuritis)
  • ओटोलिथिक विकार (Otolithic Disorders)
  • वेस्टिबुलर माइग्रेन (Vestibular Migraine)
  • लैबीरिंथाइटिस (Labyrinthitis)
  • पेरिल्मफ फिस्टुला (Perilymph Fistula)
  • वेस्टिबुलर प्रॉक्सिमा (Vestibular Proxima)
  • ध्वनिक न्युरोमा (Acoustic Neuroma)
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis)
  • टिनिटस (Tinnitus)

डॉक्टर से परामर्श कब करें?

कोई भी समस्या बढ़ने पर या आपके नियंत्रण में न रहने पर कई जटिलताएं जन्म लेती है ऐसे में आपको तुरंत किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए या फिर नजदीकी अस्पताल में जाना चाहिए। सिर में चक्कर आना या सर चकराना की समस्या से ग्रस्त होने पर सावधानी रखें।

जैसे ही आपको ये लक्षण महसूस हों, तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें –

चक्कर आना
  • निरंतर उल्टी आना
  • असहज महसूस होना
  • शारीरिक कमजोरी होना
  • बार-बार चक्कर आना
  • गंभीर रूप से सिरदर्द (माइग्रेन)
  • दृश्य गति (ऑब्जेक्टिव वर्टिगो)
  • सबकुछ घूमता हुआ महसूस होना 
  • प्रकाश-संवेदनशीलता होना
  • पराबैंगनी किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील
  • निस्तग्मस (Nystagmus) या अक्षिदोलन
  • आँखों की पुतलियों का अनायास घूमना 
  • बुखार होना, ठंडे हाथ या पसीना आना

चक्कर का इलाज या उपचार

उपयुक्त चक्कर आने का उपचार मुख्य रूप से चक्कर आने के कारण पर निर्भर करता है। सबसे पहले रोगी को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, फिर चक्कर आने के कारण के आधार पर डॉक्टर द्वारा इलाज (ट्रीटमेंट) होना चाहिए।

1. मेनिएयर रोग के लिए उपचार

हालाँकि इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर “डायजेपाम” (Diazepam) नामक दवा देते है, और साथ ही नमक पर प्रतिबंध लगाने, आहार में परिवर्तन करने, व मेनिएयर रोग के लिए “संज्ञानात्मक चिकित्सा” या कॉग्निटिव थेरेपी (Cognitive therapy) की सलाह देते हैं।

2. बीपीपीवी के लिए उपचार

वैसे तो इस समस्या में चक्कर आना (डिज़ीनेस) कुछ समय में अपने आप चला जाता है। लेकिन फिर भी अगर इलाज की आवश्यकता होती है तो ऐसे कुछ सिर अभ्यास होते हैं जिन्हे आप कर सकते है। या फिर जब समय के साथ मस्तिष्क भीतरी कान के गूढ़ संकेतों को कम प्रतिक्रिया देता है। तब भी आप इन्हे कर सकते है।

3. केंद्रीय वेस्टिबुलर के लिए उपचार

कर्ण-कोटर सम्बन्धी रोग के कारण आने वाले चक्कर के लिए, कुछ प्रकार के सिर, शरीर और आंख के अभ्यास की सलाह दी जाती है।शरीर के अन्य विकारों का भी शल्य चिकित्सा (सर्जरी) द्वारा, दवा द्वारा, तथा जीवनशैली में परिवर्तन करने के साथ इलाज किया जा सकता है। हमारा शारीरिक संतुलन और सुनने की शक्ति (हियरिंग), मानव शरीर के विभिन्न हिस्सों के बीच होने वाले संबंध सहित कई विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है

सिर में चक्कर आना का घरेलु उपचार

यदि आपको बार-बार चक्कर आने की समस्या है। सिर में भारीपन और चक्कर आना आम है। तो फिर आपको इन घरेलु नुस्खे को आजमाना चाहिए। जिनसे आप सर चकराना जैसी समस्या से निजात पा सकते है।

यह सभी घरेलु उपचार (होम रेमिडीज) निम्नलिखित है –

1. तुलसी

अगर आपको चक्कर आने जैसी समस्या है तो आपको तुलसी के पत्ती पर शहद लगाकर चाटना चाहिए। यह विधि चक्कर आने को रोकती है। या फिर आप तुलसी के रस में शक्कर मिलकर भी ग्रहण कर सकते है। इस विधि से यह समस्या सदा के लिए समाप्त हो जाएगी।

2. धनियां

आप रात में एक ग्लास पानी में लगभग 10 ग्राम धनियां पाउडर और 10 ग्राम आंवला पाउडर को मिलाकर रख दें।  फिर सुबह इस मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर पियें। यह उपाय कुछ दिन तक प्रयोग करने से आपको चक्कर आने की परेशानी में राहत प्रदान करेगा, और इसे जड़ से ख़त्म कर देगा।

3. लौंग

जब भी आपका सर चकराए तो आप आधा ग्लास पानी में दो लौंग डाल कर उसे उबाल लें। फिर इस मिश्रण के पानी को पी लें। यह आपको तुरंत आराम पहुचायेगा। और इस समस्या के प्रभाव को भी कम करेगा।

4. आंवला

इस उपचार के अंतर्गत आप 10 ग्राम आंवला, 10 ग्राम बताशे और 3 ग्राम काली मिर्च का मिश्रण बनाकर इसे पीस लें। फिर इस मिश्रण का प्रतिदिन सेवन करें। 15 दिन तक यह विधि करने से आपको चक्कर आना बंद हो जायेंगे।

5. फलों का रस

यदि आपको चक्कर आने की समस्या है, तो आप प्रतिदिन फल खाएं। अथवा आप फलों का रस (फ्रूट जूस) निकल कर दिन के भोजन से 2 घंटे पहले पियें और शाम के समय भी पिए। पर इस रस में कुछ अन्य मसाला, नमक, चीनी आदि न मिलाएं। इस विधि से आपको लाभ होगा।

6. नारियल पानी

सर चकराने की समस्या से पीड़ित व्यक्ति को नारियल का पानी पीने से भी बहुत लाभ मिलता है। इसके लिए आप प्रतिदिन नारियल का पानी पियें। आपको चक्कर आना बंद हो जायेंगे।

7. खरबूजे के बीज

आप एक खरबूजे के बीज को पीस लें या फिर आप बाजार से खरबूजे के बीज लेकर उन्हें पीस लें। फिर इस पाउडर की थोड़ी मात्रा सुबह और थोड़ी मात्रा शाम को ग्रहण करें। आपको इस समस्या से लाभ मिलेगा।

निष्कर्ष व परिणाम

चक्कर आना एक बेहद आम समस्या है जो की किसी भी व्यक्ति को कभी भी हो सकती है। इसमें कई बार आपके शरीर में होने वाली कमजोरी या अन्य बिमारी जैसे कान के रोग आदि के कारण चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है। यह कोई गंभीर स्थिति नहीं है, जब तक की यह समस्या आपको बार-बार न होने लगे। क्योकि कभी कभी चक्कर आना सामान्य है। पर बार-बार और अचानक से चक्कर आना एक गंभीर समस्या है। जिसका उचित चिकित्सीय इलाज आपको करवाना चाहिए। बेहतर खाएं स्वस्थ रहें।

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